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सियासत

VPA कानून के तहत प्रापर्टी हड़पने के लिए राजनीतिक पार्टियां खुद कराती हैं हिंदुओं पर हमला!

Deepak Pandey-

हमने आपको कई मौकों पर याद दिलाया है किसी को उसके मूल स्थान से भगाए जाने का मूल कारण उसकी संपत्ति का हड़प करना भी होता है.. धार्मिक कारण तो फिलहाल है ही.. अभी अफगान से एक सिख भाई साब लौटे हैं, जो वहां सांसद थे, करोड़ो अरबो की प्रॉपर्टी थी, लेकिन अब कंगाल हैं.. और उनकी संपत्ति पर किसका अधिकार होगा.. यह समझाना कोई रॉकेट साइंस नहीं है.. यह केवल एक उदाहरण भर है.. ऐसे एक नहीं लाखों मामले हैं और इसे समझने के लिए अफगान, पाकिस्तान, बांग्लादेश व कश्मीर में 1947 या 1971 में अल्पसंख्यको की संख्या प्रतिशत और अब की संख्या प्रतिशत को रखकर समझा जा सकता है.

हमने यह भी बताया है कि बंग्लादेश में वेस्टेड प्रॉपर्टी एक्ट (वीपीए) है, जो हिन्दुओं, इसाइयों और बौधों को मारकर-भगाकर उनकी संपत्ति लूटने के लिए एक प्रोत्साहक का काम कर रहा है.

पाकिस्तान के बाद बांग्लादेश दुनिया का ऐसा देश है, जहां अल्पसंख्यकों को मारना-खदेड़ देना फायदे का सौदा होता है.

वेस्टेड प्रॉपर्टी एक्ट’ (वीपीए) कानून के तहत बांग्लादेश सरकार को यह अधिकार है कि वह उनकी संपत्ति को मामूली से मामूली बहाने पर भी ‘वेस्टेड प्रॉपर्टी’ घोषित कर सकती है और फिर इसे वहां के बहुसंख्यकों को वितरित कर सकती है.

उनके भागने (मूलरूप से भगाने) के बाद होता यह है कि संपत्ति का मालिक अब बांग्लादेश में नहीं रहता है.. इसलिए वह प्रापर्टी वहां बहुसंख्यकों को वितरित कर दी जाती है.

यह कानून वहां एक उद्योग भी बन चुका है जिसके तहत उनकी भूमि और मकान को जब्त करके हमला किया जाता है. यह कानून जातीय सफाए में लगे अपराधियों को संरक्षण देने और उन्हें राजनीतिक- आर्थिक तौर पर पुरस्कृत करने का एक जबरदस्त स्रोत है और खुद बांग्लादेश की सरकार इस जातीय सफाए में शामिल नहीं है.

वीपीए से सभी दलों को लाभ हुआ है और किसको लूट का कितना माल मिलेगा, यह इससे निर्धारित होता है कि किसकी राजनीतिक शक्ति कितनी है. इसमें कोई विचारधारा या सिद्धांत आड़े नहीं आता.

जब बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी सत्ता में थी, तो उसके गुंडों को वीपीए की 45 प्रतिशत लूट हासिल हुई. जब अवामी लीग (पीएम शेख हसीना की पार्टी) सत्ता में आई, तो उसके गुंडों को 44 प्रतिशत माल प्राप्त हुआ. जमात-ए-इस्लामी का हिस्सा ‘फिक्स्ड’ है, जो पांच से आठ प्रतिशत के बीच रहता है, चाहे सरकार किसी की भी हो.

भारत की वर्तमान सरकार को गांधीवाद की पिपिहरी बजाने से फिलहाल परहेज करके इंदिरा गांधी मॉड में आने की जरूरत है.. क्योंकि तथाकथित गांधीवाद बटवारे के अलावा और कुछ नहीं कर सकता.. कल पाकिस्तान था.. आज पश्चिम बंगाल, कल बिहार और परसों यूपी भी हो सकता है. इसलिए जरूरत है.. बांग्लादेश के कुछ हिस्सों को काटकर वहां के अल्पसंख्यको के लिए एक नया देश बसाने की जिसका नाम –मूल बांग्ला हो.

दीपक पाण्डेय

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