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सुख-दुख

शहीद रामप्रसाद बिस्मिल की विरासत बचाने वाले वयोवृद्ध संपादक श्यामानंद आज खुद एक कमरे में सिमट गए!

Two people sit on a couch against a pink wall with a blue flower mural: a man in a striped shirt and an elderly woman with a brown headscarf.

वेद रत्न शुक्ला-

आज वयोवृद्ध संपादक/पत्रकार आदरणीय श्यामानंद जी का कुशलक्षेम जानने पहुंचा। श्री श्यामानंद जी शहीद रामप्रसाद बिस्मिल से प्रभावित होकर “बिस्मिल” नामक अखबार निकालते थे। 1970 के आसपास कमिश्नर ने पार्क रोड, गोरखपुर में एक बड़ी सी कोठी अलॉट कर दी थी। वहीं से श्री श्यामानंद जी अपनी गतिविधि चलाते थे।

उन्होंने बताया कि जब मैं 19 दिसम्बर को शहीद रामप्रसाद बिस्मिल जी का शहादत दिवस मनाता था तो उनकी बहन शास्त्री देवी 15 दिन पहले ही आ जाती थीं और 15-20 दिन बाद तक ठहरती थीं। कभी कभी वह दो महीने तक भी रुकती थीं। उनके बेटे हरिश्चंद्र भी साथ आते थे।

बताया कि शहीद बिस्मिल कि वही वारिस थीं। उनके एक भाई का स्वर्गवास बाल्यकाल में ही हो गया था। बहुत से क्रांतिकारियों, जो आजादी के बाद जीवित थे, का उनके पास आना – जाना लगा रहता था।

Elderly person wearing a light green kurta and brown headscarf sits on a bed in a softly lit room, looking at the camera.
श्री श्यामानंद जी

बहरहाल, 2023 के आसपास गोरखपुर के लालची प्रशासन (जो आमतौर पर होता है) ने बिस्मिल भवन को कब्जे में लेकर बनियों को बेच दिया। मुझे भी खूब याद है कि कुछ क्रांतिचेता लोगों ने आन्दोलन भी किया लेकिन प्रशासन पर कोई असर नहीं पड़ा। इस दौरान आंदोलनकारियों को प्रशासन ने हिरासत में लेकर कुसुमी जंगल छोड़ दिया जिसमें श्री श्यामानंद जी भी शामिल थे। लेकिन कलेक्टर ने इन्हें दो फ्लैट बरगदवा के पास दिया जिसमें इनकी देखभाल करने वाले दीपक पांडेय के लिए भी एक था।

दीपक जी अब दिवंगत हो गए और वह मशहूर पत्रकार और साहित्यकार श्री दयानन्द पाण्डेय जी के गांव के थे। कलेक्टर (कोई दक्षिण भारतीय) वहां श्री श्यामानंद जी का हालचाल लेने जाता था। तब इन्होंने कहा कि यह जगह मेरे लिए अनुकूल नहीं है। तब उसने शहर के सघन इलाके जुबिली टॉकीज के पास आवास का प्रस्ताव दिया लेकिन वहां भी इन्होंने अस्वीकार कर दिया। जिंदगी भर यह हार्ट ऑफ द सिटी और खुली खुली जगह रहे तो ऐसे स्थान इनको अनुकूल नहीं लगे। तब कलेक्टर के आदेश पर एडीएम ने अपनी कार में बैठाकर इन्हें पार्क रोड पर ही सीतापुर आई हॉस्पिटल के परिसर में शिफ्ट कर दिया।

यहां एक कमरा और पीछे छोटे से आंगन में वाशरूम है। श्री श्यामानंद जी ने कहा कि बहुत पहले मैंने कमिश्नर से कहकर बिस्मिल भवन के सामने पार्क और शहीद बिस्मिल की मूर्ति स्थापित करा दिया नहीं तो प्रशासन उसे भी बेच देता।

आज जब मैं इनसे मिलने पहुंचा तो यह एल. रॉन हाबर्ड की साइंटोलॉजी पढ़ रहे थे। मैंने पूछा, बगैर चश्मे के! बोले, आपके सामने ही है। कुछ देर बाद लौटा तो छोटे साइज वाली श्रीमद्भगवद्गीता पढ़ रहे थे। बातचीत के क्रम में श्री दयानन्द पाण्डेय जी को अपना मित्र बताया और कहा कि पहले मैं लखनऊ उनके यहां ही रुकता था। श्री रवि राय के पिता स्व ज्ञानप्रकाश राय का भी जिक्र आया। बताए कि वह नेशनल हेराल्ड के निर्भीक पत्रकार थे। उस दौर के तीन अन्य प्रमुख पत्रकारों का नाम बताए जिनमें जनाब अब्दुल वहाब, संभवतः श्री गुलाब और बाबू… ।

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