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बिना नोटिफिकेशन चंडीगढ़ बना हुआ है पंजाब-हरियाणा की राजधानी, हाईकोर्ट ने सुबूत मांगा

लगभग 53 वर्षों बाद पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सवाल उठा है कि चंडीगढ़ किसकी राजधानी है? पंजाब और हरियाणा राज्यों की सरकारों से हाईकोर्ट ने कहा है कि चंडीगढ़ अगर उनकी राजधानी है तो इसका एक कागजी सबूत दें। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में पहुंची एक याचिका ने हरियाणा व पंजाब की राजधानी चंडीगढ़ होने पर ही सवालिया निशान लगा दिया है। मामले की गंभीरता देखते हुए हाईकोर्ट को दोनों राज्यों के एडवोकेट जनरल को बुलाना पड़ा। अब दोनों को कोर्ट ने चंडीगढ़ राजधानी होने से जुड़ी नोटिफिकेशन सौंपने के आदेश दिए हैं।पंजाब रिऑर्गनाइजेशन एक्ट में लिखा गया है कि चंडीगढ़ पंजाब और हरियाणा की राजधानी है, लेकिन इसे राजधानी के तौर पर स्थापित करने वाला कोई नोटिफिकेशन सम्भवतः जारी नहीं हुआ है।

गौरतलब है कि एक नवंबर 1966 को पंजाब के हिन्दी-भाषी पूर्वी भाग को काटकर हरियाणा राज्य का गठन किया गया, जबकि पंजाबी-भाषी पश्चिमी भाग को वर्तमान पंजाब ही रहने दिया था। चंडीगढ़ शहर दोनों के बीच सीमा पर स्थित था, जिसे दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी के रूप में घोषित किया गया और साथ ही संघ शासित क्षेत्र भी घोषित किया गया था। 1952 से 1966 तक ये शहर मात्र पंजाब की राजधानी रहा था। पंजाब के राज्यपाल ही चण्डीगढ़ के प्रशासक होते हैं।

ब्रिटिश भारत के विभाजन उपरांत 1947 में पंजाब राज्य को भारत और पाकिस्तान में दो भागों में बाँट दिया गया था। इसके साथ ही राज्य की पुरानी राजधानी लाहौर पाकिस्तान के भाग में चली गयी थी। अब भारतीय पंजाब को एक नयी राजधानी की आवश्यकता पड़ी। पूर्व स्थित शहरों को राजधानी बदलने में आने वाली बहुत सी कठिनाईयों के फलस्वरूप एक नये योजनाबद्ध राजधानी शहर की स्थापना का निश्चय किया गया तथा 1952 में इस शहर की नींव रखी गई।

अगस्त १९८५ में तत्कालीन प्रधान मंत्री राजीव गांधी और अकाली दल के संत हरचंद सिंह लोंगोवाल के बीच हुए समझौते के अनुसार, चंडीगढ़ को 1986 पंजाब में स्थानांतरित होना तय हुआ था। इसके साथ ही हरियाणा के लिए एक नयी राजधानी का सृजन भी होना था, किन्तु कुछ प्रशासनिक कारणों के चलते इस स्थानांतरण में विलंब हुआ। इस विलंब के मुख्य कारणों में दक्षिणी पंजाब के कुछ हिन्दी-भाषी गाँवों को हरियाणा और पश्चिम हरियाणा के पंजाबी-भाषी गाँवों को पंजाब को देने का विवाद था।

वकील फूल चंद की याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राजधानी चंडीगढ़ को लेकर पंजाब की अमरिंदर सरकार और हरियाणा की खट्टर सरकार से कहा कि चंडीगढ़ अगर राजधानी थी, तो इसका एक कागजी सबूत दें। याची का कहना है कि चंडीगढ़ में हरियाणा और पंजाब के कर्मचारियों का कोटा निर्धारित है और डेपुटेशन पर आने वालों को भी निश्चित अनुपात में स्थान दिया जाता है। लेकिन चंडीगढ़ के निवासियों को न तो हरियाणा में और न ही पंजाब में आरक्षण का लाभ दिया जाता है।याची ने कहा कि चंडीगढ़ में जिला जजों की नियुक्तियां नहीं होती हैं क्योंकि शहर का खुद का कोई काडर नहीं है। हरियाणा और पंजाब से जजों को डेपुटेशन पर लाया जाता है। ऐसे में चंडीगढ़ का होने के कारण वह न तो शहर में और न ही पंजाब व हरियाणा में आरक्षण का लाभ ले सकता है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने दोनों राज्यों के एडवोकेट जनरल को बुला लिया। आदेश के अनुरूप दोनों हाईकोर्ट में पेश हुए। बहस के दौरान हाईकोर्ट ने पूछा कि क्या कोई ऐसा नोटिफिकेशन है जिसमें चंडीगढ़ को दोनों राज्यों की राजधानी बनाने का दर्जा दिया गया हो। अगर ऐसा नोटिफिकेशन है तो उसे पेश किया जाए। अब अगली सुनवाई पर इस बारे में दोनों को अपना पक्ष रखना होगा।

यह मामला जिला जजों से जुड़ा होने के कारण इस केस में हाईकोर्ट भी प्रतिवादी है। हाईकोर्ट के वकील ने सुनवाई के दौरान खंडपीठ को बताया कि पंजाब रिऑर्गनाइजेशन एक्ट में लिखा गया है कि चंडीगढ़ पंजाब और हरियाणा की राजधानी है, लेकिन इसे राजधानी के तौर पर स्थापित करने वाला कोई नोटिफिकेशन उनकी जानकारी में नहीं है।

याची के अनुसारचंडीगढ़ के निवासियों को न तो हरियाणा और न ही पंजाब में आरक्षण का लाभ नहीं दिया जाता। याची ने कहा कि चंडीगढ़ में जिला जजों की नियुक्तियां नहीं होती,क्योंकि शहर का खुद का कोई काडर नहीं है। ऐसे में हरियाणा और पंजाब से जजों को डेपुटेशन पर लाया जाता है।याची के अनुसार वह चंडीगढ़ शहर में आरक्षण का लाभ हासिल करने का पात्र है, लेकिन चाहकर भी इसका लाभ नहीं ले सकता। दरअसल हरियाणा और पंजाब की राजधानी का मसला अब हाईकोर्ट में पहुंच गया है। दोनों राज्यों की राजधानी चंडीगढ़ है और कोई भी राज्य इस पर अपना हक नहीं छोड़ना चाहता।

कानूनी मामलों के जानकार और वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट.

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