संजय कुमार सिंह
दि एशियन एज ने लखनऊ को खबर को सिंगल कॉलम में छापा है हालांकि खबर 15 छात्रों के निधन की ही है। फोटो जरूर तीन कॉलम की है लेकिन 15 मौतें अमर उजाला में बैनर हैं। इंडियन एक्सप्रेस ने भी मोहन यादव को पांच कॉलम में रखा है तो 15 मौतें तीन कॉलम में हैं। मुझे लगता है कि जब मौतें आम हो गई हैं तो खबर भी आम हो जानी चाहिए और लीड तो तभी बनती है जब कुछ खास हो। दि एशियन एज की लीड के अनुसार, अमेरिका और ईरान 60 दिन के अंदर अंतिम करार की योजना पर सहमत हो गए हैं। एक खबर यह भी है कि टीएमसी के बागियों ने ममता बनर्जी और उनके भतीजे को पार्टी के पदों से अलग कर दिया है और यह भी शिवसेना की तरह होता दिख रहा है। शिवसेना की बात करूं तो यूबीटी गुट के छह सांसद अलग हो गए हैं। यह संख्या दल बदल कानून को धत्ता बताने और सांसद बने रखने के लिए जरूरी या न्यूनतम है। नवोदय टाइम्स की खबर के अनुसार, अमेरिका ने ईरानी तेल पर पाबंदी में छूट दी है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने कहा है, पंजाब में भगवंत मान सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। दैनिक भास्कर में पहले पन्ने पर बिहार में नीट की खबर के अलावा हिमाचल में बनी 43 दवाओं के सैंपल फेल होने की खबर है। अमर उजाला में चार कॉलम का सरकारी प्रचार भी है, एसआईटी करेगी जांच, रक्षा मंत्री भी लखनऊ पहुंचे। आप जानते हैं कि रक्षा मंत्री यानी राजनाथ सिंह लखनऊ से सांसद हैं और ऐसे हादसे के समय उनका वहां होना उनकी नैतिक जिम्मेदारी है। फिर भी अमर उजाला ने इस सूचना को न सिर्फ भरपूर प्रचार दिया है मुख्यमंत्री के बारे में लिखा है कि अलीगढ़ का दौरा बीच में छोड़कर लखनऊ लौट गए। बोल्ड में यह भी लिखा है, सीएम योगी ने मंगलवार के सभी दौरे रद्द कर दिए हैं। यह सब तब है जब मुख्यमंत्री के आधिकारिक और सार्वजनिक ईमेल पर शिकायत भेजी जाए तो जवाब आता है, मुख्यमंत्री कार्यालय, लोक शिकायत अनुभाग-5 के कार्यालय-ज्ञाप में ई-मेल के माध्यम से प्रेषित आवेदकों की शिकायतों का संज्ञान न लिये जाने का प्रावधान है। अत: आपसे निवेदन है कि अपनी शिकायतों के त्वरित निस्तारण हेतु जनसुनवाई पोर्टल का प्रयोग करते हुए अपनी शिकायत दर्ज कराने का कष्ट करें। मुझे यह जवाब तब मिला जब मैंने जन सुनवाई पोर्टल पर शिकायत करने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर सीधे मुख्यमंत्री को मेल भेजने की गुस्ताखी की थी। आज अमर उजाला ने लिखा है, उन्होंने आला अफसरों की बैठक में साफ कहा कि हादसे की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
मुझे याद है, आपको भी याद होगा कि दिल्ली के होटल में आग लगी तो अफसरों ने रसोइया (उसे शेफ कहा गया था) को बलि का बकरा बना दिया था। दूसरी तरफ लड़कर 100 प्रतिशत अंक पाने वाले बच्चे हैं। इनका भाग्य न तो किसी धर्म और उसके संस्कार से तय होगा ना भ्रष्टाचारियों के रोके रुकेगा। ये अपना भाग्य खुद लिखेंगे। जिन्हें मंदिर चाहिए था वे चढ़ावा माफ कीजिएगा दान में उलझे रहें। तथ्य यह है कि कार्रवाई चंपत राय के खिलाफ होनी होती तो बहुत पहले हो गई होती और वे धर्मेन्द्र प्रधान से कम होते तो खजाने पर क्यों बैठाए जाते। आज 100 प्रतिशत अंक पाने की यह खबर भी सभी अखबारों में पहले पन्ने पर नहीं है। हो भी कैसे इंडियन एक्सप्रेस में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और उनके परिवार का कारनामा है, बाकी में लखनऊ की आग है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के इस्तीफे की खबर भी आज ही है। पुराने समय में किसी खतरनाक बिल्डिंग में कोचिंग चल रहा हो, कोई भी शिकायत करता, कोचिंग इंस्टीट्यूट बंद हो जाता। अब अच्छे दिन हैं, विकास हो गया है। इसलिए शिकायत पर असर नहीं होता। बेरोजगारी है इसलिए कोचिंग इंस्टीट्यूट बंद नहीं होते। ऐसा नहीं है कि पहले आग नहीं लगती थी। आग लगती होगी लेकिन खानसामे को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता था। बिल्डिंग गिरती थी लेकिन शपथपूर्वक झूठ नहीं बोला जाता था। इसलिए विकास तो हुआ ही है। इसीलिए भाजपा के हैंडल से आज एक्स पर लिखा गया है, आज भारत जो कर रहा है- वो आने वाले 1000 वर्ष का फ्यूचर लिखने वाला है। यही दुनिया के लिए सबसे बड़ी भारत की गारंटी है। तथ्य यह है कि भारत में सत्तारूढ़ पार्टी ने दिल्ली में मुख्यालय के साथ देश भर में अपने कार्यालय बनवा लिए हैं। केशवकुंज में आरएसएस के टावर भी तैयार हैं। उसमें शानदार ऑडिटोरियम की खबर कल ही सुन रहा था। ऐसी सरकार और उसकी पार्टी ने प्रचार व विज्ञापन पर 2586 करोड़ रुपए फूंक दिए हैं। ये पैसे 2020 से 2026 में सूचना मिलने तक लुटाए गए हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने बयान जारी करके कहा है, भारतीय युवक कांग्रेस और एनएसयूआई ने 25 जून से 9 अगस्त 2026 तक एक अभियान चलाने की घोषणा की है। इसका समापन 9 अगस्त 2026 को ‘दिल्ली चलो’ रैली के साथ होगा। इस अभियान और रैली में तीन मांगें रखी जाएंगी: 1. परीक्षा प्रणाली का पुनर्मूल्यांकन और सुधार। 2. शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा और पेपर लीक माफ़िया के साथ उनके संबंधों की जांच और 3. वार्षिक परीक्षा और भर्ती कैलेंडर को संस्थागत रूप देना।
देश में जब शिक्षा का बुरा हाल कर दिया गया है, परम नालायकी के बावजूद कई साल में शिक्षा मंत्री का बाल भी बांका नहीं हुआ है। प्रचार किया जा रहा है कि प्रधानमंत्री ने बच्चों की कथित सुविधा के लिए हवाई अड्डे पर 45 मिनट गुजारे। कांग्रेस ने उसी दिन बंगलौर में रैली रखी थी इससे कई बच्चे देर से पहुंचे और परीक्षा नहीं दे पाए। यह सब तब जब रैली पूर्व घोषित थी, ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की गई थी और बैंगलोर के अलावा भी कई जगह बच्चे देर से पहुंचे। वहां रैली नहीं थी। यह सब इस तथ्य के बावजूद कि इतवार की परीक्षा मूल परीक्षा नहीं थी पहली परीक्षा के प्रश्न पत्र लीक हो गए थे इसलिए दोबारा कराए गए और भिन्न कारणों से 1700 बच्चे इसमें शामिल नहीं हो पाए लेकिन सरकार समर्थकों को चिन्ता बंगलोर के तीन बच्चों की ही है। खबर है कि बिहार में दूसरों के नाम पर परीक्षा देने वाले पूर्व के टॉपर भी पकड़े गए हैं और गिरफ्तार किए गए लोगों में बायोमेट्रिक कंपनी की सेटिंग से बैठे फर्जी परीक्षार्थी के साथ तीन सुपरवाइजर और 14 स्टाफ भी हैं। दैनिक भास्कर ने खबर दी है पर दिल्ली में लीड नहीं है। पटना की खबर के अनुसार, ब्लैकलिस्टेड कंपनी को बायोमेट्रिक का ठेका दिया गया था। एक तरफ तो यह सब हुआ या होने दिया गया और प्रचार के लिए प्रश्नपत्र पहुंचाने के काम में वायु सेना लगा दी गई। फिर भी परीक्षार्थी की जगह दूसरे लोग बैठ पाए। प्रचार प्रधानमंत्री का है कि बच्चों के लिए 45 मिनट एयरपोर्ट पर इंतजार किया। तथ्य है कि इससे उन्हीं बच्चों को लाभ हो सकता था जिनकी परीक्षा हवाई अड्डे से रेसकोर्स रोड पर प्रधानमंत्री के घर के बीच में होगी। यह सब तब जब देश में व्यवस्था और हालात ऐसे हैं कि एक बच्चा दुर्घटना का शिकार हो गया। सिर पर पट्टी के साथ थोड़ी देर से पहुंचा लेकिन उसे भी रोक दिया गया। दिखाया उन्हें जा रहा है जो बैंगलोर के सेंटर के बाहर रो रही हैं। इन सबके साथ प्रधानमंत्री का प्रचार और कांग्रेस की आलोचना करने की बेशर्मी चल रही है। ऐसे लोग हैं जो दोनों काम एक साथ और अलग-अलग कर रहे हैं।
बच्चे देश के भविष्य है। जब अर्थव्यवस्था पांच ट्रिलियन की नहीं हुई, किसानों की आय दूनी नहीं हुई, रोजगार नहीं हैं और कौशल विकास योजना में भारी घोटाला हो गया, बहुप्रचारित शौंचालय चौपट हो चुके हैं, बदबू आने लगी है तब प्रधानमंत्री 2047 का इंतजार करवा रहे हैं। उस समय यही बच्चे महत्वपूर्ण पदों पर और जिम्मेदारी में होंगे जो अभी परीक्षा नहीं दे पा रहे हैं, कोचिंग सेंटर की आग और बाढ़ में मर रहे हैं या किसी तरह कदाचार से शिक्षा प्राप्त करके आगे बढ़ रहे हैं। यह सब कोई अचानक नहीं हो गया है, ना ही पहली बार हो रहा है। दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर स्थित राउज आईएएस कोचिंग सेंटर में 27 जुलाई 2024 को एक दर्दनाक हादसे में 3 छात्रों की डूबने से मौत हो गई थी। भारी बारिश के कारण सड़क का नाला टूटने से बेसमेंट में बनी लाइब्रेरी में अचानक तेजी से पानी भर गया था। तब लगा था सरकार कोचिंग को सुरक्षित बनाने के लिए कुछ करेगी। इससे पहले जून 2023 में दिल्ली के मुखर्जी नगर में एक कोचिंग सेंटर की इमारत में आग लगी थी। कई छात्र खिड़कियों और तारों के सहारे नीचे उतरे थे। घटना ने काफी ध्यान खींचा था, तब 61 छात्र बीमार या घायल हुए थे। आज जब ज्यादातर अखबारों में लखनऊ में आग से 15 छात्रों की मौत की खबर लीड है तो हिन्दुस्तान टाइम्स की सेकेंड लीड, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर के इस्तीफे की है। इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी विशेष खोजी खबर में बताया है कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के दिसंबर 2023 में शपथ लेने के बाद उनके परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों ने कम-से-कम 137 भूखंड (करीब 168 एकड़) खरीदे हैं।
इनका कुल मूल्य लगभग 45 करोड़ रुपये है। आरोप है कि इनमें से अधिकांश जमीन उन इलाकों में हैं जिन्हें राज्य सरकार की नई सड़कों, कॉरिडोर और भूमि-उपयोग परिवर्तन से लाभ मिला या मिलने वाला है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के अनुसार, सीबीएसई की परीक्षा में 95 प्रतिशत अंक पाने वाली झारखंड की अनवी केजरीवाल ने पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया था और कल उसके नतीजे के बाद पता चला कि उसे शत प्रतिशत अंक आए हैं। अनवी कॉमर्स की टॉपर है जबकि बोकारो के आदित्य मिश्रा को विज्ञान में संयुक्त टॉपर घोषित किया गया है। यह खबर भी आज ही है। मुद्दा यह कि पूरी अव्यवस्था और अराजकता के बावजूद 100 प्रतिशत अंक पाने वाले बच्चे हैं। दूसरी ओर सत्ता में ऐसे लोग बैठे हैं जिनकी डिग्री गोपनीय है। व्यवस्था कोई कार्रवाई नहीं कर रही है और न्यायपालिका ने कह दिया है कि मामला गोपनीय ही रहेगा। मीडिया के लिए यह मुद्दा ही नहीं रहा। ऐसे में आज भले लखनऊ में आग लगने की खबर निर्विवाद लीड हो 100 प्रतिशत अंक की खबर पहले पन्ने की तो होनी ही चाहिए थी। पर आज बंगाल के बजट की खबर भी है। यह भाजपा का बंगाल का पहला बजट है और पत्रकार रहे वित्त मंत्री ने पेश किया है जो अपनी विशेष योग्यता के लिए राज्यसभा के नामित सदस्य रहे। भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए इस्तीफा दे दिया और हार गए तो फिर बाकी समय के लिए मनोनीत कर दिए गए। इसलिए यह बजट भी पहले पन्ने की खबर है। द हिन्दू में यह वित्त मंत्री की फोटो के साथ चार कॉलम की खबर है। जब वित्त मंत्री बनाए गए थे तब टाइम्स ऑफ इंडिया ने बताया था कि उसके पुराने कॉलम लेखक हैं। कोलकाता के द टेलीग्राफ की लीड भी बजट की खबर है। इसके अनुसार बजट में उद्योग को बंधनों से मुक्त किया गया है और संरचनाओं की तेजी के लिए काम किए गए हैं। संयोग से आज ही मध्य प्रदेश की खबर है और यह भी कि मुख्यमंत्री के परिवार और कुछ सरकारी अधिकारियों ने इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि परिवार का रियल एस्टेट कारोबार मुख्यमंत्री के राजनीतिक उदय से पहले से चल रहा था और वैध व्यावसायिक गतिविधियों को मुख्यमंत्री पद से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। मुझे लगता है कि इसमें प्रधानमंत्री का आश्वासन, ना खाउंगा ना खाने दूंगा – याद रखा जाना चाहिए।

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।



