Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

सुख-दुख

ऐसी दुर्लभ प्रजाति अब पत्रकारिता में शायद ही हम देख पाएं!

अविनाश दास-

जुगनू शारदेय जी से मेरी पहली मुलाक़ात पटना में हुई थी। उस वक़्त तक पटना मैं छोड़ चुका था और किसी यात्रा में वह टकरा गये थे। नीतीश कुमार की सरकार थी और सरकार के कामकाज की तीखी आलोचना से भरे हुए नज़र आये। एक साथी थे, जिन्होंने तंज भी कसा कि आप तो उनके ही फ़्लैट में रहते हैं और उनका ही विरोध करते हैं। उन्होंने दो टूक जवाब दिया था कि मुझे एक छत देकर उसने मेरी ज़मीर थोड़े ही ख़रीद ली है!

बाद में जुगनू जी से अच्छी-ख़ासी मित्रता हो गयी और अतिरिक्त इज़्ज़त देने पर अक्सर वो इज़्ज़त उतारते हुए नज़र आये। उन्हें गवारा नहीं था कि उन्हें उम्रदराज़ माना जाए। मुंबई में कुछ दिन मेरे पास रहे, जब मैं मढ़ गांव में अपने दोस्त रामकुमार के साथ दो कमरों के एक घर में रहता था।

मुझसे खिचड़ी बनवाते थे और थाली में ऊपर से सरसों का कच्चा तेल डलवाते थे। मुंबई से उनके लौटने के बाद उनसे एकाध बार फ़ोन पर बात हुई, लेकिन पिछले कुछ सालों से हम एक दूसरे के संपर्क में नहीं थे। उनके बीमार होने और वृद्धाश्रम में अंतिम वक़्त गुज़ारने की सूचना मिलती रही। मुझे अफ़सोस है कि मैं इस उत्तर-जीवन में उनके कोई काम नहीं आ पाया।

वह साहसी पत्रकार थे और उन्होंने अंतिम समय तक अपनी रीढ़ सीधी रखी। ऐसी दुर्लभ प्रजाति अब पत्रकारिता में शायद ही हम देख पाएं। जुगनू शारदेय को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि।

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन