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सियासत

गडकरी को अमेरिका से इथेनॉल खरीदकर भारत में 20% मिलावट की जरूरत क्यों पड़ी?

News collage about US ethanol exports to India, with a large headline and a sidebar on ethanol basics

लक्ष्मी प्रताप सिंह-

भारत अमेरिका से इथेनॉल खरीद रहा है। बल्कि अमेरिका का भारत को बेचा (एक्सपोर्ट किया) जाने वाला एक्सपोर्ट इतिहास के हाईएस्ट लेवल यानी कि महीने का 31 बिलियन गैलन के पार पहुंच चुका है।

अब आप सोचेंगे कि भारत तो खुद कृषि प्रधान देश है। गन्ना और मक्का वगैरह तो हमारे यहां इतना उगता है कि हम उसे export करते हैं। फिर ये अमेरिका से खरीदने को जरूरत क्यों पड़ी?

और इथेनॉल इतनी ही अच्छी टेक्नोलॉजी है तो अमेरिका खुद अपने यहां के पेट्रोल में क्यों नहीं मिलाता?

अमेरिका भी अपने यहां फ्लूल में इथेनॉल मिलाता है लेकिन मात्र 10%. और उसे E10 फ्यूल कहा जाता है। जिसके लिए वहां की गाड़ियां बनी है। क्योंकि वैज्ञानिक शोध के अनुसार यही मात्रा अलाउड है।

इससे ऊपर का फ्यूल अलग से बोल कर बेचा जाता है कि ये ब्लेंडेड तेल है और जो सस्ता भी बिकता है और इसे “फ्लेक्सी फ्यूल” कहते हैं।

उसे जनरेटर, घास कटाई, चारा कटाई के इंजनों में डाला जाता है। जिन चीजों में अपने यहां मिट्टी का तेल/केरोसिन भी डाल देते हैं। वहां 10 % से ज्यादा इथेनॉल कारों के ईंधन में नहीं मिलाया जाता। क्योंकि उससे कारें खराब होती है।

लेकिन हमारी सरकार के मंत्री गडकरी ने भारत में 20% ब्लेंड कर दिया है। यहां फ्लेक्स फ्यूल” को पेट्रोल के नाम पर जबरिया बेचा जा रहा है। और कोई विकल्प भी नहीं दिया का रहा। अब भारत में जितना गन्ना मक्का से इथेनॉल बनता था वो तो पेट्रोल में ही घुसा दे रहे हैं।

इथेनॉल की जरूरत इंडस्ट्री को भी होती थी जिसमें दवाई, स्वास्थ्य, इत्यादि इंडस्ट्री सबसे ऊपर है। उनके लिए एथनॉल बचा ही नहीं। तो उसके लिए अमेरिका से इंपोर्ट कर रहे हैं।

अगर अमेरिका से इंपोर्ट करके सीधा पेट्रोल में मिला देते तो पब्लिक सवाल करती कि जब अमेरिका 20% नहीं मिलाता तो उससे खरीद के आप क्यों मिला रहे। इस लिए ये तरकीब निकालो गईं है।

इस सरकार में हरामखोरी इतना स्ट्रेटजी लगा के कि जाती है कि पकड़े ना आएं इतना दिमाग अगर अच्छा करने में लगा दें तो देश विकसित हो जाए।

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