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सुख-दुख

पैदल दफ्तर जा रहे ‘आज’ अखबार के इस पत्रकार के साथ यूपी की मऊ पुलिस ने क्या किया पढ़िए?

हे राम! अब इस देश में ईमानदारी से जीना भी गुनाह हो गया है क्या? 36 साल पत्रकारिता करने वाला शख्स सड़क पर पैदल चलते हुए अपनी पहचान साबित करने को मजबूर है। जब बेगुनाही का सबूत देना पड़े और ईमानदारी भी शक के घेरे में हो, तो फिर इंसान की उम्मीद किससे करे!
-सुजीत सिंह प्रिंस, वरिष्ठ पत्रकार


Professional headshot of a man in a navy suit and tie looking at the camera.

ऋषिकेश पांडेय-

डीजीपी साहब! क्या अब पैदल भी नहीं चलने देगी जनपद मऊ की पुलिस….आप भी जानिए आज मेरे साथ क्या हुआ?

मैं रोज की भांति आज भी मऊ जंक्शन रेलवे स्टेशन से पैदल तीन किलोमीटर दूर अपने अखबार के दफ्तर जा रहा था। अपराह्न करीब 1.45 बजे सारहू पुलिस चौकी के समीप अत्याधुनिक असलहों से लैस मोटरसाइकिल सवार दो सिपाहियों ने मुझे हाथ से इशारा कर रोक लिया और मैं रूक भी गया। मुझसे तरह-तरह के सवाल पूछे। मैंने सही-सही जवाब दिये। शायद, वे मेरे जवाब से संतुष्ट नहीं हुए और मुझसे आधार कार्ड मांगा। मैंने आधार कार्ड भी दे दिए।

एक सिपाही ने पूछा तुमको परसों भी देखा था। मैंने कहा मैं नियमित पैदल जाता हूं। सिपाही ने पूछा-करते क्या हो? मैंने कहा-पत्रकार हूं। फिर सिपाही ने कहा -पत्रकार का कार्ड दिखाओ। मैंने वो भी दिखा दिया। इस दृश्य को तमाम लोगों ने देखा। मगर, खाकी वर्दी की ताकत से भयभीत होकर दूर ही खड़े रहे। जब मेरे अंदर कोई कमी नहीं मिली तो सवालों से थककर सिपाहियों ने कहा-अच्छा जाओ। अब सवाल पूछने की मेरी बारी थी।

मैंने पूछा- अब बताइए… मुझे सरेआम सड़क पर रोककर पैदल जाते समय क्यों रोका? मैंने आज तक 36 वर्षों की पत्रकारिता में इसलिए मोटरसाइकिल तक नहीं खरीदी कि पुलिस मुझे वाहन चेकिंग के नाम पर डिटेन न करे। यातायात नियमों के उल्लंघन में चालान न करने पाये। तबसे सोच रहा हूं कि न रात थी। न शहर में कर्फ्यू ही लगा था और न मेरे पास कोई संदिग्ध वस्तु ही थी और न मेरी संज्ञेय अपराध करने की कोई उम्र ही है। फिर इन दोनों सिपाहियों ने काफ़ी देर तक मुझे रोककर किस अपराधी से मेरा चेहरा मैच कराना चाहते थे।

हालांकि हम इस बात को जग जाहिर नहीं करना चाहते थे। मगर, इस पुलिसिया कायरता की कारस्तानी सोच-सोचकर मुझे नींद नहीं आती। इसलिए सोचा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसे डाल दूं। ताकि अगर मऊ के एसपी सचमुच अपने मातहतों की कारस्तानी जानना चाहते हों तो सारहू पुलिस चौकी पर या आस-पास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज मंगवाकर देख लें। अगर,एसपी ने ऐसा नहीं किया तो मेरे लिए वही गाना-गाना ठीक रहेगा कि… कौन सुनेगा, किसको सुनाएं, इसीलिए चुप रहते हैं।

ऋषिकेश पांडेय ब्यूरोचीफ ‘आज’ हिंदी दैनिक मऊ।
मान्यता प्राप्त पत्रकार उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ।।
मोबाइल नंबर: 6306776859, 9415508911

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