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कृषि जागरण से सालों बाद भी नहीं मिला बकाया वेतन, पूर्व कर्मचारियों ने उठाए सवाल

Tweet by Lokesh Nirwal sharing a screenshot of an email about delays in payments and a tentative timeline, with hashtags #JusticeForEmployees #KrishiJagran.

मीडिया संस्थान कृषि जागरण (Krishi Jagran) के पूर्व कर्मचारी लोकेश निर्वाल ने बकाया वेतन का भुगतान नहीं होने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि संस्थान छोड़ने के करीब 11 महीने बाद भी उन्हें उनकी मेहनत की कमाई नहीं मिली है, जबकि प्रबंधन की ओर से लगातार भुगतान के लिए नई-नई समय-सीमाएं दी जाती रही हैं।

लोकेश निर्वाल, जो कृषि जागरण में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत थे, ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा-

“मैंने कृषि जागरण में पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ काम किया। लगभग 11 महीने हो गए KJ Krishi Media छोड़े हुए, लेकिन आज तक मेरी बकाया सैलरी नहीं मिली। हर बार नई टाइमलाइन दी जाती है। मैं केवल अपना मेहनत से कमाया हुआ अधिकार मांग रहा हूँ।”

क्या कहना है कृषि जागरण का?

Mobile email screen showing a message from Soban Danish to Lokesh about delayed payments; mentions clearing dues by 31 December 2026 and asks for cooperation; action buttons visible (Reply all, Forward).
कृषि जागरण की तरफ से कर्मचारी को भेजा गया जवाब

ईमेल में कंपनी ने कहा है कि गंभीर वित्तीय कठिनाइयों की वजह से भुगतान में देरी हुई है। साथ ही उम्मीद जताई गई है कि MFOI 2026 और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से मिलने वाले राजस्व के बाद कंपनी की वित्तीय स्थिति में सुधार होगा। ईमेल में यह आश्वासन भी दिया गया है कि कर्मचारियों के सभी लंबित बकाए का भुगतान 31 दिसंबर 2026 तक कर दिया जाएगा।

हालांकि, पूर्व कर्मचारी इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं दिख रहे हैं। उनका कहना है कि संस्थान छोड़ने के कई महीने बाद भी वेतन का भुगतान न होना कर्मचारियों के अधिकारों का उल्लंघन है और प्रबंधन को जल्द से जल्द लंबित बकाया का निपटारा करना चाहिए।

गौरतलब है कि हाल के महीनों में कृषि जागरण के कुछ अन्य पूर्व कर्मचारियों ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से बकाया वेतन भुगतान में देरी को लेकर अपनी नाराजगी सार्वजनिक की है। वहीं, कंपनी का कहना है कि वित्तीय स्थिति सामान्य होते ही सभी लंबित भुगतान निर्धारित समयसीमा के भीतर कर दिए जाएंगे।


आज 1 जुलाई 2026 है… मेरी नौकरी छोड़े पूरा 1 साल हो गया। 30 जून 2025 को kj krishi media में मेरा आखिरी कार्यदिवस था। एक साल बाद भी मैं अपनी ही मेहनत की कमाई के लिए संघर्ष कर रहा हूं।
हर बार कंपनी की ऑफिशियल ईमेल से मुझे नई Timeline दे दी जाती है, लेकिन वह कभी पूरी नहीं होती।
अब कहा गया है कि 31 दिसंबर 2026 तक इंतज़ार करूं। यानी डेढ़ साल इंतजार! बार-बार तारीख़ें देना, समाधान न करना और लगातार इंतज़ार करवाना मेरे लिए मानसिक उत्पीड़न जैसा अनुभव बन चुका है। मेरे लगातार कॉल करने पर भी कंपनी के फाउंडर
dominic krishi ने मेरा फोन नहीं उठाया। माननीय Labour Ministry, क्या किसी कर्मचारी का वैध बकाया महीनों तक रोकना कानून के अनुरूप है? क्या एक कर्मचारी को अपनी मेहनत की कमाई के लिए बार-बार सिर्फ़ नई तारीख़ें मिलनी चाहिए?
-मोहित नागर, पीड़ित

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