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आज के अखबार : चढ़ावा चोरी का मामला ‘चौकीदार चोर है’ वाला ही लेकिन मीडिया बहला रहा है

Police officers conduct a search operation in a narrow street, with bystanders and parked motorcycles nearby.

संजय कुमार सिंह

आज मेरे सभी अखबारों में पहले पन्ने पर चढ़ावा चोरी के मामले में पुलिसिया कार्रवाई की खबर प्रमुखता से है। हम सब जानते हैं कि पुलिस मामले को सुलझा लेने का दावा करती है, गिरफ्तारियां होती हैं, सबूत होने के दावे किए जाते हैं फिर भी अपराधी या आरोपी छूट जाता है। इस मामले में ऐसा नहीं होने का कोई कारण नहीं है लेकिन देश की सरकार और राजनीति इसी पर केंद्रित है तो अखबारों की खबरों का अपना महत्व है। आज की खबर है, सभी आरोपियों के घर छापे, नकदी व जेवर बरामद। आप जानते हैं कि डिजिटल अरेस्ट के मामले में कार्रवाई बहुत देर से शुरू हुई और तब हुई जब सुप्रीम कोर्ट को सीबीआई ने आदेश दिया। इससे पहले सरकार ने नहीं दिया था या दिया हो तो खबर नहीं थी, कार्रवाई तो नहीं के बराबर हुई थी। चंदा चोरी का मामला डिजिटल अरेस्ट के मुकाबले हर तरह से बहुत छोटा है लेकिन बहुत सारे लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है। यह प्रचार भी किया जाता रहा है कि जिन्होंने चढ़ावा नहीं दिया या दान नहीं दिए वे भी इस चोरी को लेकर परेशान हैं। इसका कारण है और वह है, चढ़ावा भगवान राम का था और भगवान राम तो सबके हैं। इसलिए इस मामले में कार्रवाई अपेक्षाकृत जल्दी शुरू हुई लेकिन जो कार्रवाई हो रही है वह सिर्फ दिखावे के लिए है और उनके खिलाफ नहीं हो रही है जिनके खिलाफ होनी चाहिए। पहले रेल दुर्घटना बाद मंत्री का इस्तीफा हो जाता था ताकि जांच में मंत्री की लापरवाही या चूक हो तो उसका भी पता चले। मंत्री के पद पर बने रहे तो खुद अपने बचने की व्यवस्था कर लेंगे या जांच करने वाले भी समझेंगे कि उन्हें बचाना है। इसे संकेत या इशारा भी माना जा सकता है। भाजपा की सरकार में इस्तीफे नहीं होते हैं और रेल दुर्घटना में तो ‘साजिश’ की जांच कराई गई है। मतलब साजिश तो मंत्री और सरकार के खिलाफ भी हो सकती है। हालांकि, ऐसी सरकार के बने रहने का कोई औचित्य नहीं है जिसके खिलाफ साजिश की जा सके या उसका पता नहीं चले। वैसे यह अलग मामला है।

अभी तक की खबरों से यह स्पष्ट है कि चढ़ावा चोरी के मामले में जो होना चाहिए था वह नहीं हो रहा है और जो हो रहा है वह लीपा-पोती से ज्यादा नहीं है। या बाद में तो लीपा जा ही सकता है।  खबर फैलाई गई कि इस्तीफा हो गया है लेकिन जैसा मैंने कल बताया था उस पर कार्रवाई 14 दिन बाद होनी है। इसलिए जो हो रहा है वह असली अपराधियों या चौकीदारों को बचाने के लिए भी हो सकता है। राम मंदिर का चंदा जिन लोगों के भरोसे था या इन भरोसेमंद और जिम्मेदार लोगों ने इसकी रक्षा या प्रबंध के लिए जिसकी सेवा ली उन्होंने गड़बड़ी की या लापरवाह रहे। मंदिर की नकदी ऐसे व्यक्ति से बरामद हुई है। यह “अमानत में खयानत” का मामला है। देश की जनता अगर इस भरोसे थी कि सब ठीक चल रहा है तो उनके साथ विश्वासघात हुआ है और यह स्पष्ट है कि चौकीदार चोरी में शामिल हो या नहीं, वह चोरी रोक नहीं पाया। अमूमन ऐसे चौकीदार खुद ही शर्म से इस्तीफा दे देते हैं लेकिन खेल बड़ा हो, चोरी के माल से उसने सुरक्षा खरीद ली हो या वह किसी और के लिए काम कर रहा हो तो वह ढीठ बना रहता है। अखबारों की खबरों से ऐसा ही लग रहा है। कहने का मतलब यह है कि जब किसी व्यक्ति को कोई संपत्ति, धन या वस्तु विश्वास करके सौंपी जाती है और वह व्यक्ति उस विश्वास को तोड़कर उसका दुरुपयोग करे तो इसे आम बोलचाल में ‘विश्वासघात’ या ‘नियत में खोट’ भी कहा जाता है। ऐसे व्यक्तियों के रहते चोरी चलती रहेगी पता नहीं चलेगा कि कौन कर रहा है। नीयत हो तो कार्रवाई होती है नहीं तो चलती रहती है। उदाहरण केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का है। तिजोरियों को 2011 में खोला गया तो भारी मात्रा में सोना, आभूषण और बहुमूल्य धरोहर मिलने का खुलासा हुआ। इसके बाद मंदिर के प्रबंधन, संपत्तियों के संरक्षण और लेखा-व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मामला चला। 2014 में पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) विनोद राय को मंदिर की संपत्तियों और खातों का विशेष ऑडिट कराने की जिम्मेदारी सौंपी। 2014–2016 के ऑडिट के दौरान जब रिकॉर्ड, स्टॉक और खातों का मिलान किया गया, तब मीडिया में खबरें आईं कि कुछ सोने और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं के रिकॉर्ड में अंतर (डिसक्रिपेंसी) मिला है। कुछ रपटों में लगभग 266 किलो सोने का हिसाब न मिलने जैसी बातें भी प्रकाशित हुईं। लेकिन यह मामला अभी भी नहीं निपटा है और पता नहीं मामला किस स्थिति में है।

इसलिए, अयोध्या तो छोड़िए, तमाम मामलों में इस सरकार ने कुछ नहीं किया है और ऐसे मामले बढ़ते जा रहे हैं। शुरुआत रफाल सौदे से हुई थी। ऑपरेशन सिन्दूर में मार गिराए जाने की चर्चा थी लेकिन दावा किया गया था कि कांच भी नहीं टूटा। पता तो सबको था कि जम्मू में भारी नुकसान हुआ है पर किसी का शहीद होना भी छिपा लिया जाएगा इसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। खासकर संसद में राजनाथ सिंह के गरजने जैसे नाटक के बाद। अब जब स्पष्ट हो गया है कि वे झूठ बोल रहे थे, संसद को गुमराह किया तो क्या पता राफेल की भी खबर आ जाए। इससे पहले 2019 में राफेल मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राहुल गांधी ने मीडिया से बातचीत में कहा था, “अब तो अदालत ने भी मान लिया है कि चौकीदार चोर है”। यह टिप्पणी अदालत के फैसले से अलग थी। इस कारण भाजपा नेता मीनाक्षी लेखी ने राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की, राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट में बिना शर्त माफी मांगनी पड़ी थी। इस माफी के कारण भाजपा उन्हें सावरकर जैसा माफीवीर दिखाना चाहती पर वह अलग मामला है। तब भाजपा नेताओं ने ‘मैं भी चौकीदार’ का अभियान चलाया था। एक केंद्रीय मंत्री जो सेना प्रमुख रह चुके थे, जनरल के पद से रिटायर हुए थे, चौकीदार बन गए थे और अब गवर्नर हैं। बाद में मीनाक्षी लेखी भी मंत्री बनीं। यह अलग बात है कि  “स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत” लिखने की जगह “सवच्छ भारत सवस्थ भारत” लिखकर ट्रोल और मशहूर हो चुकी हैं। मुझे लगता है कि ऐसी सरकार (या उसके मुखिया) जनहित के काम न करें, सरकारी धन के दुरुपयोग के मामले में बेहद संवेदनशील न हों तो उनके 56 ईंची या बिना परिवार का या ईमानदार होने का कोई लाभ नहीं है। पर वह भी अलग मुद्दा है। 

अभी मुद्दा यह है कि मीडिया सरकार की छवि बनाए रखने में लगी है। जनहित से नहीं के बराबर मतलब रखता है। अयोध्या मामले में भी यही चल रहा है और केरल के मंदिर का मामला भी ठंडे बस्ते में है। आइए, अब बताऊं कि यह खबर किन अखबारों में लीड है और क्या शीर्षक है। अमर उजाला, टाइम्स ऑफ इंडिया और द टेलीग्राफ में यह खबर लीड है। अमर उजाला का शीर्षक है, चढ़ावा चोरी : सभी आठ आरोपियों के घर छापे, टिन्नू के घर से नकदी व जेवर बरामद। उपशीर्षक है, पुलिस ने सात घंटे तक की छानबीन, निवेश के साथ बैंकिंग दस्तावेज भी जब्त। पुलिस ने मंदिर फ्रॉड के आठ आरोपियों के घर छापा मारा। बैंक खातों, लॉकर्स, जमीन के सौदों और आयकर रिटर्न का पता लगाया। स्पष्ट है कि अपराध तो हुआ है। मंदिर के काम के लिए इन्हें विज्ञापन निकालकर, परीक्षा लेकर तो नहीं ही रखा गया था। और रखा भी गया हो तो ऐसे काम करने वालों पर नजर रखने का काम भी किया जाता है या करने की जरूरत होती है और वह सब नहीं हुआ है। लेकिन अखबारों की इन और दूसरी खबरों से यह दिखाया जा रहा है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई चल रही है। एक भक्त मित्र को समझ नहीं आ रहा है कि छोटी मछली और बड़ी मछली क्या होती है। आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई तो हो ही रही है। द टेलीग्राफ की खबर बाकी खबरों से अलग है और लीड है तो इसलिए नहीं कि उसे अन्य अखबारों की तरह (खबरों से भी) केंद्र सरकार की सेवा करनी होती है। लेकिन पहले उन खबरों की बात कर लूं जो यह बता रहे हैं कि छापा मारा गया मतलब कार्रवाई चल रही है।

नवोदय टाइम्स में यह खबर चार कॉलम में है। शीर्षक है – चढ़ावा चोरी का मामला  : आरोपियों के घर एक साथ छापे। दैनिक भास्कर में यह खबर तीन कॉलम में हैं। मुख्य शीर्षक है, राम मंदिर चढ़ावा चोरी…. सभी आठ आरोपियों के घरों पर एक साथ छापे। देशबन्धु में इस खबर का शीर्षक है, टिन्नू के घर से आभूषण व दस्तावेज बरामद। अखबार ने इस खबर के साथ मामले की क्रोनोलॉजी भी प्रकाशित कर दी है। खबर के अनुसार, चढ़ावा चोरी का मामला 6 जून को सामने आया था। इसके बाद ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने संदिग्धों को पकड़कर इसकी जांच शुरू की थी। 13 जून को जांच के लिए एसआईटी गठित की गई, एसआईटी ने 23 जून को सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। अंग्रेजी अखबारों में हिन्दुस्तान टाइम्स में यह खबर तीन कॉलम में है। शीर्षक है, पुलिस ने राम मंदिर मामले में आठ आरोपियों के घरों की तलाशी ली। द हिन्दू में आधा पन्ना विज्ञापन है। इसलिए यह खबर अंदर होने की सूचना है। शीर्षक वही है जो दूसरे अखबारों में है। इंडियन एक्सप्रेस में यह खबर दो कॉलम में है शीर्षक वही है जो दूसरे सभी अखबारों में है। दि एशियन एज में यह खबर सिंगल कॉलम में है लेकिन शीर्षक वही है। (जारी)

अगली किस्त में पढ़िए : द टेलीग्राफ की खबर का अनुवाद, चढ़ावा घोटाले पर योगी के सख्त रुख से संघ में बेचैनी

यह रहा लिंक : https://www.bhadas4media.com/chadhava-ghotale-par-yogi-ke-shakhta-rukh/

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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