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फूलन देवी वाले बेहमई नरसंहार कांड पर 40 वर्षों बाद फैसला सोमवार को

अजय कुमार

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के छोटे से गांव में दलित जाति में पैदा हुयीं फूलन देवी को बेहमई गांव के राजपूतों ने एक कमरे में बंद कर तीन सप्ताह तक मारा-पीटा और बलात्कार कर उन्हें गांव में नंगा घुमाया. इस तीन सप्ताह में फूलन कैद से भागने में सफल हो गईं.

भागने कई महीने बाद 14 फरवरी 1981 को फूलन देवी दस्यु बनीं. अपने गिरोह के साथ 21 लोगों को बेहमई में मौत के घाट उतारा. इसी को लेकर कोर्ट का फैसला अब आ रहा है.

दस्यु सुंदरी फूलन देवी द्वारा 20 लोगों की निर्मम हत्या के कारण चर्चा में आए बेहमई कांड पर 6 जनवरी 2020 को फैसला आने की संभावना है. 14 फरवरी 1981 को हुए नरसंहार मामले की सुनवाई बीते दिनों कानपुर देहात जिले की स्पेशल जज (डकैत प्रभावित क्षेत्र) में पूरी हो गई.

सरकारी वकील राजू पोरवाल के अनुसार, 2011 से शुरू हुए ट्रायल में पांच आरोपित थे. फूलन देवी की 2001 में दिल्ली में हत्या कर दी गई. आरोप है कि कानपुर देहात जिले में यमुना के बीहड़ में बसे बेहमई गांव में दस्यु सुंदरी फूलन देवी ने अपने गैंग के कई अन्य डकैतों के साथ 20 लोगों की हत्या कर दी थी. इसमें बेहमई गांव के राजपूत बिरादरी से संबंध रखने वाले 17 लोग थे.

कहा जाता है कि फूलन ने लालाराम और श्रीराम से अपने शोषण का बदला लेने के लिए नरसंहार किया था. इस नरसंहार ने देश-दुनिया में तहलका मचा दिया था. पुलिस ने डकैतों के खिलाफ अभियान चलाया. कई डकैतों की मुठभेड़ में मौत हो गई. कुछ ने प्राकृतिक तौर पर दम तोड़ दिया. पुलिस ने नरसंहार की एफआईआर में फूलन देवी, रामऔतार, मुस्तकीम, लल्लू गैंग और 35-36 अन्य डकैतों का आरोपित बनाया.

नरसंहार के दो साल बाद फूलन ने मध्य प्रदेश में आत्मसमर्पण कर दिया. इसके बाद वहां की जेलों में कई साल गुजारे. 90 के दशक में फूलन ने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया और समाजवादी पार्टी के टिकट पर दो बार सांसद बनीं. 2001 में दिल्ली में फूलन की हत्या कर दी गई.

लंबी कवायद के बाद 2011 में कानपुर देहात की विशेष अदालत में राम सिंह, भीखा, पोसा, विश्वनाथ उर्फ पुतानी और श्यामबाबू के खिलाफ आरोप तय हुए और ट्रायल शुरू हुआ. राम सिंह की जेल में मृत्यु हो गई. फिलहाल पोसा ही जेल में है. केस में 15 लोगों की गवाही हुई. फूलन और कई अन्य की मौत हो जाने के बाद उनका नाम केस से बाहर कर दिया गया. नरसंहार के आरोपित तीन डकैत रामकेश, विश्वनाथ और मान सिंह लगातार फरार हैं. कोर्ट के आदेश पर इनकी संपत्ति कुर्क की जा चुकी है. इनके खिलाफ कोर्ट ने स्थायी तौर पर गैर जमानती वॉरंट जारी कर रखा है.

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