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हाईकोर्ट ने भास्कर से कहा- स्टे चाहिए तो मजीठिया वेज का 50 फीसदी जमा कराओ, तब करेंगे विचार

औरंगाबाद। दैनिक दिव्य मराठी (भास्कर ग्रुप) को दिनेश परदेशी और सुधीर जगदाले के मामले में तगड़ा झटका लगा है। डीबी कॉर्प इन दोनों के मामले में स्‍टे लेने के लिए हाईकोर्ट गया था। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्‍पष्‍ट कहा कि कंपनी को स्‍टे चाहिए तो उन्‍हें अवॉर्ड की राशि का 50 फीसदी (लगभग साढ़े चौबीस लाख) जमा करवाना होगा।

भास्‍कर ने 22 अगस्त 2019 को औरंगाबाद हाईकोर्ट में दो याचिकाएं दायर की थी। ये याचिकाएं इसी साल 10 जून को लेबर कोर्ट द्वारा रिव्‍यू पिटीशन पर दिए फैसले के खिलाफ दायर की गई थी। दिनेश परदेशी और सुधीर जगदाले के मामले में दायर इन याचिकाओं पर 23 सितंबर को हाईकोर्ट की एकलपीठ में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान न्‍यायमूर्ति रवींद्र घुगे ने भास्कर के स्टे मांग को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि प्रबंधन पहले अवॉर्ड की राशि का 50 फीसदी रजिस्टार के पास जमा करवाएं, तभी हम हम आगे की सुनवाई जारी रखेंगे और इस पर विचार करेंगे।

मालूम हो कि देशभर में औरगांबाद लेबर कोर्ट से मजीठिया मामले में सबसे पहले 13 अवॉर्ड पारित हुए थे, जोकि करीब पौने तीन करोड़ रुपये के है। औरगांबाद लेबर कोर्ट ने दिनेश परदेशी, सुधीर जगदाले, भास्कर कोडम, संतोष पाईकराव, विजय नवल, देवीदास लांजेवार, धनंजय ब्रह्मपूरकर, अरुण तलेकर, प्रकाश खंडेलोटे, नामदेव गायकवाड, सुरेश बोर्डे, विजय वानखेडे, सूरज जोशी के पक्ष में 4 जनवरी 2019 को अवॉर्ड पारित किए थे। जिसके बाद भास्‍कर ने लेबर कोर्ट में रिव्‍यू पिटिशन दायर की थी। 10 जून 2019 को रिव्‍यू पिटिशन पर सुनवाई करते हुए लेबर कोर्ट ने सभी को खारिज कर दिया था। जिसके बाद सभी 13 लोगों ने हाईकोर्ट में कैविएट लगा दिया था। भास्‍कर ने इनमें से केवल 2 कर्मचारियों दिनेश परदेशी और सुधीर जगदाले के मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। लेबर कोर्ट ने दिनेश परदेशी का 21 लाख और सुधीर जगदाले का 28 लाख का अवॉर्ड पारित किया था।

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