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हृदय रोग के विभागाध्यक्ष ने कमीशनखोरी के ख़िलाफ़ मोर्चा खोला!

भास्कर गुहा नियोगी-

डॉ ओमशंकर ने कहा- कोई भी कानून से ऊपर नहीं जो ग़लत उसके खिलाफ हो कार्रवाई, केवल कमीशन खोरी के लिए घटिया सप्लाई, मरीजों का आर्थिक दोहन के साथ जान से खिलवाड़ बंद हो

वाराणसी। सर सुंदरलाल अस्पताल (बीएचयू) में हृदय रोग विभाग के कैथ लैब स्थित अमृत फार्मेसी द्वारा मरीजों से मुनाफा कमाने के विरोध में हृदय रोग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. ओमशंकर ने मोर्चा खोल दिया है।

बीते दिनों अमृत फार्मेसी को जगह ख़ाली करने की नोटिस जारी करने वाले डॉ ओमशंकर का कहना है कैथलैब में अवैध तरीके से चल रही फार्मेसी की कार्यप्रणाली अविश्वसनीय और संदिग्ध है। अस्पताल के ही कुछ लोगो से सांठगांठ कर फार्मेसी मरीजों का दोहन कर रहा है जिसका एक बड़ा हिस्सा कमीशन खोरों के जेब में पहुंचाया जा रहा है और मरीज लुट रहा है। उन्होंने दावा किया कि जिस एंजियोप्लास्टी को करने में 30 हजार खर्च आते हैं उसी एंजियोप्लास्टी के 50 हजार क्यों? फार्मेसी और कमीशन खोरों के दो पाटों के बीच मरीज के परिजन क्यों पिसते रहे? उनका कहना है कि एंजियोप्लास्टी इतनी सस्ती होनी चाहिए कि एक गरीब रिक्शे वाले को इसमें दिक्कत न आए।

इस मामले में फिलहाल सर सुंदरलाल अस्पताल (बीएचयू) पीआरओ के माध्यम से सर सुंदरलाल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक द्वारा विज्ञप्ति जारी किए जाने के बाद मुद्दा और गर्मा गया है। डॉ ओमशंकर का कहना है चिकित्सा अधीक्षक झूठा और भ्रामक जानकारी देकर विश्वविद्यालय और उनकी गरिमा को ठेस पहुंचा रहे हैं।

उन्होंने मीडिया को जारी प्रेस विज्ञप्ति का खंडन करते हुए कहा है चिकित्सा अधीक्षक ने विज्ञप्ति में जो कुछ कहा है वो खुद में सवाल है।

वैसे देखें तो डॉ ओमशंकर जो कुछ कह रहे है उन्हें नजर अंदाज़ करना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि प्रेस विज्ञप्ति में अधीक्षक महोदय का दावा है कि अस्पताल के अंदर सभी जगहों पर पारदर्शिता के साथ टेंडर जारी कर दुकानें खोलने की अनुमति दी गई है जो पूरी तरह से गलत है।

डॉ ओमशंकर ने चिकित्सा अधीक्षक से उस आवंटन की छायाप्रति की मांग की है जिसके जरिए हृदय रोग विभाग के कैथ लैब में अमृत फार्मेसी को जगह दी गई। इतना ही नहीं उन्होंने पूछा है कि अगर अस्पताल के किसी कमेटी ने अमृत फार्मेसी को हृदय रोग विभाग में दुकान आवंटित किया गया है तो उसकी छाया प्रति भी अधिक्षक महोदय दें।

डॉ ओमशंकर कहते है विज्ञप्ति में अधिक्षक महोदय ने अमृत फार्मेसी के पक्ष में झूठ बोला है। एक तरफ अधीक्षक महोदय कहते हैं कि कार्डियोलॉजी विभाग के परिसर में कोई भी दवा की दुकान संचालित नहीं हो रही है दूसरी तरफ खुद ही कहते हैं हृदय रोग विभाग के कैथ लैब में 2016 से ही अमृत फार्मेसी सर्जरी में उपयोग आने वाली स्टंट और बैलून का रखरखाव करने के साथ ही मरीजों को उपलब्ध करवाती है और मरीजों से उसका दाम भी लेती है।

उन्होंने कहा इसका सीधा मतलब है कि किसी दवा की दुकान की तरह अमृत फार्मेसी भी काम कर रही है जो अवैध है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा अधीक्षक महोदय से अमृत फार्मेसी द्वारा जमा किए गए बिजली, पानी के बिल की छाया प्रति मांगी जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि अधिक्षक महोदय झूठ बोलकर मनमाने तरीके से झूठे तथ्य पेश कर मुद्दे को भटका रहे है उनके खिलाफ भी फ़ौरन कारवाई की जरूरत है। डॉ ओमशंकर का कहना है निजी फायदे के लिए मरीजों का शोषण हर हाल में रूकना चाहिए।

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