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दिल्ली दवा घोटाला: 400 करोड़ की खरीद में 300 करोड़ की काली कमाई, गोदी मीडिया कोमा में!

Hindi newspaper front page reporting a 400 crore purchase and 300 crore gains, with subheadings and highlighted yellow boxes; multiple articles in column layout.

नई दिल्ली। केंद्रीय खरीद एजेंसी (सीपीए) के जरिए हुए करीब 650 करोड़ रुपये के दवा और चिकित्सा उपकरण खरीद घोटाले की जांच में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग के कुछ अधिकारियों ने कथित तौर पर दवाओं और मेडिकल उपकरणों की खरीद वास्तविक कीमत से कई गुना अधिक दरों पर कराई और बाद में अतिरिक्त भुगतान का बड़ा हिस्सा कमीशन (किकबैक) के रूप में वापस लिया गया।

जांच में सामने आए इन तथ्यों को भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) की एफआईआर में भी शामिल किया गया है। एजेंसियों का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क के जरिए सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया।

तीन और लोगों की गिरफ्तारी की तैयारी

सूत्रों के मुताबिक, अब जांच का फोकस इस बात पर है कि कथित किकबैक की रकम किन-किन लोगों तक पहुंची और इसके लाभार्थी कौन थे। एसीबी और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भुगतान रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन और सप्लायर नेटवर्क की जांच कर रहे हैं। जांच के आधार पर जल्द ही तीन और लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है।

इस मामले में अब तक पूर्व महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं (DGHS) डॉ. वत्सला अग्रवाल, सीपीए के पूर्व प्रमुख डॉ. विनोद रंगा समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

‘सरकारी खरीद को बनाया कमाई का जरिया’

एफआईआर के अनुसार, सरकारी अस्पतालों की जरूरत पूरी करने के बजाय दवा खरीद प्रक्रिया को कथित तौर पर कमाई का माध्यम बना दिया गया। जांच में आरोप है कि जिन दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की खरीद प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया के जरिए कम कीमत पर हो सकती थी, उन्हें मिलीभगत कर कई गुना अधिक कीमत पर खरीदा गया।

400 करोड़ की खरीद, 300 करोड़ का किकबैक!

जांच एजेंसियों का दावा है कि 400 करोड़ रुपये से अधिक की दवा खरीद में करीब 300 करोड़ रुपये कथित तौर पर किकबैक के रूप में वापस लिए गए। आरोप है कि यह रकम राजीव रंगीला के माध्यम से तत्कालीन डीजीएचएस और सीपीए के कुछ अधिकारियों तक पहुंचाई गई। अब एजेंसियां इस रकम के अंतिम लाभार्थियों की पहचान करने में जुटी हैं।

विभागीय कार्रवाई भी शुरू

घोटाले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने भी कार्रवाई शुरू कर दी है। डीजीएचएस डॉ. सुषमा जैन ने डाटा असिस्टेंट सुमित सिंह की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं। वहीं सीनियर असिस्टेंट अरुण कुमार, कुंदन कुमार सिंह और फार्मासिस्ट हुकमा राम लोहिया को निलंबित कर दिया गया है।

विभाग के अनुसार, जांच के दौरान इन कर्मचारियों के केंद्रीय खरीद एजेंसी से जुड़े मामलों और कुछ निजी दवा आपूर्तिकर्ताओं से कथित संबंध सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई। सभी संबंधित कर्मचारियों को सरकारी फाइलें, दस्तावेज, लैपटॉप, पहचान पत्र और अन्य विभागीय सामग्री तत्काल जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं।

खरीद प्रक्रिया की गहन जांच जारी

जांच एजेंसियां अब खरीद प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों, फाइल मूवमेंट, भुगतान रिकॉर्ड और सप्लायरों की भूमिका की विस्तृत जांच कर रही हैं। साथ ही निलंबित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।


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-संजय सिंह, राज्यसभा सांसद

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