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सारे बड़े केसों की जांच सीबीआई की बजाय समाचार चैनलों को दे दी जाए!

-जगदीश वर्मा ‘समंदर’

आने वाले समय में हो सकता है लोग बड़े केसों की जांच को सीबीआई को देने की बजाय समाचार चैनलों को देने की गुहार लगाएं… सुशांत मामले में चल रहे मीडिया ट्रायल, में चैनल खुद एक दूसरे से लड़ने की मुद्रा में अा गए हैं….

रिपब्लिक तो सीबीआई अधिकारियों से आगे की जांच करके रोज सामने ले आता है। चीख पुकार करके इसी रिपब्लिक ने आज तक को नंबर वन की कुर्सी से धक्का देकर गिरा दिया…. अब उसे मंजूर नहीं कि कोई दूसरा चैनल इस केस को अपने हाथ में ले। रिपब्लिक ने मान लिया है कि वही इस मिस्ट्री को सुलझा सकता है, ऐसे में सीबीआई की भी जरूरत नहीं रह गई है।

जांच को सीबीआई के हवाले करवाने का जश्न चैनल पहले ही मना चुका है, अब इसे सुलझाकर नया कीर्तिमान बनाने पर ध्यान है। उधर सालों से नंबर 1 पर बैठे आज तक को यकीन नहीं हो रहा कि आम जनता और राजनीति से अलग भी कोई मुद्दा ऐसा हो सकता है कि जिस पर स्तरहीन भाषा, उत्तेजक संवाद, और सड़क छाप स्टोरी के सहारे भारतीय मीडिया की नंबर वन कुर्सी पाई जा सकती है। सो वह भी सुशांत पर ही काम कर रहा है, अब सुशांत का कॉपी राईट रिपब्लिक ने ले लिया है तो आज तक ने रिया को तसल्ली से बिठा कर इंटरव्यू किया है, ताकि कुछ हटकर अलग हो। एक्सक्लूसिव की जगह एक्सप्लोसिव किया है, माने विस्फोटक। लेकिन यहां भी उल्टा हो गया, 2014 के बाद जन्मे  ट्रोलर आर्मी गैंग ने आज तक की वाट लगा दी।

आज तक को ट्रोल किया जा रहा है यह कहकर कि रिया का पेड इंटरव्यू पी आर एजेंसी ने फिक्स किया है, उसे बचाने के लिए। इस पर रिपब्लिक का भारत सुबह से लगातार पूछ रहा है कि तक ने रिया को बचाने का काम क्यों किया है, यह मोदी जी वाली 130 करोड़ जनता का अपमान है।

दोनों चैनल सीधे लड़ रहे हैं, सुशांत को न्याय दिलाना है, और टीआरपी भी लानी है….. सीबीआई वालों का काम कितना आसान कर दिया है। उधर आम जनता परेशान हैं कि उसके रोने को कोन दिखाएगा। महंगाई, बेरोजगारी, हताशा और अनिश्चित भविष्य की चिंता जताते सवाल यहां वहां खड़े हैं, कि कोई उन्हें भी मंच दे दे…लेकिन हाई प्रोफ़ाइल से फुर्सत मिले, तब कुछ हो।

भारतीय मीडिया को यह क्या हो गया है, बीते कुछ सालों में, क्यूं खुद का सम्मान समाप्त करने पर तुला है। जाने कितने ऐसे मामले हैं, जिन पर साधारण पुलिस जांच भी नहीं हो पा रही, बेगुनाह सलाखों के पीछे हैं, न्याय मांगते पीड़ित आत्म हत्या करते हैं, फिर भी फाइलों से धूल नहीं हट रही…. इनकी आवाज कोन बनेगा।

लोकतंत्र के चारों खंभे होते हुए भी वे न्याय की उम्मीद खो चुके हैं….सोचिए, ऐसे लोग अगर चैनलों की ये चिल्लम चिल्ली कितनी देर देखते होंगे… सुशांत मामले में जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं, नतीजा सामने आयेगा। देश में बाकी समस्याएं भी अपने लिए ध्यान चाहती हैं। कृपया उन पर भी ध्यान दें प्रभु।

– जगदीश वर्मा ‘समंदर’

मथुरा

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