Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

वेब-सिनेमा

चित्रा जी, पत्रकार का काम सत्ता से सवाल करना है न कि सत्ता के लिए सवालों को ब्लॉक करना!

त्रिभुवन-

चित्रा जी,

आपने बहुत मासूमियत से लिखा कि “इस महिला को मैंने ट्विटर पर ब्लॉक कर रखा है।” यह बात पढ़कर लगा कि लोकतंत्र में अब ब्लॉक बटन भी एक तरह का वैचारिक बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स हो गया है, जिसे ठीक न लगे, उसे सीमा पार भेज दो!

लेकिन असली मज़ा तो आगे है।

आपने कहा कि वह आपको फॉलो करके आपकी खबरों के स्क्रीनशॉट लेती हैं, अपने अकाउंट पर चिपकाती हैं और आपको टारगेट करती हैं। रागिनी नायक कांग्रेस की प्रवक्ता हैं। उनका काम ही कांग्रेस के पक्ष में बल्लेबाज़ी करना है। वे कांग्रेस की जर्सी पहनकर मैदान में उतरती हैं, हाथ में बल्ला भी दिखता है और हेलमेट पर पार्टी का निशान भी। दर्शक जानते हैं कि यह बल्लेबाज़ निष्पक्ष अंपायर नहीं, टीम की खिलाड़ी है।

मुश्किल वहाँ शुरू होती है, चित्रा जी, जहाँ पत्रकारिता के कमेंट्री बॉक्स से वही शॉट लगने लगते हैं जो पार्टी के डगआउट से लगते हैं।

रागिनी कांग्रेस के लिए जो कर रही हैं, वह घोषित राजनीति है। आप भाजपा के लिए वैसा ही कुछ करती दिखें तो वह “पत्रकारिता” के नाम पर एक सुंदर-सा असंतुलन पैदा कर देता है। एक तरफ पार्टी प्रवक्ता है, दूसरी तरफ पत्रकार। दोनों की भाषा, दोनों का तेवर, दोनों का राजनीतिक निष्कर्ष लगभग एक जैसा हो जाए तो जनता बेचैन होकर पूछती है, मैच में कमेंटेटर कौन है और चीयरलीडर कौन?

रागिनी अगर मोदी सरकार, भाजपा या RSS पर हमला करती हैं तो दर्शक समझते हैं कि यह विपक्ष की पिच से निकली गेंद है। लेकिन जब कोई पत्रकार सत्ता के पक्ष में वही फुलटॉस खेलने लगे, जो प्रवक्ता खेलते हैं तो सवाल उठता है। पत्रकार का काम सत्ता से सवाल पूछना है, सत्ता के लिए सवालों को ब्लॉक करना नहीं।

और रही स्क्रीनशॉट वाली बात तो आजकल स्क्रीनशॉट भी लोकतंत्र का नया पंचनामा हैं। कभी वे सच खोलते हैं, कभी अधूरा सच बेचते हैं और कभी सिर्फ़ वैचारिक खीझ का फ्रेम बन जाते हैं। इसलिए हर स्क्रीनशॉट को अंतिम सत्य मानना भी ठीक नहीं, लेकिन हर आलोचना को “obsession” मान लेना भी पत्रकारिता की सेहत के लिए अच्छा नहीं।

चित्रा जी, सच में कहें तो रागिनी नायक विपक्ष की तरफ से ढोल बजा रही हैं। आप अगर सत्ता की तरफ से झांझ बजाएँगी तो फिर शोर तो होगा ही। फर्क बस इतना है—उनके गले में पार्टी का पट्टा है, आपके गले में पत्रकारिता का प्रेस कार्ड। जनता दोनों को देखकर यही कहती है—“वाह! एक ही धुन है, बस वाद्य अलग-अलग हैं!”


इस महिला को मैंने ट्विटर पर ब्लॉक कर रखा है। ये गाली गलौज करती थी तो मुझे लगा ऐसे लोगों से दूरी बना लेना बेहतर है.
मुझे किसी ने बताया है कि इसके बाद इसने फेक अकाउंट बनाया है. वहां से मुझे फॉलो करके मेरी खबरों का स्नैप शॉट लेती है और अपने अंकाउंट पर चिपका कर मुझे टारगेट करती है.
मेरे लिया इतना obsession ठीक नहीं है.
-चित्रा त्रिपाठी

Screenshot of a Hindi social media post detailing allegations about RSS-BJP and Modi govt on temple construction and court rulings.
संदेश का स्क्रीनशॉट: हिंदी में दावा है कि राम मंदिर से जुड़ी राजनीति चल रही है और तीन बार सरकार बदली गई; RSS/VHP/BJP पर बातें हैं。
Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन