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सुख-दुख

पत्रकारिता व्यवसाय कभी न था पर गंदे लोगों ने इसे भी रेड लाइट एरिया बना दिया!

Anupama Singh : हनीट्रैप मामला भोपाल… किस -किस को धमकी दोगे…..कोई चुप नहीं है … कोई बोल रहा, तो कोई बोल नहीं रहा…. आपकी करतूतें खुल गईं है सबके सामने …. चमड़ी की कमाई जब खाई है…. तो खिसियाट कैसी…. क्या केवल महिलाएं ही दोषी हैं? उन्हें लाने वाले पुरूष पत्रकार, उनका उपयोग करने वाले पुरुष पत्रकार दोषी नहीं? उन्हें पैसों की चकाचौंध दिखाने वाले पुरूष दोषी नहीं है? उन पुरूष पत्रकारों से माइक id छीनने के लिए किसी ने पहल क्यों नहीं की?

किसी ने कभी उस समय क्यों नहीं सोचा कि भोपाल में आखिर ऐसा क्या है, जो दो साल में आते ही लोग घर, गाड़ी और अन्य सुविधाएं जुटा लेते हैं। एक 22 हजार की मामूली नौकरी करने वाली 3-3 गृहस्थियों को कैसे पाल रही है। एक का मिसयूज करने के लिए दूसरे की नौकरी खाना। अरे कब तक किस -किस को धमकी देते फिरोगे।

क्या पत्रकारिता नहीं करेगा तो भूखा मर जायेगा कोई … किसके पुरखे कह गए, पत्रकारिता ही करो। पत्रकारिता व्यवसाय कभी नहीं था पर गन्दे लोगों ने आकर इसे भी रेड लाइट एरिया बना दिया। बस अंतर इतना है उनका जमीर होता है, वो मजबूरी में ये सब करती हैं, वो किसी को ब्लैकमेल नहीं करती, उन बेचारियों को करोड़ो नहीं मिलते। यहाँ चकाचौंध भी, मीडिया का सम्मान भी, बड़े – बड़े नेताओं, मंत्रियों, अधिकारियों से सम्बंध भी… सम्मानीय भी…. गजब की तरक्की है, भाई। जय हो!

भोपाल की टीवी पत्रकार अनुपमा सिंह की एफबी वॉल से.

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12 Comments

12 Comments

  1. Abhishek Chhajlani

    September 26, 2019 at 3:38 pm

    कुछ गंदी मछलियाँ पूरे तालाब को गंदा कर देती है कैलाश विजयवर्गीय ज़ी ने कहा भी है कि पाँच पत्रकारों कि मिलीभगत थी पूरे मामले में यह पत्रकार भोपाल में दलाली खा रहे थे कमलनाथ सरकार ने संजीव शमी जैसे अधिकारी को जाँच सौंपी है दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा|

  2. Mahendra singh Chouhan

    September 26, 2019 at 3:43 pm

    घटिया लोग आ गए है पत्रकारिता में इनको लात मारकर भगाना चाहिए इनके नामों का ख़ुलासा हो ब्रजैश जैन कि पोस्ट भी हटाई दी गई है । बहन अनुपमा हक़ीक़त बया की हैं

  3. Kashyap sinha

    September 26, 2019 at 4:39 pm

    अनुपमा जी ने माडिया के लोगों कि हक़ीक़त बताई वे बता रही हैं कि किस तरह से महिलाओं का दुरुपयोग होता है ऐसा करने वालों को पकड़ कर जूते मारों

  4. shanker bhai

    September 26, 2019 at 4:43 pm

    भ्रस्ट पत्रकारों को कार और बंगले किसने दिए इनके धंधे कौन से है कंहा से आए इतने रुपए दीदी अनुपमा आपने बहुत सही लिखा है इनसे जुड़े हुए हर व्यक्ती कि जाँच होनी चाहिये और सवाल यह है कि देश के प्रतिष्ठित संस्थान ऐसे गंदे लोगो को क्यों झेल रहे है।

  5. R.K. Singh

    September 26, 2019 at 4:48 pm

    अनुपमा ज़ी ने जिसके बारे में लिखा है उनके आका की भी जाँच होनी चाहिए क्योंकि वे पाक साफ़ बनकर पिछले कई सालों से मलाई खा रहे है दिल्ली बैठकर । आका को पकड़कर पूंछतांछ होगी तो बड़े ख़ुलासे हो जाँएगे।

  6. abhimanyu jain

    September 26, 2019 at 4:51 pm

    भ्रस्ट पत्रकारों को कार और बंगले किसने दिए इनके धंधे कौन से है कंहा से आए इतने रुपए दीदी अनुपमा आपने बहुत सही लिखा है इनसे जुड़े हुए हर व्यक्ती कि जाँच होनी चाहिये और सवाल यह है कि देश के प्रतिष्ठित संस्थान ऐसे गंदे लोगो को क्यों झेल रहे है।

  7. Ramesh Khatri

    September 26, 2019 at 5:12 pm

    भोपाल में करोड़ों कमाने वाले पत्रकारों कि संपत्ति राजशात हो जानकारी ली जाए कि कंहा से लाए यह पैसे
    इनके आकाओं से लेकर प्यादों से भी पूंछतांछ होना चाहिए प्याज़ के छिलके निकलेंगे तो सच्चाई सामने आ जाएगी

  8. Sudhanshu

    September 26, 2019 at 9:18 pm

    badi he sharmnaak baat hai ki iss taraf ke shabdo ka upyog kiya ja raha hai. in bhaiya ji ko jara police ke 4-6 kantaap lagna chahiye wo bhi sabke samne.

  9. Ranjan Jha

    September 26, 2019 at 9:46 pm

    अनुपमा ने लगता है की जहाँ काम करती है वहीं के शर्मा बंधुओ के बारे में लिखा है। भोपाल में आज कल पूरा मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है । पत्रकारिता की गंदगी का खुलासा किया है।

  10. Dharmesh kushwah

    September 27, 2019 at 9:53 am

    कुछ गन्दे लोगों ने पत्रकारिता में माहौल खराब कर रखा है, इनका कुछ होना चाइए……

  11. Dharmesh kushwah

    September 27, 2019 at 11:30 am

    अनुपमा जी ने माडिया के लोगों कि हक़ीक़त बताई … हम आपकी बात से सहमत है.

  12. Dharmesh kushwah

    September 27, 2019 at 11:35 am

    अनुपमा जी ने माडिया के लोगों कि हक़ीक़त बताई है, कुछ गन्दे लोगों ने पत्रकारिता में माहौल खराब कर रखा है, इनका कुछ होना चाइए……अनुपमा जी हम आपकी बात से सहमत है.

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