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उत्तर प्रदेश

बेलगाम हुई योगी की पुलिस, वाराणसी में छायाकार पर दमनात्मक कार्यवाही

वाराणसी। आईपीएस खेमे में हुए वर्चस्व की लड़ाई को लेकर एसएसपी नोएडा के इशारे पर हुई दमनात्मक कार्यवाही के बाद वाराणसी पुलिस इन दिनों जमीन छोड़ दी है। वाराणसी पुलिस भी अपनी छवि बचाने के लिए अब पत्रकारों को ही निशाना बनाने लगी है। राज्य की लगाम योगी आदित्यनाथ के हाथ जैसे ही आई तब से पुलिस के मनोबल इतने बढ़े की वह अब सरकार की छवि को खराब करने की दिशा में आगे बढ़ गई है। अब सवाल यह है कि क्या पत्रकारों को पुलिस से पूछकर लिखना या फोटो खिंचना पड़ेगा?

बनारस के प्रेस छायाकार विजय कुमार गुप्ता उर्फ बच्चा ने कुछ दिनों पहले एक तस्वीर और वीडियो वायरल की थी जिसमे कुछ बच्चे दशाश्वमेघ घाट स्थित जल पुलिस चौकी की बाढ़ का पानी कम होने के बाद सफाई कर रहे थे। बच्चों ने आरोप लगाया कि पुलिस अंकल ने सफाई करने को कहा और उसके एवज में कुछ पैसे का लालच दिया।

वीडियो और फोटो वायरल होने के बाद अख़बारों ने छापा और पुलिस की थू-थू होने लगी। एसएसपी ने बचाव में सीओ दशाश्वमेघ को जाँच के आदेश दिए और मंगलवार सुबह बच्चा गुप्ता को थाना दशाश्वमेघ बुलाया। जैसे ही बच्चा थाने पहुंचा, पुलिस पुलिसिया रुआब गांठने लगी और कैमरा मोबाइल रखवा लिया। खबर मिलते ही काशी पत्रकार संघ के अध्यक्ष सहित दर्जनों पत्रकार पहुंचे तो बुलाने वाला दरोगा फरार हो गया।

हालांकि पुलिस ने छायाकार बच्चा के विरुद्ध थाना दशाश्वमेघ में धारा 374, 420 और बालश्रम अधिनियम 1986 की धारा 14(3)(b) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया। पत्रकारों के दबाब पर दशाश्वमेघ पुलिस ने पत्रकार से भी तहरीर तो ले ली मगर मुकदमा पंजीकृत नही किया। अब सवाल यह की आखिर पुलिस जांच पर भरोसा क्यों हो!

पहले मन में सवाल उठा की जब आरोप पुलिस पर हो तो रिपोर्ट उसी सर्कल अफसर की कितनी निष्पक्ष होगी जनता जानती है। दूसरा सवाल यह उठा की एफआईआर में बच्चों के बयान का हवाला दिया गया है कि छायाकार पत्रकार के उकसाने पर बच्चे सफाई कर रहे थे तो यह भी हो सकता है कि पुलिस अपनी छवि बचाने के लिए बच्चों और उनके अभिभावकों को भय दिखाई हो?

पुलिस जांच का इस मामले में निष्पक्षता नहीं झलकती। होना तो यह चाहिए मजिस्ट्रेटियल जाँच कराई जाए। ऐसा नहीं की यह कोई पहला मामला है। पुलिस पहले भी सुर्ख़ियों में रही है। पुलिस को पीड़ित पत्रकार की तहरीर पर भी मुकदमा दर्ज करना होगा और इसकी निष्पक्ष जांच किसी मजिस्ट्रेट से करानी होगी।

बनारस से युवा पत्रकार अवनिन्द्र कुमार सिंह की रिपोर्ट.

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