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झूठी खबर दिखाने वाले जी न्यूज, टाइम्स नाऊ व न्यूज एक्स चैनलों को अरविंद केजरीवाल ने कोर्ट में घसीटा

दिल्ली सरकार ने डॉक्टर्ड फुटेज दिखाने के मामले में 3 चैनलों को कोर्ट में घसीटा. इस मामले में सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी और जेडीयू नेता केसी त्यागी ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मुलाकात कर ऐसे न्यूज चैनलों पर कार्रवाई की मांग की थी. जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में 9 फरवरी को हुई कथित देशविरोधी नारेबाजी के वीडियो को प्रसारित करने के मामले में दिल्ली सरकार ने तीन टीवी चैनलों को कोर्ट में घसीटा है. आम आदमी पार्टी की सरकार ने शुक्रवार को जी न्‍यूज, न्‍यूज एक्‍स और टाइम्स नाऊ के खिलाफ पटियाला हाउस कोर्ट में चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्‍ट्रेट के पास शिकायत दर्ज कराई. इन चैनलों पर 9 फरवरी को हुई कथित नारेबाजी का डॉक्‍टर्ड वीडियो फुटेज प्रसारित करने का आरोप लगाया गया है.

दिल्ली सरकार ने डॉक्टर्ड फुटेज दिखाने के मामले में 3 चैनलों को कोर्ट में घसीटा. इस मामले में सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी और जेडीयू नेता केसी त्यागी ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मुलाकात कर ऐसे न्यूज चैनलों पर कार्रवाई की मांग की थी. जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में 9 फरवरी को हुई कथित देशविरोधी नारेबाजी के वीडियो को प्रसारित करने के मामले में दिल्ली सरकार ने तीन टीवी चैनलों को कोर्ट में घसीटा है. आम आदमी पार्टी की सरकार ने शुक्रवार को जी न्‍यूज, न्‍यूज एक्‍स और टाइम्स नाऊ के खिलाफ पटियाला हाउस कोर्ट में चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्‍ट्रेट के पास शिकायत दर्ज कराई. इन चैनलों पर 9 फरवरी को हुई कथित नारेबाजी का डॉक्‍टर्ड वीडियो फुटेज प्रसारित करने का आरोप लगाया गया है.

दिल्‍ली सरकार ने वीडियो की सत्‍यता जांचने के लिए नई दिल्‍ली के डिस्ट्रिक्‍ट मजिसट्रेट से जांच कराई थी। जांच में फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर वीडियो को डॉक्‍टर्ड बताया गया. गौरतलब है कि प्रसारित किए गए वीडियो में जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को भी दिखाया गया था. सूत्रों ने बताया कि सरकार की कानूनी टीम को आदेश दिया गया है कि वह उन तीन चैनलों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करे, जिनके नाम का जिक्र नई दिल्ली जिले के जिलाधिकारी (डीएम) की रिपोर्ट में किया गया है. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया, ‘दिल्ली सरकार ने अपनी कानूनी टीम को उन तीन चैनलों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दायर करने का निर्देश दिया है, जिन्होंने जेएनयू के छात्र नेता कन्हैया कुमार के बारे में ऐसे वीडियो प्रसारित किए जिनसे कथित तौर पर छेड़छाड़ की गई थी.’

इससे पहले सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी और जेडीयू नेता केसी त्यागी ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मुलाकात कर ऐसे न्यूज चैनलों पर कार्रवाई की मांग की थी, जिन्होंने जेएनयू विवाद पर ऐसे वीडियो दिखाए जो कि डॉक्‍टर्ड पाए गए. दिल्ली सरकार की ओर से कराई गई मजिस्ट्रेट जांच में पाया गया था कि हैदराबाद की फॉरेंसिक लैब को भेजे गए सात वीडियो में से तीन से छेड़छाड़ की गई थी.

कुल मिलाकर कन्हैया कुमार के खिलाफ फर्जी खबरें चलाने से नाराज दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने देश के तीन बड़े निजी न्यूज चैनलों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर पटियाला हाउस कोर्ट में जो अर्जी दायर की है उससे वो लोग खुश है जो चाहते हैं कि इन बेलगाम न्यूज चैनलों पर थोड़ी सी लगाम लगाया जा सके ताकि ये टीआरपी और रेवेन्यू के लिए कुछ भी दिखाने की प्रवृत्ति से बाज आ सकें. आरोप लगाया गया है कि उक्त चैनलों ने कन्हैया को लेकर डॉक्टर्ड (छेड़छाड़ कर बनाया हुआ) वीडियो लोगों को दिखा कर देशद्रोह के आरोपी कन्हैया की गलत छवि लोगों के समक्ष पेश की. इस अर्जी पर कोर्ट में सोमवार को सुनवाई होगी. केजरीवाल सरकार का कहना है कि उक्त चैनलों ने टीआरपी के लिए कन्हैया कुमार के बयान वाले वीडियो से छेड़छाड़ कर उसे टीवी पर दिखाया और उसकी छवि देशद्रोही की बनाकर लोगों के सामने पेश की. यह गतिविधि अपराध की श्रेणी में आती है। इससे एक आम नागरिक के स्वतंत्रता से जीने का अधिकार प्रभावित हुआ. इन चैनलों के वीडियो के आधार पर दिल्ली पुलिस ने केस दर्ज किया और कन्हैया को देशद्रोह के आरोप में जेल जाना पड़ा. इस गैर जिम्मेदाराना हरकत के लिए चैनलों पर अपराधिक मुकदमा चला कर उन्हें दण्डित किया जाना चाहिये.

वरिष्ठ पत्रकार Mukesh Kumar इस बारे में फेसबुक पर लिखते हैं : तीन टीवी चैनलों के खिलाफ़ मामला दायर करके दिल्ली सरकार ने सही क़दम उठाया है। उसे शाबाशी दी जानी चाहिए, क्योंकि कायदे से ये काम केंद्र सरकार को और उसके मातहत काम करने वाली पुलिस को करना चाहिए था, मगर उन्होंने नहीं किया। ज़ाहिर है उनके बीच मिलीभगत है इसलिए वे ऐसा क्यों करते। अब अदालत को इस मामले की सुनवाई प्राथमिकता में करनी चाहिए और दोषियों को दंड देकर एक मिसाल कायम करनी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की आपराधिक पत्रकारिता करने की हिम्मत कोई न कर सके।

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