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हरीश रावत के साथ पत्रकार उमेश कुमार भी आ सकते हैं सीबीआई जांच के घेरे में!

देहरादून । हार्स ट्रेडिंग के आरोपों के साथ सामने आए स्टिंग आपरेशन के बीच लगे राष्ट्रपति शासन का मामला मंगलवार को ही सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुका है। पीआईएल के जरिये सुप्रीम कोर्ट से इस पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग याचिकाकर्ता वकील एलएम शर्मा द्वारा की गई है। याचिका की गंभीरता को इसलिए भी समझा जा सकता है कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए न केवल यह याचिका स्वीकार हो चुकी है बल्कि तीन जजों की खंडपीठ अगले सप्ताह इस याचिका पर सुनवाई करने वाली है।

देहरादून । हार्स ट्रेडिंग के आरोपों के साथ सामने आए स्टिंग आपरेशन के बीच लगे राष्ट्रपति शासन का मामला मंगलवार को ही सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुका है। पीआईएल के जरिये सुप्रीम कोर्ट से इस पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग याचिकाकर्ता वकील एलएम शर्मा द्वारा की गई है। याचिका की गंभीरता को इसलिए भी समझा जा सकता है कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए न केवल यह याचिका स्वीकार हो चुकी है बल्कि तीन जजों की खंडपीठ अगले सप्ताह इस याचिका पर सुनवाई करने वाली है।

मंगलवार को ही नैनीताल हाईकोर्ट से 31 मार्च को आए फैसले के बाद जिस तरह कानूनी दांव पेंच लम्बा चलने वाले हैं, वहीं सीबीआई जांच की मांग का मामला इस पूरे केस में अहम होने वाला है। अगर इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सीबीआई जांच के आदेश करता है तो इससे न केवल हरीश रावत की मुश्किलें बढ़ सकती हैं बल्कि स्टिंग करने वाले पत्रकार उमेश कुमार भी इसके घेरे में आ सकते हैं। हरीश रावत को जहां विधायकों की खरीद फरोख्त के आरोपों का सामना करना पड़ेगा, वहीं समाचार प्लस चैनल के मुखिया उमेश कुमार को पत्रकारीय सिद्धांतों के विपरीत स्टिंग की सीडी अपने चैनल पर चलाने के बजाय हरीश विरोधी बागी नेताओं के हवाले करने को लेकर आरोपों का सामना करना पड़ेगा।

बागी विधायकों को देहरादून से अपने साथ हवाई जहाज से रातोंरात दिल्ली ले जाने को लेकर भाजपा नेता भी इस जांच के दायरे में आएंगे। कांग्रेस के नेता आरोप लगा चुके हैं कि दिल्ली से भाजपा के नेता बकायदा देहरादून पहुंचे और बागियों को अपने साथ दिल्ली ले गए। आनन-फानन में स्टिंग की सीडी की जांच भी इस जांच का एक हिस्सा हो सकता है। यह मामला अगर आगे बढ़ता है तो न केवल राजनीति के लिहाज से बल्कि पत्रकारिता में तेजी से चलन में आए स्टिंग आपरेशनों को लेकर भी देश की सर्वोच्च अदालत की ओर से कोई नये दिशा-निर्देश सामने आ सकते हैं।

उत्तराखंड के तेजतर्रार पत्रकार दीपक आजाद के वेब पोर्टल वाचडाग से साभार.


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