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अदाणी समूह के चैनल NDTV में फिर से फायरिंग, 200 मीडियाकर्मियों पर लटकी तलवार

बीते करीब कुछ साल पहले की बात है। NDTV के मैक्स स्क्वॉयर स्थित आधुनिकता से युक्त दफ्तर में टी ज़ोन (पैंट्री) के पास काम करते हुए चाय बनाने वाले एक सज्जन कह रहे थे कि मुझे NDTV में काम करते हुए 27 साल हो गए। यहां से इतना गहरा जुड़ाव है कि कहीं दूसरी ओर देखने की जरूरत ही नहीं पड़ी। दरअसल, उन दिनों भी फायरिंग का माहौल था। टीवी और डिजिटल में काम कर रहे 170 से अधिक कर्मचारियों को कूटनीतिक तरीके से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था।

सेटलमेंट का पैसा न देना पड़े, इससे बचने के लिए अदाणी समूह के चैनल ने पहले ही पीआईपी (परफॉर्मेंस इम्प्रूवमेंट प्लान) की तरकीब निकाल ली थी। कहीं कोई शोर-शराबा नहीं हुआ। न कोई विरोध, न कोई मांग। हर बार की तरह मौन का घूंट पीकर, सब्र और नई उम्मीद के साथ सभी फायरिंग के शिकार कर्मचारियों ने नमस्ते कर लिया। अब यह बात पुरानी हो गई। लेकिन पुराना जख्म फिर से हरा हो गया।

NDTV चैनल आर्थिक रूप से बहुत ताकतवर है। देश के बड़े कारोबारी धनपति अदाणी का हस्तक्षेप और स्वामित्व है। एचआर हेड भी कोई कम रसूख वाली नहीं हैं। देश के वज़ीरे-आलम के एक बड़े अफसर की बेटी हैं, तो भला वह सीधे मुंह मीडिया कर्मियों से कैसे बात करेंगी? उनके भी तेवर सातवें आसमान पर रहते हैं।

उन्हें क्या पता कि फायरिंग के बाद गांव से शहर आए मीडिया कर्मियों के सामने किस-किस तरह की चुनौतियां होती हैं? नौकरी जाने के बाद नई नौकरी खोजने में कितनी मेहनत लगती है, वह भी तब जब बिना किसी वाजिब वजह के आपका नाम फायरिंग की सूची में डाल दिया जाए। इस मामले में तथाकथित टीएल और संपादकों की भी भूमिका बड़ी रहती है। उनके पत्रकारिता के मूल्य उसी दिन बिक चुके होते हैं, जिस दिन वे ऑफर लेटर लेकर कंपनी में एंट्री करते हैं। 

अदाणी को क्या पता कि चैनल के अंदर खेमेबाजी क्या चल रही है? भगवान अगले जन्म में गौतम आदाणी को एक पत्रकार बनाएं, ताकि वे कारोबार के साथ फायरिंग और पत्रकारिता पेशे की समझ को जान सकें। वैसे चैनल खरीदने का हुनर तो है, लेकिन पत्रकारिता के मूल्य शून्य प्रतीत हो रहे हैं।

अब आप सोच रहे होंगे कि इतनी लंबी कहानी क्यों बताई जा रही है? चिंगारी क्या कहना चाह रही है? तो मुद्दे की बात यह है कि सूत्रों से पता चला है कि NDTV प्रबंधक पिछले साल की तरह फिर से फायरिंग कर रहा है, वो भी बड़े स्तर पर। सूत्र बता रहे हैं कि इस बार 200 लोगों पर तलवार लटकी है। पीआईपी का लेटर थमाकर टाइमलाइन दे दी गई है। लेकिन इस बार फायरिंग की गाज टीवी में काम करने वाले कर्मचारियों पर गिरी है। दिल्ली से दूर पदस्थ एक वरिष्ठ रिपोर्टर भी इसका शिकार हुए हैं। वे कहते हैं, हां मेरा भी नाम है। जब उनसे पूछा गया कि अब आगे की क्या तैयारी है, तो बोले देखा जाएगा। उनका आत्मविश्वास यह बताता है कि उनके शब्दों और कलम में अभी जान बची हुई है, कुछ नया खोज लेंगे।

सवाल यह है कि इस फायरिंग की वजह क्या है? क्या कोई आर्थिक कारण है? या धनपति अदाणी की हालत पतली हो गई है NDTV का संचालन करते हुए? इस विषय पर अभी मजबूती से कुछ नहीं कहा जा सकता, लेकिन फायरिंग को लेकर यह कहा जा रहा है कि खेमेबाजी हो रही है। अपनों को लाने के लिए यहां से कई लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। दूसरी वजह यह भी हो सकती है कि मार्च में वेतन बढ़ोतरी की प्रक्रिया है। मीडियोकर्मियों के अंदर डर बना रहे, इसलिए पहले ही फायरिंग कर दो, ताकि काम कर रहे कर्मचारियों के अंदर ज्यादा इंक्रीमेंट की उम्मीद न रहे। यह सभी पूंजीपतियों के चैनलों का एक पुराना सेट ट्रेंड है।

अब आपको खबर के ऊपरी हिस्से की ओर ले चलते हैं, जहां एक कर्मचारी कह रहा था कि मुझे 27 साल हो गए यहां। लेकिन अब स्थितियां बिल्कुल अलग हैं। आने वाले कर्मचारी NDTV में शायद ही अब यह सपना देख सकें कि यहां कुछ समय अच्छा काम करते हुए बिताया जा सकता है, क्योंकि अब यह पहले वाला NDTV नहीं रहा। न इसमें अर्चना वाला भरोसा है, न राय साहब वाला नजरिया। पहले की व्यवस्था शोषण से मुक्त थी। सरकार से सवाल किए जाते थे दमदारी से। अब की नई व्यवस्था शोषण से युक्त है। ये एक बड़ा अंतर है। तभी तो करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी टीआरपी में कोई खास बढ़ोतरी नहीं दिख रही। कई नामी-गिनामी एंकरों की फौज लाखों-करोड़ों के पैकेज पर टीआरपी बढ़ाने के लिए लाई गई, पर टीआरपी निचले पायदान से हिल नहीं रही।

चिंगारी की मोटी बात यह है कि भरोसा खरीदा नहीं जा सकता, भरोसा बनाया जाता है। नोटों से चैनल खरीदे जा सकते हैं, लेकिन भरोसा नहीं।

वैसे चिंगारी को 200 मीडिया कर्मचारियों को बाहर निकाले जाने का खेद है। उनके प्रति संवेदना है। अब NDTV प्रबंधन तानाशाही पर उतारू हो गया है। चलते-चलते NDTV का माइक आईडी लेकर घूमने वाले पत्रकारिय मूल्यों के प्रवर्तकों से सवाल है कि क्यों नहीं माइक की आईडी अपने मालिक की तरफ घुमा देते हो और सवाल करो कि सेठ जी ऐसा क्यों कर रहे हो? 200 साथियों को बाहर मत करिए। सरकारों और नेताओं से सवाल करने के लिए तो क्रांतिकारी बन जाते हो, एक सवाल अपने सहकर्मियों के लिए भी करके दिखाओ? 

(एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित)


एनडीटीवी प्रबंधन द्वारा जारी मेल देखें-

Private and Confidential

Dear

This is to bring to your attention that your Department Head has observed that your current performance is not meeting the expectations of your role, which is impacting the overall functioning of the team and department.

You are advised to connect with your Department Head immediately to understand the specific areas requiring improvement.

This communication is intended as an early alert. We encourage you to reflect on the performance expectations and make focused efforts toward improvement. Your commitment and willingness to work on these areas will be critical to your success, and we remain available to support you through this process.

However, please note that if significant improvement is not demonstrated, and the same is not formally confirmed to HR by your Department Head by March, 2026, it may become necessary to re-evaluate the continuation of your services.
Should you have any questions or require clarification, please reach out to your Department Head, copied on the email.

Regards,
Team HR

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3 Comments

3 Comments

  1. Sumit Gupta

    February 27, 2026 at 1:16 pm

    पहले सभी डिपार्टमेंट हेड इसी लिए तो बदले गए हैं ताकि लोगों को निकला जा सके,
    एक बार ये लोग साफ होंगे फिर उन हेड्स का भी नंबर आना तय ही है।

  2. Subodh singh

    February 27, 2026 at 1:19 pm

    Bhadasdesk हमेशा अदानी लिखता है, इस बार अदाणी लिखने का मतलब है ये पोस्ट किसी अंदर वाले ने लिखवाया है

  3. Suman

    February 27, 2026 at 1:53 pm

    Suna hai gussaye kuch logo ne channel ko blackout kar diya hai.

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