संजय कुमार सिंह
आज की सबसे बड़ी खबर यही होनी चाहिए थी कि पांच लोगों को पता था कि मोटर साइकिल सवार गड्डे में गिरा पड़ा है, किसी ने मदद नहीं की (हिन्दुस्तान टाइम्स) या कर नहीं पाए। मैं भी सोच रहा हूं कि रात को लौटते हुए मुझे ऐसे हादसे की सूचना मिले तो मैं क्या कर सकूंगा। पुलिस एम्बुलेंस को सूचना देने के अलावा क्या विकल्प हैं। मैं तो यह काम कर दूंगा। आम आदमी कर पाएगा? इनमें एक संबंधित ठेकेदार ही हो तो उसे क्या करना चाहिए, मैं नहीं जानता। दूसरी खबर सासंद पप्पू यादव की गिरफ्तारी की भी है। यही नहीं, पहले रुपया गिरता था तो सरकार की प्रतिष्ठा गिरती थी अब प्रधानमंत्री ने कहा है, भरोसा भारत की सबसे मजबूत करंसी है (देशबन्धु)। फरीदाबाद के सूरजकुंड मेले में फिर हादसा हुआ, एक पुलिस इंस्पेक्टर की मौत – यह भी सिस्टम की लापरवाही का मामला है। पहले भी हो चुका है। मोहन भागवत ने कहा है, हमें महान नहीं विश्व गुरु बनना है (नवोदय टाइम्स)। डिग्री छिपाने वाले लोग परीक्षा पर चर्चा करें तो महान क्यों बनेंगे। महान तो हैं ही। विश्व गुरु ही बनना चाहेंगे। मुझे लगता है यह भी खबर है, रह गई। इन खबरों के बीच आज अमेरिका के साथ भारत के व्यापार करार की खबर लीड है। ज्यादातर शीर्षक सरकार की तारीफ वाले हैं। असल में पहले अखबारों में खबर और विज्ञापन या प्रचार अलग होते थे। फिर दोनों को मिला दिया गया और बता भी दिया जाता था। अब जब सरकार खबरों पर नजर रखती है तो ज्यादातर अखबार प्रचार ही करते हैं। विज्ञापन किसे खोना है। इसमें हो यह गया है कि जो विज्ञापन नहीं लेते हैं और पाठकों या दर्शकों के दान पर चलते हैं वे भी बिकने वाली खबरें करते हैं। जनहित के लिए पैसे कौन दे और जनहित पीछे छूट गया है। इसलिए गड्डे में गिरकर मरने वाली वह कहानी ज्यादा बिकी जो ज्यादा भावुक थी या मोटर साइकिल वाले के मुकाबले कार वाले की थी। पता नहीं लेकिन मौत की खबर में भावना है, सिस्टम की गलती या उसे ठीक करने में लापरवाही कहीं छूट गई है। अब शीर्षक देख लीजिए, ज्यादातर प्रचार करते लग रहे हैं
1. अमर उजाला – अमेरिका का अतिरिक्त टैरिफ खत्म… व्यापार समजौते का नया फॉर्मूला तय, अनाज फल व डेयरी को संरक्षण
अव्वल तो यह रूस से तेल नहीं खरीदने की शर्त पर हुआ और खरीदा तो फिर 25 प्रतिशत टैक्स लगेगा। मुझे लगता है कि खबर अमेरिका की यह शर्त और भारत ने इसे मान लिया है। न कि फ्रैंड ट्रम्प ने जो टैरिफ लगाया था वह अपने फ्रैंड को बंगाल जीतने के लिए वापस ले लिया है।
2. नवोदय टाइम्स – डेयरी उत्पाद, गेहूं, चावल, मक्का, एथनॉल के क्षेत्र समझौते में सुरक्षित। यह मूल खबर का दूसरा प्रचार वाला एंगल है। सरकार ऐसा कह रही है और उसे इस प्रचार की जरूरत है। लेकिन यह मूल खबर नहीं है। साइड स्टोरी होती है।
3. देशबन्धु – भारत अमेरिका व्यापार समझौते की रूपरेखा जारी, कृषि और डेयरी क्षेत्र में समझौता नहीं : गोयल। यह खबर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के हवाले से है जिन्होंने कहा था कि समझौते पर साझा बयान चार से पांच दिन में जारी करेंगे। इससे पहले ट्रम्प और अमेरिका एकतरफा बयान जारी कर रहे थे। अब ट्रम्प पहले ही समझौते की बात कर रहे हैं। क्या यह हेडलाइन मैनेजमेंट के लिए है, अखबारों को लीड देने के लिए नहीं है?
4. द टेलीग्राफ – Devil is in detail कंप्यूटर अनुवाद है, असली समस्या बारीकियों में है। इसका मतलब हुआ, विवरण देखिए, गड़बड़ है। कहने की जरूरत नहीं है कि पत्रकारिता या रिपोर्टिंग का मतलब प्रेस विज्ञप्ति से खबर बनाना या प्रेस कांफ्रेंस रिपोर्ट करना नहीं है। करार का ब्यौरा मिलने पर उसके विवरण से खबर निकालनी चाहिए या गड़बड़ियों की जानकारी दी जानी चाहिए।
5. दि एशियन एज – भारत, अमेरिका अंतरिम व्यापार करार पर पहुंचे, टैरिफ, शुल्क में कटौती पर सहमति। यह शीर्षक खबर जैसा तो है और यह खबर भी है। लेकिन सरकार इस खबर को किस्तों में जारी करके रोड हेडलाइन मैनेजमेंट कर रही है और आगे-पीछे की खबरों के लिहाज से यह लीड नहीं है।
6. हिन्दुस्तान टाइम्स – भारत अमेरिका ने नई व्यापार व्यवस्था तय की। यह बैनर शीर्षक है और इस महान कार्य के लिए प्रधानमंत्री को सम्मानित किया जा चुका है।
7. टाइम्स ऑफ इंडिया – US Deal’s Done But Oil’s Still A Toil, अमेरिका से डील तो हो गया पर तेल अभी भी कील (समस्या) है।
8. द हिन्दू – भारत, अमेरिका ने करार के ढांचे का खुलासा किया। गौर कीजिए, यह करार का ढांचा है, करार नहीं और अगले महीने हस्ताक्षर होने के बाद लागू होंगे पर रूस से तेल का आयात कम हो चुका है। खबर छप चुकी है और उससे संबंधित खबरों की चर्चा आज नहीं है।
9. इंडियन एक्सप्रेस – भारत अमेरिका अंतरिम करार पर पहुंचे। जाहिर है यह लीड जैसी खबर नहीं है फिर भी है तो इसलिए कि इसे लीड बनाने के उपाय किए गए हैं। प्रधानमंत्री का सम्मान इसमें शामिल है।
पत्रकारिता स्वतंत्र होती, जनहित के लिए की जा रही होती तो आज लीड यह हो सकती थी कि दिल्ली जल बोर्ड के गड्ढे में मोटर साइकिल के साथ गिरने से मौत के हादसे में उप ठेकेदार को गिरफ्तार किया गया है क्योंकि उसने हादसे की जानकारी होने पर भी कोई कार्रवाई नहीं की। आया और कुछ किए बगैर मौके से चला गया। ठीक है कि इसके लिए गिरफ्तार किया जाना चाहिए और कार्रवाई होगी लेकिन हादसे के लिए वह जिम्मेदार नहीं है। अगर सड़क पर गड्डा किया गया था तो वहां रोशनी होनी चाहिए थी, संकेतक होने चाहिए थे। यह सब करना किसका काम है और अगर ठेकेदार का होगा तो सस्ते में वही काम करेगा जो इन सुरक्षा नियमों का पालन नहीं करेगा और यह सब रिश्वत देने के लिए मजबूरी भी हो सकती है। पूरा मामला सिस्टम का है और उसके लिए कोई कार्रवाई नहीं हुई है। दो चार दिन में इसी को कार्रवाई मानकर चर्चा पूरी हो जाएगी। फिर कोई हादसा होगा। फिर कोई ठेकेदार या गवाह फंसेगा। ऐसे ही व्यवस्था चलती रहेगी। जो ठीक करने का झांसा देकर आए वे चुनाव जीतने में लगे हैं। जिन्हें देखना है वो दिखाने पर भी नहीं देख रहे हैं। (समाप्त)
पहली किस्त – आज के अखबार : लगता है भारत-अमेरिका व्यापार सौदे की खबरें दूसरी खबरों से ध्यान हटाने के लिए ही हैं। लिंक – https://www.bhadas4media.com/lagta-hai-bharat-america-vyapaar-saude-kee-khabren/

फोटो मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


