नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी Life Insurance Corporation of India (LIC) के निवेश से जुड़े कथित बड़े वित्तीय घोटाले में Central Bureau of Investigation (CBI) ने Reliance Capital Limited के खिलाफ FIR दर्ज की है। मामले में कंपनी के पूर्व चेयरमैन अनिल अंबानी, पूर्व ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर सतीश सेठ, अज्ञात लोकसेवकों और अन्य लोगों को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
CBI के मुताबिक यह मामला LIC की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है। LIC ने आरोप लगाया है कि 2012 से 2018 के बीच उसने Reliance Capital द्वारा जारी किए गए पांच Non-Convertible Debentures (NCD) में कुल ₹3,900 करोड़ का निवेश किया था। ये निवेश कंपनी की सामान्य कारोबारी जरूरतों, फंडिंग और पुराने कर्ज के पुनर्वित्त के लिए किए गए थे।
लेकिन CBI के सामने LIC की शिकायत में आरोप लगाया गया कि निवेश की रकम का कथित तौर पर निर्धारित उद्देश्य से अलग इस्तेमाल किया गया और धन के diversion तथा misappropriation के जरिए LIC को लगभग ₹2,684.57 करोड़ का wrongful loss हुआ।
सवाल सिर्फ ₹2,684 करोड़ का नहीं
इस मामले की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि यह किसी सामान्य निजी निवेशक का मामला नहीं, बल्कि देश की सबसे बड़ी सरकारी जीवन बीमा संस्था LIC के निवेश से जुड़ा है।
CBI अब यह जांच कर रही है कि Reliance Capital में LIC के निवेश के बाद रकम का वास्तविक इस्तेमाल कहां हुआ, किन कंपनियों या संस्थाओं तक पैसा पहुंचा और इस पूरी प्रक्रिया में कंपनी के अधिकारियों के अलावा किसी लोकसेवक या अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।
CBI ने मामले में आपराधिक साजिश, cheating, criminal breach of trust तथा धन के कथित diversion और misappropriation से संबंधित आरोपों की जांच शुरू की है। एजेंसी के मुताबिक जांच के दौरान सभी संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और कथित फंड ट्रेल को खंगाला जाएगा।
Reliance Group के खिलाफ CBI की जांच का बड़ा सिलसिला
LIC वाला यह मामला अलग-थलग कार्रवाई नहीं है। 2026 में CBI ने अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले Reliance Group की विभिन्न कंपनियों के खिलाफ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और LIC की शिकायतों के आधार पर कई मामले दर्ज किए हैं।
CBI के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार Reliance Communications, Reliance Home Finance, Reliance Commercial Finance और Reliance Telecom समेत समूह से जुड़ी विभिन्न कंपनियों के खिलाफ अलग-अलग मामले चल रहे हैं। मई 2026 में सरकार ने बताया था कि इन मामलों में कथित नुकसान का कुल आंकड़ा हजारों करोड़ रुपये का है और जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट द्वारा की जा रही है।
Reliance Communications से संबंधित मामलों में भी CBI पहले कार्रवाई कर चुकी है। फरवरी 2026 में Bank of Baroda की शिकायत पर CBI ने RCom, अनिल अंबानी और अन्य के खिलाफ एक और मामला दर्ज किया था, जिसमें बैंक को ₹2,220 करोड़ से अधिक के कथित नुकसान और संबंधित पक्षों के जरिए कथित फंड डायवर्जन के आरोप थे।
अप्रैल 2026 में CBI ने Reliance Communications के दो वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार भी किया था। उस मामले में SBI की शिकायत के आधार पर लगभग ₹2,929 करोड़ के कथित नुकसान की जांच हो रही थी।
अब LIC निवेश की जांच कितनी दूर जाती है, यह महत्वपूर्ण होगा
LIC से जुड़े नए मामले में फिलहाल आरोप जांच के स्तर पर हैं। FIR दर्ज होना किसी व्यक्ति या कंपनी को दोषी साबित नहीं करता। CBI की जांच के बाद सामने आने वाले दस्तावेज, बैंकिंग लेन-देन, फंड ट्रेल, अधिकारियों के बयान और आगे दाखिल होने वाली चार्जशीट से ही यह स्पष्ट होगा कि कथित वित्तीय अनियमितता में किसकी क्या भूमिका थी।
लेकिन इतना स्पष्ट है कि LIC के ₹3,900 करोड़ के निवेश और करीब ₹2,684.57 करोड़ के कथित नुकसान से जुड़ी यह जांच Reliance Group के खिलाफ चल रही व्यापक CBI कार्रवाई में एक और महत्वपूर्ण कड़ी बन गई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—LIC का पैसा कहां गया, किसके फैसले पर गया और उस पूरे निवेश तंत्र में किस-किस की भूमिका थी?


