संजय कुमार सिंह
आज देशबन्धु में पहले पन्ने पर खबर है, शहीदों का अपमान करने के लिए इस्तीफा दें राजनाथ। खबर के अनुसार, कांग्रेस के ‘पूर्व सैनिक विभाग’ के प्रमुख, कर्नल (सेवानिवृत्त) रोहित चौधरी ने यह भी कहा कि रक्षा मंत्री के खिलाफ संसद में विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाना चाहिए और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा बीजेपी को जनता से माफी मांगनी चाहिए। कांग्रेस ने कहा है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के विषय में संसद में ‘झूठ बोलकर” शहीदों का अपमान किया है और ऐसे में उन्हें पद से इस्तीफा देना चाहिए। आप जानते हैं कि केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी के इस्तीफे की मांग हुई थी, धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने की मांग चल रही है और अब राजनाथ सिंह के इस्तीफे की मांग जुड़ गई है। पेट्रोल में इथेनॉल मिलाना, इसका लाभ जनता को नहीं देना, गाड़ियों को इसे नुकसान होना और मंत्री के बेटे की कमाई बढ़ने के कारण नितिन गडकरी के इस्तीफे की मांग चलती रहती है। कुल मिलाकर, कई केंद्रीय मंत्रियों के इस्तीफे की मांग चल रही है। इनमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के इस्तीफे की मांग का कारण सबसे अलग है। ऐसा होना नहीं चाहिए था और निश्चित रूप से यह शहीदों के अपमान का मामला भी है। 13 महीने बाद जब इस मामले का खुलासा किया गया तब भी इस खबर को महत्व नहीं दिया गया था। अब जब कांग्रेस ने देर से खुलासा करने और इस कारण शहीदों का अपमान करने का मुद्दा बनाया है और रक्षा मंत्री के इस्तीफे का मांग की है तब भी यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है। सरकार ने देश को अब बताया है कि कर्तव्य का निर्वहन करते हुए शहीद हुए छह सैन्यकर्मियों के नाम राष्ट्रीय समर स्मारक की एक दीवार पर अंकित किए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान (ऑपरेशन सिन्दूर) के बाद पहली बार सरकार ने छह शहीद सैन्यकर्मियों के नाम आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक किए हैं। कर्नल (रिटायर) रोहित चौधरी ने पिछले साल जुलाई में संसद में दिए गए राजनाथ सिंह के एक वक्तव्य का हवाला देते हुए संवाददाताओं से कहा ‘मोदी सरकार की बुनियाद झूठ पर टिकी है, उन्हें सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है।
आज इस खबर का पहले पन्ने पर नहीं होना मीडिया का पक्षपात बताता है। हिन्दी के मेरे चार में से तीन अखबारों – अमर उजाला, दैनिक भास्कर, नवोदय टाइम्स की लीड एक ही खबर है, नई ईवी (इलेक्ट्रिक व्हेकिल या वाहन) नीति घोषित। हिन्दी के मेरे चार में से तीन अखबारों की लीड यही है। देशबन्धु अपवाद है। इसकी लीड का शीर्षक है, चढ़ावा चोरी के आरोपियों का केस नहीं लडेंगे। चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए अदालत जाएंगे वकील। अंग्रेजी अखबारों में अकेले इंडियन एक्सप्रेस की लीड दिल्ली सरकार की इलेक्ट्रीक व्हेकिल नीति है। इसके तहत 2028 से दिल्ली के सभी दुपहिए भी इलेक्ट्रीक होंगे ताकि प्रदूषण से मुकाबला किया जा सके। अंग्रेजी अखबारों में दूसरी लीड टाइम्स ऑफ इंडिया और दि एशियन एज में है। दि एशियन एज के अनुसार दिल्ली और चार राज्यों में आज से एसआईआर प्रक्रिया शुरू होगी जबकि टाइम्स ऑफ इंडिया का शीर्षक है, दिल्ली में आज से वोटर वेरिफिकेशन अभियान शुरू होगा। इस चरण में कोई दस्तावेज़ जमा नहीं करना होगा। नवोदय टाइम्स की खबर का शीर्षक है – दिल्ली में आज से एसआईआर। मेरे लिए यह समझना मुश्किल है कि जो होगा उसे एसआईआर कहा जाएगा या नहीं और कहा जाएगा तो टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर क्या है। अगर एसआईआर नहीं है तो बाकी दोनों अखबारों ने क्या लिखा है। आप जानते हैं कि हाल में सरकार ने कहा है कि पासपोर्ट यात्रा दस्तावेज है, नागरिकता का दस्तावेज नहीं है।
आधार जरूरी है पर वह वोट देने के लिए नहीं है और बिहार में रिकार्ड समय में एसआईआर हो चुका, बंगाल में लाखों लोग वोट नहीं दे पाए तो दिल्ली में एसआईआर या वोटर वेरीफिकेशन की अभी से क्या जरूरत है। खासकर तब जब जनगणना चल रही है। दोनों काम कौन लोग करेंगे और ये अलग होंगे या एक ही आदमी दोनों काम करेंगे और जो भी स्थिति हो इनके मूल काम का क्या होगा? वैसे को स्पष्टीकरण देना सरकार का काम है लेकिन मांगना अखबारों और मीडिया वालों का काम है। पर अब अच्छे दिन चल रहे हैं। हिन्दु्तान टाइम्स की लीड अमेरिका ईरान युद्ध है। खबर के अनुसार, हमले रुके हैं पर अमेरिका, ईरान वार्ता पर अगले कदम को लेकर असहमत हैं। द हिन्दू की लीड भी सबसे अलग है। इसके अनुसार, औद्योगिक आउटपुट का विकास पांच महीने में सबसे ज्यादा 5.1 प्रतिशत रहा। खबर के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग, बिजली, कैपिटल और कंज्यूमर गुड्स सेक्टर के अच्छे प्रदर्शन से विकास में वृद्धि हुई है। सरकार द्वारा आईआईपी सीरीज़ में और बदलाव किए जाने के बीच माइनिंग और क्वारींग सेक्टर में लगातार पांचवें महीने गिरावट आई है। द टेलीग्राफ की लीड राज्य सरकार के नए गुंडा कानून पर है।

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।



