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आज के अखबार : महंगी चीनी का मामला मौसम का हाल बताने में रह गया, फिर भी खबरें दबा-छिपा दी गईं

Worshippers gathered around a table, signing forms at New Hope Church in Virar.

संजय कुमार सिंह

आज महंगी चीनी पर खबर सिर्फ द टेलीग्राफ में लीड है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के अनुसार, 45 साल पुराने एक मामले को सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक प्रणाली की नाकामी कहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड सरकार का हाल बताती है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने पहले यह कहकर हलचल मचा दी थी कि विदेश मंत्रालय ने मीडिया से बातचीत को सिर्फ़ फोटो खिंचवाने और बिना सवाल-जवाब के शुरुआती बयानों तक सीमित रखने के लिए कहा था। अब खबर है, सरकारी सूत्रों ने ज़ोर देकर कहा कि भारतीय पक्ष की ओर से कोई असामान्य मांग नहीं की गई थी।

सरकारी सूत्रों ने ट्रंप के “अंदाज़ा न लगा पाने वाले व्यवहार” का हवाला दिया, जो दक्षिण अफ्रीका और यूक्रेन जैसे देशों के राष्ट्राध्यक्षों/सरकार प्रमुखों के साथ उनकी मुलाकातों के बाद हुए मीडिया इवेंट्स में देखा गया था। खबर के अनुसार, गोर ने बताया कि विदेश मंत्रालय के अनुरोध के बावजूद, ट्रंप ने मीडिया इवेंट में 45 मिनट की बिना स्क्रिप्ट वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस की। गोर के अनुसार, विदेश मंत्रालय मीडिया को शामिल तो करना चाहता था, लेकिन उसने कहा, “पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस न करें”। इन खबरों से लगता है कि इसे पाप कहें या निकम्मापन, विदेश नीति की नालायकी या प्रधानमंत्री की योग्यता – घड़ा भर गया लगता है।

खबरों से जो बताया जाता है उससे पूरा मामला समझ में नहीं आता है और अनुत्तरित सवालों के जवाब नहीं मिलते। मैं कल रात दिल्ली एयरपोर्ट से गाजियाबाद आया और सड़क आश्चर्यजनक रूप से खाली थी। लेकिन आज दैनिक भास्कर में खबर है, भारी बारिश के कारण दिल्ली की सड़कों पर लगे भयंकर जाम ने यात्रियों की परेशानी और बढ़ा दी। सैकड़ों यात्री जाम में फंसने के कारण समय पर एयरपोर्ट नहीं पहुंच सके और उनकी फ्लाइट छूट गई। वहीं, कई यात्री एयरपोर्ट पहुंचने के बाद भी परेशान हुए, क्योंकि खराब मौसम को देखते हुए कुछ उड़ानें एयरलाइंस ने रद्द कर दीं।

आप जानते हैं कि गलत और झूठी खबरों तथा दावों से सरकार और सत्तारूढ़ दल के पक्ष में माहौल बनाया जाता रहा है तो आज गुड़गांव की सड़क पर पानी भरे होने की फोटो खूब छपी है। असली खबर यह है कि कल उड़ान डायवर्ट किए जाने से कई यात्री दिल्ली नहीं पहुंचे और इनसे जाने वाले इतने ही यात्रियों को दिल्ली हवाई अड्डे पहुंचने की जरूरत नहीं हुई। 200 यात्री प्रति विमान के औसत से इनके लिए 3000 आने वाले और इतने ही जाने वाले हुए।

इन्हें हवाई अड्डे लाने ले जाने वाली 5000 गाड़ियां कल नहीं चलीं इसलिए सड़कों पर ट्रैफिक कम होगा। आज यह खबर हो सकती थी। पर अब ऐसी खबरें नहीं होती हैं। इनके लिए अगर कुल 5000 गाड़ियां आती-जातीं तो ट्रैफिक वैसा नहीं होता जैसा कल था। मुझे तो सड़क खाली मिली लेकिन जिसने ट्रैफिक में देरी के कारण फ्लाइट छूटने की खबर दी है उसने देरी का कोई कारण नहीं बताया है और आजकल रिपोर्टिंग ऐसे ही हो रही है। आज की कई खबरों में सबसे खास है, देशबन्धु का बॉटम। कश्मीर घाटी में पीएम विशेष पैकेज के तहत नियुक्त कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को फिर आतंकी धमकी मिली है।

निश्चित रूप से यह एक गंभीर मामला है। खबर है कि पुलिस और खुफिया एजेंसियां पत्र की ‘सत्यता’ और निजी जानकारी लीक होने के स्रोत की जांच कर रही हैं। स्रोत की जानकारी तो ठीक है लेकिन सत्यता की जांच का कोई मतलब नहीं है। झूठा या बेमतलब पत्र भेजकर सरकार या व्यवस्था से मजाक करने वाला कोई रिश्तेदार तो होता नहीं है फिर यह सब कौन करेगा और करेगा तो क्या वह अपराध नहीं है? अनुच्छेद 370 हटाकर, राज्य को दो हिस्सों में बांट कर केंद्र शासित प्रदेश बनाया दिए जाने का हश्र यह हुआ है कि मुख्य मंत्री उमर अब्दुल्ला ने इसे गंभीर मामला बताया। उन्होंने पुलिस, सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों से कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है।

जाहिर है, मुख्यमंत्री लाचार हैं, पुलिस उनके नियंत्रण में नहीं है, निर्णय दिल्ली से होगा और यह एक सीमाई, आतंकवाद प्रभावित राज्य है। यह स्थिति राष्ट्रवादियों ने देशभक्ति के नाम पर बनाई है और विरोध करने वाले सोनम वांगचुक का हाल आप जानते हैं। फिर भी, अब्दुल्ला ने कहा है, ऐसी धमकियों को हल्के में नहीं लिया जा सकता है। इसी खबर में ‘घर से काम करने’ की अनुमति मांगी  शीर्षक के तहत कहा गया है, ऑल पीएम पैकेज एम्प्लॉइज फोरम कश्मीर ने मुख्य सचिव अटल डुल्लू से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। कर्मचारी नेता सनी रैना ने कहा कि जांच पूरी होने तक कर्मचारियों को घर से काम की अनुमति दी जाए।

दिलचस्प यह है कि कर्मचारियों की गोपनीय जानकारी धमकी देने वालों तक पहुंच चुकी है। इससे पहले, 7 अगस्त को यूएलसी के नाम से धमकी पत्र सामने आया था। उसमें 6 कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के नाम थे। इसके बाद संवेदनशील पंडित बस्तियों की सुरक्षा बढ़ाई गई थी। दैनिक भास्कर में पहले पन्ने पर छपी इस खबर का फ्लैग शीर्षक है, निजी जानकारी आतंकियों तक पहुंचने पर चिंता बढ़ी। मुख्य शीर्षक है, कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को फिर आतंकी धमकी, नाम-पते उजागर।

खबर से जाहिर है कि चिन्ता इस बात की नहीं है कि सूचना (या निजी जानकारी लीक हो गई) चिन्ता इस बात की है कि आतंकियों तक कैसे पहुंच गई। कहने की जरूरत नहीं है निजी जानकारी लीक होना या उसे सार्वजनिक किया जाना ही अनुचित है और नहीं होना चाहिए। लेकिन होता रहा है और ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की कोई खबर नहीं है। पहले कोई मांग नहीं हुई या हुई तो उसे सुना नहीं गया। जो जानकारी लीक हो गई, या सार्वजनिक है वह जो चाहेगा उसके पास पहुंच जाएगी। इसके लिए किसी रॉकेट साइंस की जरूरत नहीं है। लेकिन चिन्ता है कि किसी खास के पास क्यों या कैसे पहुंची।

सच्चाई यह है कि सार्वजनिक हो गई तो पहुंचना मुश्किल ही नहीं है लेकिन चिन्ता शायद इसलिए है कि ऑपरेशन सिन्दूर के नाम पर पाकिस्तान को सबक सिखाने का दावा किया जा चुका है। सबक कैसे, किन परिस्थितियों में कहां किसने सिखाया यह महत्वपूर्ण नहीं है। इसी तरह मामला सीधे प्रधानमंत्री या उनके पदनाम से चलने वाली योजना का है। सरकार पूर्व में कश्मीर से आतंकवाद खत्म करने का दावा कर चुकी है।

पाकिस्तान को रोकने के लिए ही ऑपरेशन सिन्दूर हुआ था जो घुस कर मारने की घोषणा का विस्तार माना जा सकता है। यही नहीं, अनुच्छेद 370 भाजपा के लिए बड़ा मुद्दा था। उसे हटाने के बाद क्या हुआ। कौन जवाब देगा और जवाब तो तब आएगा -जब सवाल उठेगा। मीडिया सवाल उठाता नहीं है। यहां भी खबर है जो आधी-अधूरी या जरूरत भर ही है। यह जरूरत किसकी है, आप समझ सकते हैं। एक पाठक के रूप में मेरी जरूरत भर तो नहीं है।

अमर उजाला, दैनिक भास्कर, नवोदय टाइम्स और देशबन्धु की लीड लगभग एक ही खबर है। भारी बारिश से ठहरी दिल्ली (अमर उजाला) और दिल्ली-गुड़गांव दरिया है… ये राह नहीं आसां (नवोदय टाइम्स) की लीड का शीर्षक है और पहले भी बारिश में ऐसा होता रहा है। इसलिए किसी और खबर को भी लीड बनाया जा सकता था। नवोदय टाइम्स में पहले पन्ने पर एक खबर है, गेहूं निर्यात से रोक हटी। मुझे यह खबर किसी और अखबार में पहले पन्ने पर नहीं दिखी लेकिन चीनी और प्याज महंगा होने की खबर किसी और अखबार में प्रमुखता से नहीं है।

आज बारिश से 15 उड़ानों का मार्ग बदलने की भी खबर है। इस खबर के अनुसार, 280 से अधिक उड़ानों में देर हुई और 20 से अधिक उड़ानों को रद्द कर दिया गया। नवोदय टाइम्स में पहले पन्ने पर इतना ही है। दैनिक भास्कर ने लिखा है, दिल्ली-एनसीआर में सोमवार को मूसलाधार बारिश होने से हवाई सेवाओं पर असर पड़ा। खराब मौसम के कारण इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (आईजीआई) एयरपोर्ट पर करीब 390 उड़ानें देरी से उड़ीं। इनमें से 15 उड़ानों को दूसरे एयरपोर्ट पर डायवर्ट करना पड़ा। वहीं, 26 उड़ानें रद्द कर दी गईं। देशबंधु ने भारी बारिश से बुरा हाल में सब कुछ समेटने की कोशिश की है।

अंग्रेजी अखबारों में बारिश की खबर सिर्फ हिन्दुस्तान टाइम्स में लीड है। हालांकि इसमें विमान सेवा प्रभावित होने की खबर नहीं है। द हिन्दू की लीड का शीर्षक है, महाराष्ट्र के अस्पताल में आग लगने से तीन नवजात मरे। आग लगने की घटनाएं होती रही हैं। जान-माल का नुकसान आम है। लेकिन सरकार ने इसपर कभी विचार किया हो तो पता नहीं। आग लगना रुक नहीं रहा है। सरकार के पास कोई योजना तो छोड़िए, इच्छा शक्ति है या नहीं पता नहीं। मणिपुर में सीआरपीएफ के सब इंस्पेक्टर के जख्मी होने और दो समूहों की झड़प में दो घर जला दिए जाने की खबर है।

इंडियन एक्सप्रेस की लीड सरकार का प्रचार करने वाला है। फ्लैग शीर्षक है – पुतिन ने कहा, रूस-भारत व्यापार रिश्तों को विकसित करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी निजी तौर पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। यह खबर विदेश मंत्री एस जयशंकर द्वारा मास्को में रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के मौके पर है। इस खबर के साथ आज एक्सप्रेस स्पेशल खबर है, महाराष्ट्र के चर्च में जाने वालों से पादरी एक फॉर्म पर दस्तखत करवा रहे हैं जिसमें कहा गया है कि वे अपनी स्वतंत्र इच्छा से गिरजाघर में प्रार्थना कर रहे हैं।

इससे आप समझ सकते हैं कि देश में सांप्रदायिकता और दूसरे धर्म के लोगों की स्थिति क्या बना दी गई है। खबरें नहीं छपती हैं सो अलग। दि एशियन एज की लीड भाजपा की राजनीति है। पंजाब में चुनाव के लिए  भाजपा शिरोमणि अकाली दल के साथ संभावित गठजोड़ के लिए वार्ता कर रही थी। आज खबर है कि भाजपा अकले चुनाव लड़ेगी और सरकार बनाएगी। भाजपा के इस दावे पर यकीन हो तो यह खबर है नहीं तो दावा है – ऐसी खबरों के मामले में संपादकीय निर्णय महत्वपूर्ण होता है। लेकिन खबर है, अब लगता है भाजपा अकेले लड़ेगी। दावा भाजपा के महासचिव का है तो अकेले लड़ने की संभावना जैसे शब्दों का कोई मतलब नहीं है। खबर यह होनी चाहिए थी कि भाजपा महासचिव ने कहा कि पार्टी पंजाब में अकेले चुनाव लड़ेगी और सरकार बनाएगी।

इस दावे को प्रचार देना अखबार का विशेषाधिकार है और इसपर यकीन करना या नहीं करना संपादकीय अनुभव का मामला है। फिर भी प्रचार को खोजी खबर बनाने की कोशिश की गई है। चीनी के मामले में द टेलीग्राफ की खबर का सार उसका फ्लैग शीर्षक है, निष्क्रियता और घटते उत्पादन के उपयुक्त प्रभाव ने चीनी को महंगा कर दिया है। खबर में कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी के हवाले से कहा गया है कि नीति संबंधी चालू सुधार बहुत देर से किए गए हैं। उपभोक्ता उसकी कीमत चुका रहे हैं।

इसके दो कारण बताए गए हैं, सरकार द्वारा आपूर्ति का गलत अनुमान और बहुत देर से जागना। इसके बावजूद नवोदय टाइम्स में भारतीय चीनी मिल संघ के हवाले से की खबर है, चीनी की कमी नहीं है, अगले हफ्ते तक कम हो जाएंगे जाम। जाहिर है यह प्रचार है और इस तरह के आश्वासन या खबर का कोई मतलब नहीं है। इसपर यकीन किया जाए तो टेलीग्राफ की खबर अपने आप सही साबित हो जाती है कि सरकार देर से जागी या देर से सक्रिय हुई। यह खबर तो हो सकती है लेकिन एक हफ्ते में कीमत कम हो जाएगी आश्वासन का मतलब तब होगा जब यह बताया जाए कि कीमत बढ़ी क्यों?

अगर कारण कार्रवाई देर से करना है तो बिना छुट्टी लिए रोज 18 घंटे काम करने का क्या मतलब हुआ और तमाम मंत्रियों का काम एक ही व्यक्ति को करना है तो 18 घंटे काम करना बहुत कम है। लेकिन ऐसी खबरें नहीं छपती हैं और यही मीडिया की या भारत की जनता की समस्या है।

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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