महीनों की लंबी खामोशी के बाद पूर्व आईपीएस और आजाद अधिकार सेना के प्रमुख अमिताभ ठाकुर एक बार फिर सक्रिय नजर आने लगे हैं। दूसरी बार जेल से रिहा होने के बाद वह लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन और राजनीतिक गतिविधियों से लगभग गायब रहे। इस दौरान उनकी अनुपस्थिति को लेकर कई तरह की चर्चाएं होती रहीं। बताया गया कि वह रांची में अपने आईएएस भाई के पास थे, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई कि वह खुद गए थे, या ले जाया गया था। अमिताभ ठाकुर की इस लंबी गैरमौजूदगी का असर उनकी नवगठित पार्टी पर भी पड़ा। हालात ऐसे थे कि पार्टी के कई पदाधिकारियों तक को यह जानकारी नहीं थी कि उनके नेता कहां हैं। संगठन की गतिविधियां भी लगभग ठप पड़ गई थीं और पार्टी नेतृत्वहीन नजर आने लगी थी।
उनकी चुप्पी के दौरान राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह के कयास लगाए जाते रहे। किसी ने इसे सरकार के दबाव से जोड़ा, तो किसी ने इसे रणनीतिक दूरी बताया। कुल मिलाकर, उनकी अनुपस्थिति को लेकर जितने मुंह उतनी बातें होती रहीं।
अब लंबे अंतराल के बाद अमिताभ ठाकुर ने फिर से सार्वजनिक मुद्दों पर मुखर होना शुरू कर दिया है। उनकी वापसी के साथ जनहित के सवालों पर उनकी सक्रियता भी दिखाई देने लगी है। इसी क्रम में उन्होंने हाल ही में निलंबित किए गए सिपाही सुनील शुक्ला का मामला उठाकर एक बार फिर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करने की कोशिश की है।
सुनील शुक्ला प्रकरण: अनुच्छेद 311(2) की संवैधानिक कसौटी
दिनांक: 01 जुलाई 2026
आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने बिना विभागीय कार्यवाही किये उत्तर प्रदेश पुलिस के कांस्टेबल सुनील शुक्ला की सेवा समाप्ति को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311(2) तथा निष्पक्ष लोकसेवा से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न बताया है.
उन्होंने कहा कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी की सेवाएं अनुच्छेद 311(2) के अपवादों का सहारा लेकर समाप्त की जाती हैं, तो प्रशासन पर यह स्पष्ट करने की पूरी जिम्मेदारी होती है कि इस मामले में विभागीय कार्यवाही किया जाना व्यवहारिक या संभव नहीं है.
अमिताभ ठाकुर ने कहा कि इस मामले में ऐसे कोई तथ्य सामने नहीं आते दिखते हैं जिसमे विभागीय कार्यवाही किया जाना अव्यवहारिक या असंभव हो गया हो.
अतः एक कर्मचारी द्वारा विभागीय भ्रष्टाचार का आरोप लगाने के बाद उन आरोपों की निष्पक्ष जांच किये बिना इस अपवाद का प्रयोग किया लोकनीति के सिद्धांतों के खिलाफ है.
(अमिताभ ठाकुर)
राष्ट्रीय अध्यक्ष
आजाद अधिकार सेना



