राकेश कायस्थ-
रंगा-बिल्ला युग में कोई राजनीतिक विश्लेषण आपके काम नहीं आएगा। इस दौर को आप केवल अपराध शास्त्र के नियमों से ही समझ सकते हैं। जिस दिन भी इस संगठित अपराधतंत्र की आखिरी सांस टूटेगी, उसके बाद इतनी कहानियां निकलकर सामने आएंगी कि अगले दस-पंद्रह साल तक भारत पूरी दुनिया का सबसे बड़ा OTT कंटेट सप्लायर बना रहेगा।
इस तस्वीर में जो तीसरा व्यक्ति नज़र आ रहा है, उसका नाम एम. नागेश्वर राव है। आपको याद होगा कि जिस दौर में राफेल मामला गर्म था, बीजेपी के दो पूर्व वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री रह चुके यशवंत सिन्हा और अरूण शौरी मामले की जाँच की एक अर्जी लेकर सीबाआई हेडक्वार्टर गये थे। ये वाकया 2019 के लोकसभा चुनाव से कुछ समय पहले का है।
यशवंत सिन्हा और अरूण शौरी के साथ भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार लड़ने वाले सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण भी थे। तात्कालिक सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा ने ये अर्जी स्वीकार कर ली जो एक सामान्य प्रक्रिया थी। उसके बाद आधी रात को तड़ीपार ने दिल्ली पुलिस भेजकर सीबीआई हेडक्वार्टर पर कब्जा करवा लिया।
इस तरह की घटना किसी ‘बनाना रिपब्लिक’ में ही संभव थी लेकिन मोदी-शाह के संगठित अपराध तंत्र ने इसे कर दिखाया। आलोक वर्मा हटाये गये, शंटिंग में रिटायर हुए और अंतिम सूचना तक पेंशन बहाल करवाने के लिए धक्के खा रहे थे।

सीबीआई का नया निदेशक उड़ीसा काडर के आईपीएस एम. नागेश्वर राव को बनाया गया और उसके बाद सीबीआई ने राफेल जाँच की फाइल रद्दी की टोकरी में फेंक दी। अब वही नागेश्वर राव रिटायरमेंट के बाद खुलकर कह रहे हैं कि नरेंद्र मोदी ने जानबूझकर कानून में बदलाव करके सीबीआई को एक ‘निर्वीर्य’ संगठन में परिवर्तित किया है, ताकि केंद्र सरकार में रात-दिन चल रहे भ्रष्ट्राचार की कोई जांच ना हो सके। मोदी को डर है कि जब उनका कच्चा-चिट्ठा खुलेगा तो बचना मुश्किल होगा इसलिए वो सारी तैयारी अभी से कर रहे हैं।
ये भी एक दिलचस्प बात है कि रिटायरमेंट के बाद नागेश्वर राव ने ‘सर्वजन सतानन पार्टी’ नाम से एक राजनीतिक दल बनाया है और यूपी की सभी विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान किया है।
समझना मुश्किल नहीं है कि पूरा संघी टोला किस तरह साजिश रचने वाला और सत्ता के लिए एक-दूसरे की गर्दनें उतारने वाला है। इनसे कोई देशहित कि उम्मीद करे उससे बड़ा मूर्ख कौन होगा।

