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सियासत

यदि मैं पत्रकारिता के अपने पुराने पेशे में होता तो मोदीजी से इंटरव्यू लेते वक्त ये सवाल करता…

मैंने मोदी जी के इस चुनाव के दौरान दिए गए बहुत से इंटरव्यू का विश्लेषण किया. मुझे लगता है चुनावी ब्रांडिंग और मार्केटिंग के शोर में मीडिया बहुत सारे महत्वपूर्ण सवाल करना चूक गया है. अगर मैं अपने पुराने पेशे में होता तो जनता से सीधे-सीधे जुड़े कुछ मूलभूत सवाल उनसे जरूर पूछता. जैसे-

1- रोजगार को लेकर आप बोलते हैं कि सरकार के पास डाटा नहीं है तो इन पाँच सालों में सरकार ने इसके लिए कोई विशेष प्रयास क्यों नहीं किया और स्टार्टअप इंडिया के 10 हजार करोड़ के फण्ड का केवल 19℅ इस्तेमाल ही क्यों किया गया है. मेक इन इंडिया के तहत केवल 1 प्रतिशत रोजगार सृजन हुआ है. क्या आप इसे दोनो योजनाओं की असफलता नहीं मानते हैं?

2- इन पाँच सालों में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए अपने पाँच मुख्य कार्य को विस्तार से बतायें. जीडीपी का कितना हिस्सा शिक्षा पर व्यय किया. शिक्षा का व्यापारीकरण रोकने के लिए आपने अब तक क्या किया है?

3- आपकी सरकार होने के बाद भी सरकारी स्वास्थ सेवाओं की इतनी बुरी हालत क्यों है. आयुष्मान योजना को लाने में आपकी सरकार ने इतनी देर क्यों कर दी. क्या कारण हैं कि निजी अस्पताल अब भी इसमें शामिल नहीं हो रहे हैं?

4- इन पाँच सालों में एक भी चुनाव सुधार कानून क्यों पास नहीं हुआ है. चुनाव फंडिंग की पारदर्शिता के लिए चुनावी बॉन्ड जैसे अपारदर्शी व्यवस्था का क्या औचित्य है. आपको नहीं लगता चुनाव में धन बल का प्रयोग बढ़ गया है. आप चुनाव सुधार को लेकर इतना मुखर क्यों नहीं हैं?

5- देश मे आज भी सरकारी स्तर पर बहुत बड़े पैमाने पर करप्शन है. आपने लोकपाल को लाने में पूरे साढ़े चार वर्ष क्यों लगा दिए. आपकी सरकार जीरो टॉलरेंस की बात करती है लेकिन पूरे देश में करप्शन के मामले में केवल 1 प्रतिशत लोगों को सजा क्यों होती है?

6- आप नोटबंदी को सफल मानते हैं या असफल. अगर सफल मानते हैं तो आपकी सरकार इस पर श्वेत पत्र क्यों नहीं लाती है ताकि लोगों को सच्चाई पता चल सके.

7- जीएसटी जैसे बड़े कर सुधार को इतने हल्के और गैर नियोजित ढंग से क्यों लागू किया गया है. क्या आप मानते हैं नोटबंदी और जीएसटी के कारण भारत में बड़े पैमाने बेरोजगारी बढ़ी है. यदि नहीं तो यह सबसे बड़ा मुद्दा क्यों है?

8-आप कहते हैं महंगाई कोई मुद्दा नहीं है लेकिन लोगों को आज भी वस्तुएं रिटेल में ज्यादा भाव में क्यों मिल रही हैं. आपने एक महँगाई फण्ड बनाने का वादा किया था. क्या आप बता सकते हैं उसका अभी का क्या स्टेटस है?

9- आपने बोला था कि आप किसानों और उपभोक्ता के बीच मिडिलमैन को खत्म कर देंगे. लेकिन आपकी सरकार के आंकड़े कह रहे हैं कि यह संख्या बढ़ गई है. कृषि उत्पादों के लिए आपने एक समग्र नीति क्यों नहीं बनाई है. क्या केवल 2000 रु साल बाँटने से उनकी समस्या का हल निकल आएगा?

नोट : इस इंटरव्यू में राममंदिर, धारा 370 और पाकिस्तान को लेकर कोई सवाल नहीं किया गया क्योंकि पिछले 30 सालों से यह बीजेपी के घोषणापत्र में है और मेरी तरह हर नागरिक जानता है कि अगले 30 साल तक भी यह घोषणा पत्र में ही रहेंगे.

लेखक अपूर्व भारद्वाज पत्रकार रहे हैं. इन दिनों खुद की साफ्टवेयर कंसल्टेंसी के जरिए डिजिटल प्रोजेक्ट्स पर काम करते हैं.

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1 Comment

1 Comment

  1. Shivam Pandey

    August 22, 2019 at 8:03 pm

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