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उत्तर प्रदेश

जेल नहीं डेढ़ माह से उर्सला में भर्ती है चैनल मालिक और अधिवक्ता अखिलेश दुबे, अनंत मिश्रा अंटू भी सवालों में!

कानपुर शहर के ऊपर लाल और काला बैनर वाला राजधान-सा पैनोरामिक दृश्य; शीर्ष में 'कानपुर' और नीचे 'खबरे ऑन डिमांड' लिखा है।

कानपुर के चर्चित साकेत दरबार प्रकरण में जेल में बंद न्यूज़ चैनल मालिक और अधिवक्ता अखिलेश दुबे की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। अखिलेश दुबे मुक्ति मोर्चा ने उनकी बीमारी को “नाटक” बताते हुए जिलाधिकारी को शिकायत पत्र सौंपा है और पूरे मामले की जांच एम्स के डॉक्टरों के पैनल से कराने की मांग की है। साथ ही उन्हें तत्काल वापस जेल भेजने की भी अपील की गई है।

मुक्ति मोर्चा का आरोप है कि अखिलेश दुबे बीमारी की आड़ में पिछले करीब डेढ़ महीने से Ursla Hospital में भर्ती हैं और अस्पताल के वातानुकूलित कक्ष से अपना सिंडिकेट संचालित कर रहे हैं। संगठन ने दावा किया है कि कुछ डॉक्टर, नेता, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मिलकर उन्हें जेल से बाहर रखने में मदद कर रहे हैं।

मामला उस समय और चर्चाओं में आया जब होटल कारोबारी रवि सतीजा को कथित तौर पर फर्जी मुकदमे में फंसाकर ढाई करोड़ रुपये की रंगदारी वसूलने के मामले में सुप्रीम कोर्ट से अखिलेश दुबे की जमानत याचिका खारिज हो गई। इसके बाद उनकी बीमारी को लेकर सवाल उठने लगे। आरोप है कि छह अप्रैल को अखिलेश दुबे को सिंडिकेट की मदद से उर्सला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुरुआत में हृदय रोग, फिर डायबिटीज और बाद में घुटनों की समस्या का हवाला देकर उन्हें अस्पताल में बनाए रखा गया।

शिकायत में कहा गया है कि जेल प्रशासन ने अखिलेश दुबे को वापस जिला जेल भेजने के लिए उर्सला प्रशासन को पांच बार पत्र भेजे, लेकिन हर बार डॉक्टरों ने नई बीमारी का हवाला देकर उन्हें डिस्चार्ज करने से इनकार कर दिया। जेल मैनुअल 2022 के पैरा 1004 (8) का हवाला देते हुए कहा गया है कि किसी भी कैदी को आवश्यकता से अधिक समय तक जेल के बाहर अस्पताल में नहीं रखा जा सकता।

मुक्ति मोर्चा की सदस्य प्रज्ञा त्रिवेदी ने आरोप लगाया है कि उर्सला अस्पताल के कुछ वरिष्ठ डॉक्टरों ने फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तैयार कर अखिलेश दुबे को बिना जमानत जेल से बाहर रखने में मदद की। उनका कहना है कि अक्टूबर 2025 में भी छाती में दर्द की शिकायत पर अखिलेश दुबे को कार्डियोलॉजी भेजा गया था, लेकिन जांच में कोई गंभीर समस्या नहीं मिलने पर उन्हें वापस जेल भेज दिया गया था।

प्रज्ञा त्रिवेदी ने चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर जिला प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो मामला मुख्यमंत्री कार्यालय और हाईकोर्ट तक ले जाया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि बीमारी की आड़ में अस्पताल के एसी कमरे से सिंडिकेट चलाया जा रहा है और इसमें मददगार लोगों की भूमिका को हाईकोर्ट में उजागर किया जाएगा।

शिकायती पत्र में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अनंत मिश्रा ‘अंटू’ पर भी अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर अखिलेश दुबे की मदद करने का आरोप लगाया गया है। हालांकि अंटू मिश्रा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अखिलेश दुबे से उनके पुराने सामाजिक संबंध हैं और धार्मिक आयोजन के पोस्टरों में नाम प्रकाशित होना सामान्य बात है। उन्होंने किसी तरह की मदद करने के आरोप को निराधार बताया।

भास्कर में प्रकाशित खबर पढ़िए…

Dainik Bhaskar front page with a bold Devanagari headline and a photo of police officers beside a car at center-right.
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