जिस बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना आज भारत में शरण लिए हुए हैं, उसी बांग्लादेश ने अब भारत के लिए अहम माने जाने वाले मोंगला पोर्ट के पास विकसित होने वाले विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) का प्रोजेक्ट चीन को सौंप दिया है। जिस जमीन पर कभी भारत के साथ समझौता हुआ था, वहां अब चीन अपनी मौजूदगी मजबूत करेगा। इसे भारत के लिए एक बड़े रणनीतिक झटके के तौर पर देखा जा रहा है।
सवाल यह है कि बंगाल की खाड़ी में चीन की बढ़ती पकड़, भारत की सुरक्षा और विदेश नीति पर पड़ने वाले संभावित असर जैसे गंभीर मुद्दों पर आखिर देश की मुख्यधारा की मीडिया में उतनी चर्चा क्यों नहीं हो रही?
कहां है शेख हसीना?
जानकारी के मुताबिक बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना वर्तमान में भारत में निर्वासित जीवन बिता रही हैं। 5 अगस्त 2024 को हुए तख्तापलट के बाद से ही वह भारत में शरण लिए हुए हैं और दिल्ली के एक उच्च सिक्योरिटी वाले सुरक्षित स्थान पर रह रही हैं।
रणविजय सिंह-

बांग्लादेश ने अपने मोंगला पोर्ट को लेकर चीन से समझौता कर लिया है. अब चीन मोंगला पोर्ट के पास 110 एकड़ में स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) विकसित करेगा.
पहले ये जमीन भारत को दी गई थी. 2015 में इसका समझौता हुआ था, लेकिन अब इसे चीन को दे दिया गया.
भारत को क्या नुकसान –
मोंगला पोर्ट कोलकाता के करीब है और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों (असम, त्रिपुरा आदि) के लिए वैकल्पिक समुद्री मार्ग प्रदान करता था.
इस समझौते से भारतीय कंपनियां/कार्गो के लिए आसान कनेक्टिविटी और ट्रांसशिपमेंट का फायदा कम हो सकता है.
इससे चिकन नेक (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) क्षेत्र में चीन की निगरानी बढ़ने का खतरा भी है.
बंगाल की खाड़ी में चीन का फुटप्रिंट बढ़ रहा है – चटगांव, ग्वादर, हम्बनटोटा पर पहले ही चीन का दखल है.
मोंगला पर अधिक नियंत्रण से चीन को व्यावसायिक और सैन्य लॉजिस्टिक्स लाभ मिल सकता है, जो भारत की समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित करता है.
मतलब यह भारत के लिए रणनीतिक झटका है, खासकर बंगाल की खाड़ी में चीन की बढ़ती मौजूदगी के संदर्भ में.
कुल मिलाकर – मोदी सरकार ने पहले अमेरिका के दबाव में ईरान का चाबहार पोर्ट छोड़ दिया और अब बांग्लादेश ने अपना पोर्ट छीनकर चीन को दे दिया.
ये विदेश नीति की विफलता है, लेकिन कोई एंकर आपको ये बताएगा नहीं.



