भोपाल। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने देवास में कथित भ्रूण लिंग परीक्षण, अवैध गर्भपात और कन्या भ्रूण हत्या का खुलासा करने वाले स्टिंग ऑपरेशन से जुड़े पत्रकारों को बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने तहलका डिजिटल न्यूज के पत्रकार विनय अरोड़ा को अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) दे दी है। इससे पहले 25 जून को इसी मामले में पत्रकार रजनी को भी नियमित जमानत मिल चुकी है।
दोनों मामलों की सुनवाई न्यायमूर्ति पवन कुमार द्विवेदी की एकल पीठ ने की। अदालत ने माना कि स्टिंग ऑपरेशन के वीडियो एफआईआर दर्ज होने से पहले ही राज्य और केंद्र के संबंधित अधिकारियों को भेजे जा चुके थे। ऐसे में प्रथम दृष्टया पत्रकारों को राहत दिए जाने का आधार बनता है।
अदालत ने क्या कहा?
बार एंड बेंच की वेबसाइट में पब्लिश रिपोर्ट के अनुसार, 2 जुलाई को पारित आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि 6 अप्रैल 2026 को स्टिंग ऑपरेशन का वीडियो मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य आयुक्त, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की अध्यक्ष, राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) और देवास के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को भेजा गया था। इसके अलावा 6 और 7 अप्रैल को भी संबंधित अधिकारियों को वीडियो उपलब्ध कराया गया। इसके बाद 7 अप्रैल को एफआईआर दर्ज की गई।
अदालत ने इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए विनय अरोड़ा को अग्रिम जमानत देने का फैसला सुनाया। रजनी को जमानत देते समय भी कोर्ट ने इसी प्रकार की टिप्पणियां की थीं।
क्या है पूरा मामला?
देवास के कोतवाली थाने में दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया कि विनय अरोड़ा, रजनी और अन्य लोगों ने स्टिंग ऑपरेशन के दौरान बनाए गए वीडियो के आधार पर शिकायतकर्ता से रंगदारी वसूलने की साजिश रची।
एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(5) और 308(6) (रंगदारी), धारा 61(2) (आपराधिक साजिश) तथा धारा 3(5) (समान उद्देश्य) के तहत मामला दर्ज किया गया।
पत्रकारों का पक्ष
पत्रकारों की ओर से अदालत में कहा गया कि उन्होंने स्टिंग ऑपरेशन के जरिए पीसीपीएनडीटी एक्ट, 1994 (PCPNDT Act) और मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट, 1971 (MTP Act) के उल्लंघन से जुड़े कथित अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण, गैरकानूनी गर्भपात और कन्या भ्रूण हत्या का खुलासा किया था।
उनके वकील का तर्क था कि स्टिंग के वीडियो एफआईआर दर्ज होने से पहले ही संबंधित सरकारी अधिकारियों को सौंप दिए गए थे। इसलिए रंगदारी के आरोप निराधार हैं और यह कार्रवाई स्टिंग ऑपरेशन के जरिए अवैध गतिविधियों के खुलासे का प्रतिशोध है।
राज्य सरकार ने किया विरोध
राज्य सरकार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि आरोप गंभीर हैं और पत्रकारों ने स्टिंग ऑपरेशन के दौरान रिकॉर्ड किए गए वीडियो के आधार पर शिकायतकर्ता को ब्लैकमेल करने का प्रयास किया।
हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी किए बिना दोनों पत्रकारों को राहत प्रदान कर दी।
जमानत की शर्तें
हाईकोर्ट ने अपने 2 जुलाई के आदेश में निर्देश दिया कि यदि विनय अरोड़ा को गिरफ्तार किया जाता है तो उन्हें 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के एक सक्षम जमानतदार पर रिहा किया जाए।
वहीं, 25 जून को पारित आदेश में अदालत ने पत्रकार रजनी को एक लाख रुपये के निजी मुचलके और एक सक्षम जमानतदार पर जमानत देने का निर्देश दिया। साथ ही उन्हें नियमित रूप से ट्रायल कोर्ट में पेश होने की शर्त भी लगाई गई।
मामले में पत्रकारों की ओर से अधिवक्ता अमन मालवीय ने पैरवी की, जबकि राज्य सरकार की ओर से सरकारी अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह अलावा और हेमंत शर्मा ने पक्ष रखा।



