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हरीश रावत का स्टिंग : चैनल मालिक उमेश शर्मा यहां पत्रकार कम, भाजपा के आदमी ज्यादा लग रहे हैं

Yashwant Singh : हरीश रावत के स्टिंग से दो बातें साफ हो गई हैं. एक तो यह कि उत्तराखंड पूरी तरह लूटखंड है. सीएम तक बोलता है कि पच्चीस क्या तीस करोड़ कमा लो, मैं आंखें बंद किए रहूंगा. साथ ही ये भी कि स्टिंग करने वाले पत्रकार ने स्टिंग करने के बाद उसे तुरंत चैनल पर नहीं चलाया बल्कि भाजपा और कांग्रेस के बागियों को उसे दिया ताकि पहले वे स्टिंग का राजनीतिक फायदा उठा सकें. मतलब ये कि समाचार प्लस चैनल के मालिक उमेश शर्मा यहां पत्रकार कम, भाजपा के आदमी ज्यादा लग रहे हैं. यानि सारा कुछ भाजपा के इशारे पर उन्होंने किया?

Yashwant Singh : हरीश रावत के स्टिंग से दो बातें साफ हो गई हैं. एक तो यह कि उत्तराखंड पूरी तरह लूटखंड है. सीएम तक बोलता है कि पच्चीस क्या तीस करोड़ कमा लो, मैं आंखें बंद किए रहूंगा. साथ ही ये भी कि स्टिंग करने वाले पत्रकार ने स्टिंग करने के बाद उसे तुरंत चैनल पर नहीं चलाया बल्कि भाजपा और कांग्रेस के बागियों को उसे दिया ताकि पहले वे स्टिंग का राजनीतिक फायदा उठा सकें. मतलब ये कि समाचार प्लस चैनल के मालिक उमेश शर्मा यहां पत्रकार कम, भाजपा के आदमी ज्यादा लग रहे हैं. यानि सारा कुछ भाजपा के इशारे पर उन्होंने किया?

राजनीतिक इशारों पर स्टिंग करने वालों का हश्र अतीत में क्या क्या हुआ, सबको पता है. कई स्टिंगबाजों ने कांग्रेस के इशारे पर लगातार भाजपा के नेताओं और भाजपा की सरकारों का स्टिंग किया. जब भाजपा को मौका मिला तो उसने सारे स्टिंगबाजों को एक एक करके टांग दिया. तो, पत्रकार के रूप में हमें किसी को यह मौका नहीं देना चाहिए कि वह किसी के पालतू या किसी के पार्टी के बतौर काम करने का लेबल लगा सके. ऐसा करके तात्कालिक फायदा, नाम, दाम तो खूब मिलता है लेकिन लांगटर्म में इसका अंजाम बुरा होता है.

बात हो रही थी उत्तराखंड के सीएम हरीश रावत के स्टिंग की. चर्चा तो और भी कई किस्म की है कि ऐसे स्टिंग करके उसकी पूरी कीमत वसूलने और इसके जरिए अच्छी खासी प्रापर्टी खड़ी करने की पूरी लंबी परंपरा रही है इस पत्रकार कम व्यवसायी कम लायजनर उमेश कुमार की. निशंक जब सीएम थे तब वो खुद उमेश शर्मा पर स्टिंग के आड़ में ब्लैकमेलिंग के आरोप लगा चुके हैं. साथ ही उमेश को सबक सिखाने के लिए दर्जनों सही गलत मुकदमे दर्ज करा चुके हैं. लेकिन आज वही निशंक खड़े हैं उमेश के साथ, क्योंकि इनकी पुरानी अदावत सेटल हो चुकी है और दोनों मिलकर तीसरे यानि कांग्रेस के हरीश रावत को निपटाने में लगे हुए हैं. इनके साथ खड़े हैं हरीश रावत से खार खाए बागी कांग्रेसी विजय बहुगुणा और उनके हाईटेक लेकिन कनफ्यूज बेटे साकेत बहुगुणा. विजय बहुगुणा के शासनकाल में उमेश शर्मा पर हर किस्म की अपार कृपा बरसी, साकेत बहुगुणा के सौजन्य से. वो दोस्ती यारी कायम है और उस नमक का कर्ज चुकाने के लिए काम कर रहे हैं उमेश शर्मा, ऐसा लोग कह रहे हैं.

फेसबुक पर एक पेज है UP-UK Live लाइव नाम से. इसने उमेश शर्मा को लेकर कई पोस्टें पब्लिश की हैं जिससे स्टिंग के दूसरे पक्ष की सच्चाई को जाना जा सकता है. यह पेज उमेश शर्मा को एक्सपोज करने का काम ज्यादा कर रहा है, उमेश द्वारा किए गए स्टिंग पर बात कम कर रहा है. मेरी निजी राय है कि उमेश ने जिन भी हालात में स्टिंग किया और जिन भी हालात में यह सार्वजनिक किया, सड़ते राजनीतिक सिस्टम के शीर्षतम करप्ट चेहरे को तो उजागर कर ही दिया है. यह काम सराहनीय है, क्योंकि इससे जनता की ट्रेनिंग स्कूलिंग ठीकठाक हो गई है और बजबजाते सिस्टम की सच्चाई सामने हाजिर है.

हो सकता है यह स्टिंग भाजपा ने कराया हो, सत्ता की लड़ाई के अंतरविरोधों के कारण सार्वजनिक कराया गया हो, लेकिन स्टिंग तो है जबरदस्त. हम अगर स्टिंग पर फोकस करें तो हाल के दिनों का यह शानदार स्टिंग है. जब सारी की सारी मीडिया चुप्पी साधे तमाशा देख रही या फिर सत्ता के इशारे पर सत्ता सुंदरम टाइप खबरें दिखा छाप रही हैं तो एक शख्स बड़ा धमाका कर पूरे सिस्टम को चैलेंज कर देता है, बेनकाब कर देता है. भले ही किसी एक मामले में किया हो, लेकिन किया तो.

हालांकि यही शख्स जब उत्तर प्रदेश पर केंद्रित होता है तो मुख्यमंत्री के जय जयकार से आगे नहीं बढ़ पाता, वहां वह सत्ता से अपनी परम नजदीकी दिखाता है. वह सत्ता के सारे बुरे कामों से आंखें मूंदे रहता है.

यही उमेेश शर्मा की पर्सनाल्टी का अंतरविरोध है. या तो वह सत्ता को साधे रखते हैं या फिर ठीक से न सधे तो सत्ता को नेस्तनाबूत करने में जुट जाते हैं ताकि अगली सत्ता में महत्वपूर्ण भूमिका हासिल कर सकें. दोनों ही हालात में वह अपना फायदा देखते हैं. इसी अपने फायदे चक्कर में कुछ ऐसा काम, कुछ ऐसे स्टिंग कर करा जाते हैं जिससे जनता को फायदा होता है, क्योंकि शीर्षतम सत्ता एक्सपोज होती है. तो ऐसे स्टिंग की तारीफ की जानी चाहिए.

कुछ लोगों का यह भी कहना है कि अगर सिर पर पीएम का हाथ हो तो सीएम से पंगा लेना कोई बड़ी बात नहीं. इस बात में कुछ सच्चाई भी है क्योंकि उमेश इस समय सत्रह से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों से घिरे रहते हैं. दो दो राज्य सरकारों और केंद्र सरकार से मिले भांति भांति के सुरक्षा गार्डों से घिरा शख्स बिना केंद्र के संरक्षण और इशारे पर इतना बड़ा जोखिम नहीं ले सकता.

कुल मिलाकर उमेश कुमार ने समाचार प्लस और खुद को जबरदस्त टीआरपी दिलाई और पूरे देश की नजरें इन दोनों पर केंद्रित हुईं, यह भी कम बड़ी बात नहीं है. किसी का भी मूल्यांकन करने के लिए उसके सभी पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए. सिर्फ बुराई बुराई लिख कह देने से बात तार्किक नहीं रह जाती. उमेश में लाख बुराइयां हों लेकिन उसने जिस अंदाज में एक सीएम का स्टिंग किया व उसे सार्वजनिक कर भूचाल ला दिया, वह जबरदस्त है.

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भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से. संपर्क : [email protected]

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1 Comment

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  1. salman

    March 28, 2016 at 4:32 am

    यशवंत भाई महान हैं. जै जै आपकी.

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