नई दिल्ली। हिंदी खबर के प्रधान संपादक अतुल अग्रवाल का रिहाई के बाद एक वीडियो सामने आया है। साढ़े चार मिनट से अधिक अवधि के इस वीडियो में अतुल अग्रवाल हरियाणा पुलिस की हिरासत में कथित प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए कहते हैं कि सत्ता बड़ी निष्ठुर और बेरहम होती है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है और पत्रकारिता के मानदंडों से कोई छेड़छाड़ नहीं की है। अतुल ने अपनी रिपोर्टर नीतू का परिचय कराते हुए उन पर गर्व जताया और कहा कि वह पीआईबी से प्रमाणित पत्रकार हैं।
वीडियो में अतुल अग्रवाल कहते हैं कि बदलाव न सत्ता में होना चाहिए, न व्यवस्था में और न ही पत्रकारिता में। उनका कहना है कि सत्ता अपना काम कर रही है और पत्रकार अपना काम कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी इज्जत और अस्मिता के साथ खिलवाड़ किया गया। उन्हें घर से उठाया गया और हिरासत में थर्ड डिग्री टॉर्चर किया गया।
अतुल ने कहा, ”मेरा थर्ड डिग्री टॉर्चर हुआ। लोहे का बेलन चलाया गया। मेरे पूरे पैर के पंजे सूजे हुए हैं। तीन-तीन बार मुझे नंगा होना पड़ा।” उन्होंने अपनी रिपोर्टर नीतू का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें अपनी रिपोर्टर पर गर्व है। नीतू ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के गृह जिले कुरुक्षेत्र में नशे के मुद्दे पर रिपोर्टिंग की थी।
अतुल अग्रवाल के ये आरोप वीडियो में उनके अपने बयान हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और हिरासत में कथित प्रताड़ना के संबंध में पुलिस का पक्ष सामने आना बाकी है।
क्या है पूरा मामला?
अतुल अग्रवाल हिंदी खबर के प्रधान संपादक होने के साथ लिविंग इंडिया न्यूज से भी जुड़े हैं। मामला हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के गृह जिले कुरुक्षेत्र के लाडवा क्षेत्र में नशे के कथित कारोबार और उसके खिलाफ चैनल की रिपोर्टिंग से जुड़ा है।
लिविंग इंडिया न्यूज ने 7 अक्टूबर को हरियाणा में नशे के मुद्दे पर एक रिपोर्ट प्रसारित की थी। इसके बाद 10 अक्टूबर को कुरुक्षेत्र पुलिस ने चैनल के प्रबंध निदेशक अतुल अग्रवाल, संपादक सौरभ उपाध्याय, पत्रकार नीतू, एंकर सुदेश नैन मोर और ड्राइवर लवप्रीत को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने आरोप लगाया कि चैनल ने करीब छह महीने पुराने एक वीडियो को हालिया स्टिंग ऑपरेशन के रूप में प्रसारित किया। पुलिस के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने वीडियो के इस्तेमाल और कथित ब्लैकमेलिंग को लेकर आरोप लगाए थे।
इस मामले में चैनल की रिपोर्टिंग और पुलिस की कार्रवाई को लेकर पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर भी सवाल उठे। एक तरफ चैनल से जुड़े लोगों ने नशे के मुद्दे पर रिपोर्टिंग को अपनी कार्रवाई का संदर्भ बताया, वहीं पुलिस ने वीडियो के कथित इस्तेमाल और शिकायतकर्ता के आरोपों को जांच का आधार बनाया। इन आरोपों की सच्चाई का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया से होना है।
अदालत से मिली जमानत
इस मामले में 15 अक्टूबर को कुरुक्षेत्र की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने अतुल अग्रवाल समेत पांच आरोपियों की नियमित जमानत याचिकाएं मंजूर कर लीं। अदालत ने पुलिस की ओर से अतुल अग्रवाल की आठ दिन की अतिरिक्त रिमांड मांगने वाली अर्जी भी खारिज कर दी। हालांकि, जमानत मंजूर होने और जेल से वास्तविक रिहाई के बीच जमानत बांड जमा करने जैसी औपचारिकताएं पूरी करना जरूरी था।
रिहाई के बाद सामने आए वीडियो में अतुल अग्रवाल ने हिरासत में अपने साथ हुए कथित व्यवहार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। साथ ही, जिस रिपोर्ट के बाद यह विवाद सामने आया, उसमें प्रसारित वीडियो की वास्तविकता और पुलिस की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच भी निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए।
यह मामला एक साथ दो अहम सवाल खड़े करता है—नशे जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दे पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों की स्वतंत्रता कैसे सुरक्षित रहे और पत्रकारिता में प्रसारित सामग्री की सत्यता तथा जवाबदेही कैसे सुनिश्चित की जाए। दोनों सवालों का जवाब पारदर्शी जांच और तथ्यों के आधार पर ही मिल सकता है।
अतुल अग्रवाल का पूरा वीडियो यहां देखें… हिंदी खबर पत्रकार गिरफ्तार

