राहुल देव-
एक प्रचंड अंधभक्त को लंबे अप्रिय संवाद में दिया गया उत्तर। यहाँ इसलिए कि उनके जैसे बहुत से दूसरे मित्र से अमित्र या शत्रु बन गए सज्जनों के भी काम आ सके।
“अपने और अपने समय के सारे पापों के लिए तत्कालीन कांग्रेस-गैर कांग्रेस सरकारें, पार्टियाँ ज़िम्मेदार हैं और हर संभव सजा की हकदार हैं। उनका कोई बचाव नहीं है। न कभी किया है न करूँगा। और जन्म के तीन साल से ही संघ का माहौल मिला है इसलिए कांग्रेस विरोध मेरी घुट्टी में है यह आप भूल जाते हैं।
आपकी समझ की समस्या यह है कि मुझे भी आप कांग्रेस या कम्युनिस्ट समर्थक मान लेते हैं और मुझे तथा हर वर्तमान आलोचक को उसी सीमित बचकानी पुरानी शब्दावली के सहारे एक ही लाठी से हाँकने लगते हैं। सूक्ष्म विचार और विश्लेषण आपके बस के नहीं।
अब बार-बार धमकियाँ भी देने लगे हैं।
हमें मालूम है कि बजरंग दल की गुंडा सेना या कोई भी भड़काया हुआ अंधभक्त किसी भी दिन हमें कहीं भी पीट सकता है, हमारे परिजनों पर हमला कर सकता है, आपकी सरकारें किसी भी दिन हज़ारों तरीक़े अपना कर हमारा इज़्ज़त के साथ जीना मुश्किल बना सकती हैं, अकल्पित नुक़सान पहुँचा सकती हैं, बेइज़्ज़त और बदनाम कर सकती हैं, फँसा सकती हैं। सैकड़ों को फँसाया गया है सब देख चुके हैं।
हम ये सारे जोखिम जानते हैं। परिजन और शुभचिंतक सावधान करते रहते हैं। लेकिन हम फिर भी यह अप्रिय जोखिम उठा रहे हैं। क़ीमत चुका रहे हैं और चुकाने के लिए तैयार हैं।
इसलिए नहीं कि हमें कहीं से कोई बढ़ावा, चढ़ावा, समर्थन और सहायता मिल रही है या कोई हमारा योगक्षेम वहन करने के लिए तैयार है।
हमारा, मेरा एकमात्र बल और सहारा वही राम है जिसके नाम और काम को कलंकित कर रही है आपकी मंडली। मेरे राम और मेरी आस्था किसी रूप-स्थान-संगठन और राजनेता के भरोसे नहीं है। वह बस ‘है’। कहाँ से आती है कैसे आती है यह राजनीतिक चेतना वाले कभी जान ही नहीं सकते। वहाँ सत्ता और राजनीति का प्रवेश नहीं है।
ये जो हज़ारों लोग सहज आस्था के कारण अयोध्या आ रहे हैं, जिनकी वही आस्था लूटी गई है उनकी संख्या को अपनी शक्ति और समर्थन समझने की भूल जो भी करेगा क़ीमत चुकाएगा। ये भोले लोग राम के लिए आते हैं संघ के प्रकल्प के लिए नहीं।
यह कहने में मुझे सुख नहीं दुख होता है कि मैं स्वयंसेवक था। किसी प्रमाणपत्र की ज़रूरत नहीं है लेकिन कोई भी चाहे तो पता कर सकता है। मुझे और मेरी पृष्ठभूमि जानने वालों में संघ के कुछ अत्यंत वरिष्ठ अधिकारी और प्रचारक भी हैं।
जिन ‘प्रचंड अंधभक्त’ को उत्तर दिया है वह तो संघ कार्य में सहयोगी रहे हैं। आम धारणाओं के आधार पर व्यक्ति को आँकना बुद्धिमानी नहीं मानी जाती।



