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सुख-दुख

एवार्ड कथा!

मनोज मलयानिल-

हमारे और दूसरे न्यूज़ चैनलों के कई साथियों को आज अवार्ड मिले हैं … और कुछ उदास साथियों ने पूछा है कि पुरस्कार बांटने के आखिर क्या आधार हैं-

दरअसल ये समस्या सभी क्षेत्रों में बंटने वाले पुरस्कारों के साथ है। मैंने कहा कोई नहीं काम करते रहो…

मैंने उस साथी के सामने दो गाने के बोल बताये और पूछा इसमें तुम्हें कौन सा गाना ज्यादा पसंद है? पहला गाना था- आज फिर जीने की तमन्ना है, आज फिर मरने का इरादा है..और दूसरा गाना है- ‘तितली उड़ी…उड़ जो चली…फूल ने कहा आ जा मेरे पास…’

जाहिर है सामने से सीधा जवाब आया…सर क्या बात कर रहे हैं….बेशक ‘आज फिर जीने की तमन्ना है, आज फिर मरने की तमन्ना है’ बॉलीवुड के अब तक के सबसे रोमैंटिक गानों में से एक है ये गाना….

मेरा जवाब था बस इस गाने के साथ आज की शाम गुजार लो…इस गाने के लिए फिल्म फेयर अवॉर्ड सचिन देव बर्मन को ना मिलकर, तितली उड़ी के संगीत निर्देशक को मिल गया था।

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