मनीष दुबे-
नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के बीच इन दिनों एक नई शिकायत तेजी से चर्चा में है। आरोप है कि कई कंपनियां, खासकर मीडिया संस्थान, लिंक्डइन जैसे प्रोफेशनल प्लेटफॉर्म पर लगातार नौकरियों के विज्ञापन तो प्रकाशित कर रही हैं, लेकिन वास्तव में उन पदों पर नियुक्तियां नहीं कर रही हैं।
जॉब तलाश रहे कई पेशेवरों का दावा है कि कुछ कंपनियां महीनों तक एक ही पद के लिए बार-बार वैकेंसी पोस्ट करती रहती हैं। इन पदों पर बड़ी संख्या में योग्य उम्मीदवार आवेदन भी करते हैं, लेकिन न तो इंटरव्यू की प्रक्रिया आगे बढ़ती है और न ही नियुक्ति की कोई सूचना मिलती है।
उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि कुछ कंपनियां ऐसी जॉब पोस्टिंग के जरिए बाजार में यह संदेश देने की कोशिश करती हैं कि उनका कारोबार तेजी से बढ़ रहा है, वे विस्तार कर रही हैं और लगातार नई भर्तियां कर रही हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और सभी कंपनियों पर इसे लागू नहीं किया जा सकता।

मीडिया इंडस्ट्री से जुड़े कई पेशेवर सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को उठा रहे हैं। उनका कहना है कि लंबे समय तक सक्रिय रहने वाली वैकेंसी और बार-बार प्रकाशित होने वाले एक जैसे जॉब विज्ञापन उम्मीदवारों में अनावश्यक उम्मीदें पैदा करते हैं। इससे नौकरी की तलाश कर रहे लोगों का समय और ऊर्जा दोनों प्रभावित होते हैं।
एचआर विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार कंपनियां भविष्य की संभावित जरूरतों के लिए प्रतिभाओं का डेटाबेस तैयार करने, रिज्यूमे एकत्र करने या ब्रांड विजिबिलिटी बढ़ाने के उद्देश्य से भी जॉब पोस्ट करती हैं। हालांकि, यदि किसी पद पर वास्तविक भर्ती की मंशा न हो और फिर भी उसे सक्रिय वैकेंसी के रूप में प्रचारित किया जाए, तो इससे उम्मीदवारों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।
ऐसे में करियर विशेषज्ञ नौकरी तलाश रहे युवाओं को सलाह दे रहे हैं कि वे किसी एक जॉब पोस्टिंग पर अत्यधिक निर्भर रहने के बजाय विभिन्न प्लेटफॉर्म पर लगातार आवेदन करें, नेटवर्किंग बढ़ाएं और अपनी अपेक्षाओं को व्यावहारिक रखें। साथ ही, यदि किसी कंपनी की एक ही वैकेंसी लंबे समय तक बार-बार दिखाई दे रही हो, तो आवेदन करने से पहले उसके भर्ती रिकॉर्ड और विश्वसनीयता की भी जांच कर लें।



