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यशोदा मेडिसिटी अस्पताल : वर्ल्ड क्लास क्वालिटी, एक बार ज़रूर घूम आइये! देखें वीडियो

यशवंत सिंह-

कुछ लोगों की दिक्कत है रोने की। वे रोते रहेंगे। मैंने यशोदा मेडिसिटी नामक नए खुले एक अस्पताल का वीडियो क्या बनाकर डाल दिया, रोने वाले कमेंट में आ गए। यशवंत जी ने पैसे खा लिए। यशवंत फाइव स्टार अस्पताल का प्रचार करने लगे। हाय, हमारे देश के गरीबों का क्या होगा, वे तो इसमें इलाज नहीं करा पायेंगे।

अरे भाई मैं अभी तक कैलाश हॉस्पिटल, सर्वोदय हॉस्पिटल आदि की ओपीडी में ख़ुद को दिखाता था, कोई समस्या महसूस होने पर। आज यशोदा मेडिसिटी चला गया। बहुत बड़े एरिया में बना है, उद्घाटन में राष्ट्रपति, सीएम, केंद्रीय मंत्री आए थे। जीभ के छाले ठीक न होने के कारण फिर दिखाने चला गया। मेरा अनुभव शानदार रहा। ईएनटी की ओपीडी में जाते वक्त लिफ्ट के पास पूर्व आईपीएस अधिकारी Badri Prasad Singh जी मिल गए। वे भी ईएनटी में ही दिखाने आए थे। अपनी बारी का इंतज़ार करते हुए एक सेल्फी ली!

नीचे उतरा तो वरिष्ठ पत्रकार और मित्र Prasoon Shukla जी मिल गए। उनका पुत्र समय से काफ़ी पहले पैदा हुआ है और उसे अस्पताल में रखा गया है, महीने भर से। उन्होंने अस्पताल के चेयरमैन अरोड़ा जी से मिलवाया। अरोड़ा जी ने पूरा अस्पताल दिखवाया। तो लगा इसके बारे में सबको बताना चाहिए। आए दिन हम सब घटिया अस्पतालों में पैसे खर्च करने के बावजूद सही इलाज नहीं पाते हैं। तो हमारी लिस्ट में ऐसे सही अस्पताल भी होने चाहिए जहाँ मकसद किसी को लूटना नहीं बल्कि उचित इलाज करना है।

जब लंग इन्फेक्शन से पीड़ित एक गरीब पत्रकार का कैलाश अस्पताल के आईसीयू में कई दिन तक इलाज कराने के बाद डिस्चार्ज के वक्त मैनेजमेंट से अनुरोध कर लाखों रुपये माफ कराया था तब एक भी सज्जन ने कमेंट कर विरोध नहीं किया था कि ऐसा क्यों कराया। लेकिन अगर किसी नए अस्पताल के बारे में आंखों देखी जानकारी दे दी तो यशवंत अमीरों का समर्थक हो गया या पैसे लेकर विज्ञापन चलाने वाला बन गया। ग़ज़ब कुंठित मेंटेलिटी के लोग हैं भाई।

बशीर बद्र के शब्दों में-

मुख़ालिफ़त से मिरी शख़्सियत सँवरती है,
मैं दुश्मनों का बड़ा एहतिराम करता हूँ!

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शंभुनाथ शुक्ला-
Yashwant कुछ भी हों बेईमान तो नहीं हैं। अब सरकारी अस्पतालों का जो हाल है, ऐसे में प्राइवेट अस्पताल यदि अच्छा करते हैं तो क्या बुरा है।

कलावंती सिंह-
सही कहा आपने। अगर संस्थाओं के बारे में हम अपनी बुरी राय लिखते बोलते हैं तो किसी संस्थान के बारे में अच्छी राय हो तो वह भी लिखना चाहिए।

सतीश झा-
भाई साहब आपने बिल्कुल सही लिखा है। आप सही को सही और ग़लत को ग़लत कहने के लिए जाने जाते हैं। दूसरे के कुछ भी कहने से कोई फर्क नहीं पड़ता।

रवीश रंजन शुक्ला-
सकारात्मक ऊर्जा भी देनी जरुरी है जो लोग काम कर रहे हैं। हम लोग अपने अलावा सबको चोर मान बैठे हैं। आजकल दलाल का सार्टीफिकेट लोग बांट रहे हैं।

दीपक पुरी-
यशवंत जी बहुत हरामी लोग पड़े हैं जब इन पर आती है तो साले याद करते है ऐसे लोगों को सफाई देने की जरूरत नहीं, अच्छे कार्य होने पर यह सब दैत्य आत्माएँ आती है, जैसा कि देवताओं के साथ भी होता था।

Yashoda Medicity me mere Adarneey Dr Lokesh kashyap sir HOD Anesthesia AIIMS bhi retirement ke baad jude hai. AIIMS me inke ek SMS ya char line ke chit likh dene se senior ya best facility se bina appointment treatment ho jata tha. Jo ki protocal director office se kabhi sambhav nahi. – राजेश प्रताप सिंह

मनु लक्ष्मी मिश्रा-
सहमत हूं, पी एन अरोरा जी बहुत अच्छे व्यक्ति हैं। मैं गाजियाबाद तैनात रह चुकी हूं। कोविड के समय विरोध भी किया है। आपकी बात पूर्णतया सही है कि आधुनिक मशीनों से सुसज्जित, योग्य डाक्टर से लैस अस्पताल है। जब मशीनें उत्कृष्ट होंगी तो महंगी होंगी। लोगों का काम है कहना।

गोलेश स्वामी-
मैं डाक्टर अरोड़ा जी को नहीं जानता। लेकिन सुना जरूर है कि वे वाकई विश्वस्तरीय चिकित्सा विशेषज्ञ हैं। उनका नाम तब लाइमलाइट में आया जब लखनऊ के पीजीआई से छुट्टी कराकर कोरोना पीड़ित पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह जी ने डाक्टर अरोड़ा जी के अस्पताल की शरण ली और स्वस्थ होकर लौटे। जबकि पीजीआई में भर्ती कैबिनेट मंत्री चेतन चौहान सहित दो कैबिनेट मंत्रियों को पीजीआई के चिकित्सक नहीं बचा सके थे। ऐसे डाक्टर अरोडा जी ने कोई नया चिकित्सा संस्थान बनाया है तो निश्चित ही अच्छा और विश्वस्तरीय होगा। जब अनेक प्राइवेट अस्पतालों की साख खराब हो तो ऐसे में एक विश्वसनीय चिकित्सा संस्था का खुलना सुकून देता। हालांकि अच्छे और शक्तिशाली लोगों का विरोध होना स्वाभाविक है। चाहे वे किसी पेशे या वर्ग के हों। लेकिन हमें विरोध से डरना नहीं चाहिए और ऐसे लोगों को नजरअंदाज कर अच्छे लोगों का साथ जरूर देना चाहिए। एक फिल्म के गाने की पंक्तियां इस मामले में सटीक बैठती हैं- कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना—–। अंत में ईश्वर से यही प्रार्थना करूंगा कि ईश्वर न करे कि किसी को अस्पताल जाने की जरूरत पड़े।

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