
संजय कुमार सिंह
आज लगातार दूसरे दिन भी कर्नाटक सरकार बदलने की खबरें और अटकलें हैं। कल कई अखबारों में सूत्रों के हवाले से यह खबर थी। आज इनकार और स्पष्टीकरण के बावजूद कर्नाटक में सरकार बदलने की अटकलें कई अखबारों में है जबकि दि एशियन एज में तृणमूल के सांसदों, विधायकों के एक बड़े पलायन की भी चर्चा है। दूसरी ओर, राहुल गांधी ने कहा था, एक साल में गिर जाएगी मोदी सरकार तो खबर है, भड़की भाजपा ने जमकर सुनाया। हिन्दुस्तान टाइम्स में सुनेत्र चौधरी की बाईलाइन वाली खबर में लिखा था, पार्टी ने आधिकारिक तौर पर कहा कि यह राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव के सिलसिले में बैठक है। पर जानकार लोगों ने बताया कि सिद्धारमैया को एक फॉर्मूला दिया जा सकता है कि वे मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ दें और राज्यसभा के सदस्य बन जाएं। उनके बेटे को राज्य मंत्रिमंडल में भी एक जगह मिलनी थी। आप जानते हैं कि भारतीय जनता पार्टी ने बिहार में हाल में ऐसा किया है। बिहार में भाजपा के आयातित नेता मुख्यमंत्री हो गए हैं। पहले वाले मुख्यमंत्री को राज्यसभा मिल गई है और बेटे को मंत्रिमंडल में जगह। कर्नाटक में अभी कांग्रेस की सरकार है और पूर्व विधायक खरीदकर भाजपा वहां अपनी सरकार बना चुकी है। ऐसे में कर्नाटक में कांग्रेस वस सब क्यों करेगी जो भाजपा ने अभी-अभी किया है। फिर भी खबर है और हो ही सकती है। लेकिन कांग्रेस भाजपा के पद चिन्हों पर क्यों चलेगी, इसका कारण क्या है – यह सब बताए बगैर कल सूत्रों के हवाले से कई खबरें थीं। दिन भर टेलीविजन पर भी यही सब होता रहा। शाम में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कांग्रेस आलाकमान के साथ बैठक के बाद नई दिल्ली में संयुक्त रूप से मीडिया को संबोधित किया। केसी वेणुगोपाल ने स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य में मुख्यमंत्री बदलने या नेतृत्व परिवर्तन की चल रही सभी खबरें और अटकलें मात्र अफवाह हैं, जिनमें कोई सच्चाई नहीं है। नेताओं ने जोर देकर बताया कि उनकी यह मैराथन बैठक केवल आगामी राज्यसभा और कर्नाटक विधान परिषद चुनावों के लिए उम्मीदवारों के चयन पर केंद्रित थी। इसके बावजूद आज टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड का शीर्षक है, कर्नाटक में बदलाव? कांग्रेस ने सिद्धारमैया को राज्यसभा सीट की पेशकश की। यही नहीं, अखबार ने यह भी बताया है कि मुख्यमंत्री से हफ्ते भर में जवाब देने के लिए कहा गया है। यह खबर भी सूत्रों के हवाले से है।
आज इस खबर की चर्चा करने से पहले बता दूं कि कांग्रेस की अल्पसंख्यक सलाहकार समिति की बैठक में राहुल गांधी ने कहा था कि अगले एक साल के भीतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदाई तय है। यह खबर कम छपी और जैसा होता रहा है, इस पर भाजपा की प्रतिक्रिया ज्यादा छपी। नवभारत टाइम्स का शीर्षक था – राहुल गांधी के बयान पर भड़की बीजेपी, कहा-यह देश में अराजकता फैलाने की बड़ी साजिश। दैनिक भास्कर ने लिखा था, 100 राहुल गांधी भी आ जाएं तो सरकार को हिला नहीं सकते : गौरव भाटिया। अमर उजाला का शीर्षक था, राहुल ने किया एक साल में मोदी सरकार की विदाई का दावा, भड़की भाजपा ने जमकर सुनाया। दि एशियन एज में तृणमूल के सांसदों, विधायकों के बड़े पलायन की ‘चर्चा’ का आधार है, मुख्यमंत्री के साथ बैठक में तृणमूल सांसद और छह विधायकों का शामिल होना। सांसद हैं, बारासात से चार बार की तृणमूल सांसद काकोली घोष दस्तीदार। खबर में भी लिखा है कि बैठक प्रशासनिक था। फिर भी तृणमूल के अंदरूनी सूत्रों के हवाले से बड़े पैमाने पर पलायन की अटकल लगाई गई है जबकि चुनाव में हार की जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने पार्टी के सांगठनिक जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। फिर भी बैठक में उनकी मौजूदगी से अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि सांसद ने कहा है और यह खबर का उपशीर्षक भी है कि प्रशासन सबका है, बैठक पार्टी का आयोजन नहीं था। जो भी हो, पलायन के बाद तो खबर छिपाए नहीं छिपेगी और पहले खबर करने से रुकने वाली नहीं है। फिर अटकलों की क्या जरूरत और अगर है तो भाजपा के मामले में अटकलें क्यों नहीं होती हैं?

कर्नाटक में सरकार बदलने की खबर आज इंडियन एक्सप्रेस में पहले पन्ने पर है। शीर्षक के अनुसार, कांग्रेस कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन के पक्ष में है चाहती है कि सिद्धारमैया पद छोड़ें। हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर का शीर्षक है, दिल्ली में कांग्रेस नेताओं से मिलने के बाद सिद्धरमैया विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। सौभद्र चटर्जी के साथ सुनेत्र चौधरी ने लिखा है, कांग्रेस ने कर्नाटक में लंबे समय से चल रही अड़चन को निपटाने की कोशिश की है। इसके लिए पार्टी नेतृत्व और मुख्यमंत्री तथा उपमुख्यमंत्री के साथ लंबी बैठक हुई। सूत्रों की बजाय मामले के जानकार लोगों के हवाले से लिखा है, सिद्धारमैया अपने विकल्पों को तौल रहे हैं। जो भी हो, इस अटकल की जरूरत समझना मुश्किल है। घोषित तौर पर बताया नहीं जा रहा है और सूत्रों व जानकारों से मिली खबर कभी-कभी तो ठीक है, इनकार के बाद छापने का क्या मतलब है? अगर किसी अन्य के कहने पर इस खबर को इतनी प्रमुखता मिल रही है तो राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार के बारे में जो कहा है वह क्यों नहीं छप रहा है। दिलचस्प यह भी है कि हिन्दुस्तान टाइम्स ने एक साथ तीनों नेताओं की तस्वीर छापी है और कैप्शन की तरह लिखा है, बैठक के बाद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि नेतृत्व में परिवर्तन की चर्चा सिर्फ अटकल है। जाहिर है, इसके बाद शीर्षक का मतलब नहीं रह जाता है लेकिन है। यह अमृतकाल है और नामुमकिन का मुमकिन होना भी हो सकता है।
पहले पन्ने पर दि एशियन एज की खबर का शीर्षक है,क्या सिद्धारमैया रिजाइन करेंगे? कुछ लोगों का दावा है कि डीके शिवकुमार कल पदभार संभाल सकते हैं। यह खबर पार्टी के अंदरूनी लोगों के दावे पर आधारित है और खबर में ही लिखा है कि आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई। द टेलीग्राफ में कर्नाटक की खबर पहले पन्ने पर नहीं है और बंगाल की जो खबरें हैं वे दिल्ली के अखबारों में नहीं हैं जबकि बंगाल में जो हो रहा है उसका अंतरराष्ट्रीय प्रभाव हो सकता है। चुनाव नतीजों के बाद नई सराकर के काम काज के बारे में लोग वैसे भी जानना चाहते हैं। पर संपादकों की प्राथमिकता में दूसरी खबर है। इसमें जिम खाना क्लब के मामले में सरकार का आश्वासन उल्लेखनीय है। खबर के अनुसार, सरकार ने अदालत से कहा है कि अधिग्रहण जबरदस्ती नहीं होगी, यह प्रक्रिया नोटिस देने के बाद कानून के अनुसार शुरू होगी। ऐसा नहीं है कि पुलिस पहुंचेगी और जबरन कब्जा कर लेगी। जो भी हो, यह एक महत्वपूर्ण खबर है, कोलकाता के अखबार में तीन कॉलम में छपा है। दैनिक भास्कर में भी है।
द हिन्दू में कर्नाटक की खबर पहले पन्ने पर नहीं है लेकिन जन सांख्यिकीय बदलाव का अध्ययन करने के लिए बनाई गई कमेटी केंद्र सरकार की खबर है। यह खबर और भी अखबारों में है लेकिन मुद्दे की बात यह है कि सीबीएसई की खबर तो पहले पन्ने पर नहीं ही है, मणिपुर की एक खबर अंदर होने की सूचना है लेकिन पहले पन्ने की खबर सरकारी ही हैं। दैनिक भास्कर में जनसंख्या संतुलन बिगड़ने की जांच के लिए उच्च स्तरीय कमेटी की खबर लीड है तो सीबीएसई की खबर भी बराबर में है। दैनिक भास्कर में कर्नाटक की खबर भी है। शीर्षक है, सिद्धारमैया का इस्तीफा इसी हफ्ते संभव…डीके को कमान। भास्कर इनसाइट के तहत अखबार ने लिखा है, कांग्रेस चाहती है कि अपने इकलौते ओबीसी सीएम की विदाई सम्मान से करे। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस संगठन और सरकार को 2028 के चुनाव के हिसाब से नए सिरे से तैयार करना चाहती है। नेतृत्व जानता है कि अधिकतर विधायक सिद्धारमैया के साथ हैं। वे कांग्रेस के एकमात्र ओबीसी सीएम भी हैं। ऐसे में, पार्टी ये बदलाव बेहद सावधानी से करना चाहती है, ताकि सिद्धारमैया का सम्मान बना रहे और बगावत की स्थिति न बने। यही वजह है कि कांग्रेस मुख्यालय में दिनभर बैठकों का दौर चला। ऊपर बता चुका हूं कि संबंधित नेता कह चुके हैं कि बैठक का मकसद कुछ और था। अगर यही हो तो कांग्रेस छिपाएगी क्यों और अगर घोषणा नहीं हुई है तो ऐसी अटकलों का कोई मतलब नहीं है। और अटकलें ही लगानी है तो इसपर भी लगनी चाहिए कि राहुल गांधी ने किस आधार पर कहा है कि मोदी सरकार एक साल में गिर जाएगी। संभव है, राहुल गांधी पूछने पर बता भी दें लेकिन मीडिया का बड़ा हिस्सा यह सब नहीं करता है। आज दैनिक भास्कर को दसवां अखबार बनाने का कारण यह भी है। देशबन्धु में आज एक विशेष खबर है, धीरे-धीरे उत्तराखंड भी बनता जा रहा है उड़ता पंजाब। भारी विज्ञापन के कारण अमर उजाला में आज तीन पहला पन्ना है। पहली पर सरकारी खबर लीड है। शीर्षक है, “घुसपैठ पर सख्ती : असामान्य जनसांख्यिकीय बदलाव पर उच्च स्तरीय समिति बनाएगी समाधान”। नवोदय टाइम्स की लीड भी अलग है, महत्वपूर्ण खनिजों को लेकर भारत अमरीका के बीच अहम समझौता।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।



