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हिंदुस्तान बनारस में भी छंटनी शुरू, तरह-तरह से प्रताड़ित किए जा रहे पत्रकार

कमलेश चतुर्वेदी हिन्दुस्तान के वाराणसी संस्करण में वर्ष 2005 से कार्यरत हैं. लम्बे इंतजार के बाद वर्ष 2011 में इन्हें स्टाफ रिपोर्टर बनाया गया. छह माह पहले कमलेश काशी पत्रकार संघ के उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए. इसी के बाद से हिंदुस्तान प्रबंधन ने इन्हें नौकरी से हटाने का प्रयास करना शुरू कर दिया. पिछले डेढ़ माह से रेटिंग कम होने का बहाना बनाकर इन्हें परेशान किया गया. रेटिंग भी उस स्थानीय सम्पादक योगेश राणा की दी बताई गई जिसकी रेटिंग कम्पनी की निगाह में खुद अच्छी नहीं रही. इसीलिए राणा को कम्पनी ने यहां से हटाने के बाद सीधे बाहर का रास्ता दिखा दिया. एचआर मैनेजर और नये स्थानीय सम्पादक अक्सर कमरे में बुलाकर इस्तीफा देने का दबाव बनाने लगे.

15 दिन पहले बेज बोर्ड वाले पेजीनेटर सुनील श्रीवास्तव और अनुराग पांडेय से जबरी इस्तीफा ले लिया गया. इसके बाद एक और रेगुलर कर्मचारी से इस्तीफा लिखवाकर स्ट्रिंगर के कागजात पर दस्तखत करा लिए गए. इसके बाद 22 अगस्त को एचआर व स्थानीय सम्पादक ने मुझे कमरे में बुलाकर दो माह की सेलरी लेकर इस्तीफे की पेशकश की जिसे मैने अस्वीकार कर दिया. इसके बाद फिर परेशान किया जाने लगा तो कमलेश चिकित्सकीय अवकाश पर चले गए.

29 अगस्त को कमलेश के घर स्पीड पोस्ट से पत्र भेजकर बिना सूचना अनुपस्थित रहने की नोटिस भेज दी गई. एक दिन पहले 28 अगस्त को वार्ता के लिए एचआर के बुलावे पर कमलेश बीमारी की अवस्था में हिन्दुस्तान कार्यालय जगतगंज पहुंचे. तब उनकी एचआर से बात हुई. यह दृश्य वहां के सीसीटीवी मे दर्ज होगा. एचआर ने उन्हें फिर कहा कि जो मिल रहा है उसे लेकर इस्तीफा दे दीजिए. इस प्रस्ताव को कमलेश ने दोबारा ठुकरा दिया. कमलेश ने ऐलान कर दिया है कि वह सक्षम न्यायालय में अपने हक की मांग करेंगे. कमलेश श्रमायुक्त कार्यालय में अधिवक्ता अजय मुखर्जी के जरिए प्रार्थना पत्र दे आए हैं और प्रबंधन को स्पीड पोस्ट के जरिए गैरहाजिर होने से सम्बंधित पत्र का जवाब भेज दिया है.

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