टीवी टुडे नेटवर्क की वरिष्ठ पत्रकार एवं एंकर अंजना ओम कश्यप और चर्चित शिक्षक फैसल खान उर्फ खान सर समेत अन्य शिक्षकों के बीच चल रहे मानहानि विवाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने समझौते की संभावना तलाशने के लिए मामले को मध्यस्थता (मेडिएशन) के रास्ते भेज दिया है। न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की एकल पीठ ने गुरुवार (2 जुलाई) को सुनवाई के दौरान कहा कि जो नुकसान होना था, वह हो चुका है और अब दोनों पक्षों को स्थिति को संभालने (Salvage) का प्रयास करना चाहिए।
अदालत ने कहा कि यदि दोनों पक्ष सहमत हों तो आपसी बातचीत के जरिए विवाद का समाधान निकाला जा सकता है। इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता राजशेखर राव को मध्यस्थ नियुक्त किया गया है। कोर्ट ने मामले को उसी दिन शाम चार बजे मध्यस्थता के लिए भेजते हुए अगली सुनवाई 9 जुलाई निर्धारित की है, ताकि मेडिएशन की प्रगति से अवगत हुआ जा सके।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद नीट (NEET) परीक्षा प्रणाली पर आयोजित एक लाइव टीवी डिबेट के बाद शुरू हुआ। आरोप है कि बहस के दौरान अंजना ओम कश्यप ने ऑनलाइन शिक्षकों पर टिप्पणी करते हुए उन्हें “फ्रॉड” और “व्यूज के पीछे भागने वाले एक्सप्लेनर” कहा था। इसके बाद खान सर और अन्य शिक्षकों ने सोशल मीडिया पर अंजना ओम कश्यप की आलोचना की।
इसके जवाब में अंजना ओम कश्यप और टीवी टुडे नेटवर्क ने दिल्ली हाईकोर्ट में दो करोड़ रुपये का मानहानि वाद दायर किया। याचिका में आरोप लगाया गया कि खान सर और अन्य लोगों ने उनके खिलाफ “बिकाऊ पत्रकार”, “चाटुकार”, “दलाली”, “फेक न्यूज की दुकान” जैसे अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया और सोशल मीडिया पर मानहानिकारक सामग्री प्रसारित की।
अदालत ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान अंजना ओम कश्यप की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हृषिकेश बरुआ ने अदालत से आपत्तिजनक पोस्ट हटाने के लिए अंतरिम आदेश देने की मांग की। उनका कहना था कि सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियां पूरी तरह मानहानिकारक हैं।
इस पर न्यायमूर्ति गेडेला ने दोनों पक्षों से पूछा कि वे अदालत के बाहर समझौते का प्रयास क्यों नहीं कर सकते। अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी की आलोचना करना गलत नहीं है, लेकिन उसकी भी एक मर्यादा होनी चाहिए।
अदालत ने कहा, “हो सकता है जो कहा गया, वह उचित न रहा हो। आप किसी की आलोचना कर सकते हैं, लेकिन आलोचना शालीन स्तर की होनी चाहिए। ऐसा लगता है कि यह प्रतिक्रिया उस टिप्पणी के जवाब में आई, लेकिन इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए था। यदि इन शब्दों को हटाया जा सकता है तो विवाद भी कम हो सकता है।”
बच्चों की जानकारी साझा करने पर नाराजगी
सुनवाई के दौरान अंजना ओम कश्यप की ओर से यह भी कहा गया कि खान सर ने सोशल मीडिया पर उनके बच्चों के स्कूल से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक कर दी, जिसके बाद उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं।
इस पर अदालत ने खान सर के वकील मुरारी तिवारी से कहा कि बच्चों से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने का कोई औचित्य नहीं है। न्यायाधीश ने कहा कि शिक्षकों को इस तरह के विवाद में बच्चों को नहीं घसीटना चाहिए।
कोर्ट ने मौखिक रूप से निर्देश दिया कि अंजना ओम कश्यप के बच्चों से संबंधित सभी पोस्ट हटाई जाएं। इस पर खान सर की ओर से अदालत को भरोसा दिलाया गया कि बच्चों से जुड़ी जानकारी वाले पोस्ट हटा दिए जाएंगे। हालांकि, उनकी ओर से यह भी कहा गया कि अंजना ओम कश्यप भी शिक्षकों के खिलाफ इस तरह की टिप्पणियां करना बंद करें।
राजनीति पर भी हुई टिप्पणी
सुनवाई के दौरान जब अंजना ओम कश्यप की ओर से यह कहा गया कि शिक्षकों को राजनीति पर चर्चा नहीं करनी चाहिए, तब अदालत ने हल्के अंदाज में टिप्पणी की, “राजनीति पर तो हर कोई चर्चा करता है। जो राजनीति नहीं भी जानता, वह भी राजनीति पर बात करता है।”
इसके बाद अदालत ने दोनों पक्षों के वकीलों को आपत्तिजनक शब्दों और टिप्पणियों की सूची पर आपस में चर्चा कर समाधान निकालने का सुझाव दिया।
अब इस बहुचर्चित मानहानि विवाद का अगला चरण मध्यस्थता प्रक्रिया होगी। यदि दोनों पक्ष किसी सहमति पर नहीं पहुंचते हैं, तो 9 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट में मामले की आगे सुनवाई होगी।



