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लोकसभा चुनाव में सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश से ‘ईवीएम स्कैंडल’ की आशंका खत्म हो जाएगी?

प्रत्येक विधानसभा की 5 ईवीएम मशीनों का वीवीपैट से औचक मिलान कराए चुनाव आयोग… उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को चुनाव आयोग को यह निर्देश दिया है कि वो लोकसभा चुनाव में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र/निर्वाचन क्षेत्र में 5 ईवीएम मशीनों का वीवीपैट पर्चियों से औचक मिलान कराए। ऐसे में, 23 मई को लोकसभा चुनाव के नतीजों में विलम्ब सम्भव है,क्योंकि 4125 ईवीएम-वीवीपैट मिलान की व्यवस्था बढ़कर अब 20625 हो जाएगी। इससे पहले किसी भी एक विधानसभा क्षेत्र/निर्वाचन क्षेत्र में केवल एक ईवीएम का वीवीपैट से औचक मिलान कराया जाता था। इस बीच चुनाव आयोग ने कहा है कि ईवीएम में डाले गए वोट और वीवीपैट की पर्चियों के मिलान को लेकर उच्चतम न्यायालय के आदेश का जल्द से जल्द अनुपालन सुनिश्चित करेगा।

इस फैसले से अब अगर एक लोकसभा सीट के अंतर्गत यदि 6 विधानसभा हैं तो 30 वीवीपैट की गिनती होगी। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। न्यायमूर्ति गोगोई ने कहा कि एक निर्वाचन क्षेत्र से एक की बजाए पांच ईवीएम के चुनाव से इसकी प्रमाणिकता, चुनाव प्रक्रिया को लेकर विश्वास न केवल राजनीतिक पार्टियों को बल्कि गरीब लोगों के मन में भी सुनिश्चित हो जाएगा। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि केवल राजनीतिक दल ही नहीं बल्कि गरीब और निरक्षर जनता को भी संतुष्ट होना चाहिए। हालांकि उच्चतम न्यायालय ने 21 विपक्षी पार्टियों की 50 प्रतिशत वीवीपैट पर्चियों के ईवीएम से मिलान की मांग को अव्यवहारिक माना।

अभी तक आयोग विधानसभा चुनाव में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक मतदान केंद्र में और लोकसभा चुनाव में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के एक मतदान केंद्र में इस प्रकिया का पालन करता है। लेकिन उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद अब हर विधानसभा क्षेत्र में एक के बजाय पांच बूथों पर ईवीएम-वीवीपैट का औचक मिलान करना होगा।

विपक्ष लगातार यह मांग करता रहा है कि आगामी लोकसभा चुनाव के दौरान वीवीपैट की 50 फीसदी पर्चियों का मिलान किया जाए। विपक्ष ने 50 फीसदी पर्चियों के मिलान का अनुरोध किया है, जिसे मुख्य न्यायाधीश ने नहीं माना, क्योंकि जमीनी स्तर पर इसके लिए पहले के मुकाबले ज्यादा मैनपावर चाहिए और यह ढांचागत कठिनाइयों के मद्देनजर संभव नहीं है।

गौरतलब है कि 21 राजनीतिक दलों के नेताओं ने लगभग 6.75 लाख ईवीएम की वीवीपैट पर्चियों से मिलान की मांग की थी। विपक्षी नेताओं का उच्चतम न्यायालय में कहना था कि उन्हें 50 फीसदी वीवीपैट पर्चियों की गिनती से चुनाव नतीजे में देर होने पर आपत्ति नहीं है। 21 विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने कहा है कि 50 फीसदी ‘वीवीपैट’ पर्चियों की गिनती किए जाने पर लोकसभा चुनाव के नतीजों की घोषणा में छह दिनों की देर होने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।साथ ही उन्होंने कहा कि यह कोई ‘गंभीर विलंब’ नहीं है, बशर्ते कि यह चुनाव प्रक्रिया की पवित्रता सुनिश्चित करती हो।

उच्चतम न्यायालय में तेलुगू देशम पार्टी के मुखिया चंद्रबाबू नायडू, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के मुखिया शरद पवार, कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल, तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन, लोकतांत्रिक जनता दल के मुखिया शरद यादव, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, बहुजन समाज पार्टी के नेता सतीश चंद्र मिश्रा, डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और नेशनल कांग्रेस के फारूक अब्दुल्ला ने याचिका दाखिल की थी ।उनका कहना है कि ऐसा करने से मतदाताओं के बीच वोटिंग मशीनों की गरिमा बनाई रखी जा सकेगी।

वीवीपैट क्या है
वर्ष 2013 में उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुपालन में चुनाव आयोग ने वोटर वैरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) जारी किया था। वोटर वेरीफाइड ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) मशीन ईवीएम से जुड़ी होती है। जब मतदाता ईवीएम पर बटन दबाता है तब वीवीपैट मशीन से एक पर्ची निकलती है जिस पर उस पार्टी का चुनाव निशान और उम्मीदवार का नाम होता है, जिसे मतदाता ने वोट दिया होता है। मतदाता को सात सेकेंड तक दिखने के बाद यह वीवीपैट मशीन में एक बक्से में गिर जाती है।

वर्ष 2009 लोकसभा चुनावों के बाद सुब्रह्मण्यम स्वामी द्वारा ईवीएम के प्रयोग के खिलाफ दायर याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने मशीनों के टैम्पर प्रूफ नहीं होने की बात को स्वीकार किया था। लेकिन इस मामले में उच्च न्यायालय द्वारा चुनाव आयोग को कोई निर्देश नहीं दिए जाने के कारण स्वामी ने उच्चतम न्यायालय में अपनी बात रखी। उच्चतम न्यायालय ने चुनाव आयोग को चरणबद्ध तरीके से वीवीपैट का उपयोग करने और 2019 तक इनको पूरी तरह से स्थापित कर लेने का आदेश दिया था ।

ईवीएम की विश्वसनीयता पर गम्भीर सवाल
पिछले कुछ समय से तमाम राजनीतिक दल ईवीएम को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। दरअसल एमपी के एक उपचुनाव में जब ईवीएम का प्रदर्शन किया गया तब किसी भी बटन को दबाने पर वोट भाजपा को जाता दिखा। इसके बाद ईवीएम की विश्वसनीयता पर गम्भीर सवाल खड़े हो गये। राजनीतिक दलों ने आशंका जताई थी कि इसे हैक करके किसी एक पार्टी विशेष के पक्ष में वोट डाले जा सकते हैं। जिसके बाद चुनाव आयोग ने इसकी प्रामाणिकता को बरकरार रखने के लिए सभी को इसे हैक करने का खुला आमंत्रण दिया था। कोई भी पार्टी इसे हैक नहीं कर पाई थी। हालांकि इसके कारण लोगों के मन में भी इसकी पारदर्शिता को लेकर संदेह पैदा हो गया था। जिसके कारण उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को सभी विधानसभा सीटों पर 5 बूथ की ईवीएम की गिनती करने का आदेश दिया है।

खुद को सुधार से अलग नहीं रख सकती कोई भी संस्था
21 विपक्षी पार्टियों की याचिका पर सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने कहा इस याचिका को लंबित नही रख सकते, क्योंकि 11 अप्रैल से मतदान शुरू हो रहा है। दरसअल एक वकील ने सुनवाई के दौरान मांग की थी कि इस याचिका को लंबित रखा जाए। इसके पहले सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा था कि कोई भी संस्था, चाहे वह न्यायपालिका ही क्यों न हो, खुद को सुधार से अलग नहीं रख सकती है। पीठ ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा था कि वह वीवीपैट मशीनों की संख्या बढ़ा सकता है या नहीं। पीठ ने चुनाव आयोग से कहा था कि वह शपथपत्र दायर कर कारण बताए कि वह चुनावों की पारदर्शिता को लेकर इतनी आश्वस्त क्यों है। पीठ ने कहा था कि यदि चुनाव आयोग पूरी तरह आश्वस्त है कि चुनाव की पवित्रता को पूरी तरह सुनिश्चित किया जा सकता है तो चुनाव आयोग को अपनी संतुष्टि की वजह शपथपत्र में बतानी होगी। पीठ ने यह भी कहा था कि चुनाव आयोग को यह भी बताना होगा कि क्या सैम्पल सर्वे को बड़े स्तर पर किया जा सकता है।

लेखक जेपी सिंह इलाहाबाद के वरिष्ठ पत्रकार हैं और कानूनी मामलों के जानकार हैं.

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