‘इंडिया टीवी’ के रोके न रुकी ये एंकर, कोर्ट में रजत शर्मा को शिकस्त दे ‘रिपब्लिक टीवी’ ज्वाइन किया

अपनी महिला एंकर को दूसरे न्यूज चैनल में “ऑन एयर” होने से रोकने की खातिर हाईकोर्ट गया था ‘इ्ंडिया टीवी’… Share on:

यूपी में 10 दिन की बाध्यता वाले जमानत नियम में एडवोकेट हैदर ने कराया संशोधन

उत्तर प्रदेश में उच्च न्यायालय इलाहाबाद की नियमावली १९५२ के अध्याय १८ के नियम १८ (३) के अंतर्गत किसी भी जेल में निरुद्ध अभियुक्त के उच्च न्यायालय में जमानत पर सुनवाई किये जाने से पूर्व शासकीय अधिवक्ता को १० दिन की पूर्व नोटिस सूचना देने की बाध्यता थी। उक्त नियम न केवल असंवैधानिक था, वरन …

अखबार ने नौकरी से निकाला तो 34 साल बाद कोर्ट से जीत सके दुबे जी!

कुछ लोगों का कहना है कि यह जीत कोई जीत नहीं है. 34 साल बाद किसी कंपनी से निकाले गए आदमी का जीतना बताता है कि दरअसल कंपनी जीत गई, आदमी हार गया. बावजूद इसके, कई पत्रकार साथी खुश हैं कि चलो, जीते हुए साथी को समुचित पैसा, बकाया, वेज बोर्ड और मुआवजा तो मिल …

द वायर के खिलाफ स्टे लेने में जय शाह कामयाब, अब कोई कुछ न लिखे-बोले!

Om Thanvi : वायर, दायर और कायर… जय अमित शाह ने अहमदाबाद डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के अनेक अतिरिक्त सिविल जजों में एक चौथे जज की अदालत में द वायर के ख़िलाफ़ दायर सिविल मुक़दमे में स्टे प्राप्त कर लिया है। कि वे रोहिणी सिंह वाली ख़बर के आधार पर आगे और कुछ किसी भी रूप में (प्रिंट, डिज़िटल, इलेक्ट्रोनिक, ब्रॉडकास्ट, टेलिकास्ट या किसी अन्य मीडिया में ख़बर, इंटरव्यू, बहस, टीवी परिचर्चा की शक्ल में, किसी भी भाषा में, न प्रत्यक्ष न अप्रत्यक्ष) मुक़दमे के अंतिम निपटारे तक कुछ भी नहीं लिखेंगे-बताएँगे।

एचटी बिल्डिंग के सामने सिर्फ एक मीडियाकर्मी नहीं मरा, मर गया लोकतंत्र और मर गए इसके सारे खंभे : यशवंत सिंह

Yashwant Singh : शर्म मगर इस देश के मीडिया मालिकों, नेताओं, अफसरों और न्यायाधीशों को बिलकुल नहीं आती… ये जो शख्स लेटा हुआ है.. असल में मरा पड़ा है.. एक मीडियाकर्मी है… एचटी ग्रुप से तेरह साल पहले चार सौ लोग निकाले गए थे… उसमें से एक ये भी है… एचटी के आफिस के सामने तेरह साल से धरना दे रहा था.. मिलता तो खा लेता.. न मिले तो भूखे सो जाता… आसपास के दुकानदारों और कुछ जानने वालों के रहमोकरम पर था.. कोर्ट कचहरी मंत्रालय सरोकार दुकान पुलिस सत्ता मीडिया सब कुछ दिल्ली में है.. पर सब अंधे हैं… सब बेशर्म हैं… आंख पर काला कपड़ा बांधे हैं…

No one killed Arushi!

Prateek Chaudhary : पुलिस ने शुरू से ही आरुषि मर्डर को ऐसे ट्रीट किया जैसे कोई बच्ची नही कोई जानवर मरा हो। कोई भी सबूत किसी के खिलाफ नही मिला पुलिस को जांच में ओर अब कोर्ट से सब बरी! आखिर कैसे मर गयी आरुषि? कोई तो होगा उसका कातिल? इस केस के इन्वेस्टिगेटर ऑफीसर पर कायर्वाही होनी चाहिए जिन्होंने अपना जमीर बेचकर एक मासूम बच्ची की लाश का सौदा कर सबूत मिटा दिये। माफ करना आरुषि, तुम ऐसे देश मे पैदा हुई जिसमें इंसान की कोई कीमत नहीं, जहाँ हर कुर्सी बिकाऊ है।

ईमानदार जज जेल में, भ्रष्टाचारी बाहर!

सुप्रीम कोर्ट देश की सबसे बड़ी अदालत है, इसलिए उसका फ़ैसला सर्वोच्च और सर्वमान्य है। चूंकि भारत में अदालतों को अदालत की अवमानना यानी कॉन्टेम्प्ट ऑफ़ कोर्ट की नोटिस जारी करने का विशेष अधिकार यानी प्रीवीलेज हासिल है, इसलिए कोई आदमी या अधिकारी तो दूर न्यायिक संस्था से परोक्ष या अपरोक्ष रूप से जुड़ा व्यक्ति भी अदालत के फैसले पर टीका-टिप्पणी नहीं कर सकता। इसके बावजूद निचली अदालत से लेकर देश की सबसे बड़ी न्याय पंचायत तक, कई फ़ैसले ऐसे आ जाते हैं, जो आम आदमी को हज़म नहीं होते। वे फ़ैसले आम आदमी को बेचैन करते हैं। मसलन, किसी भ्रष्टाचारी का जोड़-तोड़ करके निर्दोष रिहा हो जाना या किसी ईमानदार का जेल चले जाना या कोई ऐसा फैसला जो अपेक्षित न हो।

Letter to Chief Justices of Indian High Courts for simplification of procedural laws to cut delays in judgments

To

All the Hon’ble

Chief Justices of Indian High Courts

Sir,

SIMPLIFICATION OF PROCEDURAL LAWS TO CUT DELAYS IN JUDGMENTS

I wish to invite your kind attention to the fact that it is pretended that the procedural laws of the land pose greatest challenge to timely justice to litigants.  The Code of Civil Procedure and Code of Criminal Procedure are the laws of Central Legislature and State Governments are also empowered to amend the codes according to their needs. Both the Codes are originally creation of British India.

स्टेट अथारिटीज को अखबारों का सरकुलेशन जांचने के आदेश पर कोर्ट ने जारी किया नोटिस

याचिका के जरिए डीएवीपी की मीडिया पॉलिसी को चुनौती दी गई है… सर्कुलेशन जांच का अधिकार प्रेस रजिस्ट्रार को दिया जाए, किसी दूसरी एजेन्सी को नहीं…

जोधपुर । ऑल इण्डिया स्माल एण्ड मीडियम न्यूज पेपर फेडरेशन द्वारा डीएवीपी की मीडिय पॉलिसी 2016 एवं सर्कुलेशन जांच के अधिकार प्रेस रजिस्ट्रार के अलावा किसी दूसरी एजेन्सी को दिये जाने के मामले में दायर की गई चुनौती याचिका पर सुनवाई के बाद राजस्थान उच्च न्यायालय ने गुरुवार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया हैं। याचिका में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव, डीएवपी, प्रेस पंजीयक, सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग के प्रिन्सिपल सेक्रेटरी एवं डीआईपीआर को भी पार्टी बनाया गया हैं। याचिका फेडरेशन के जिलाध्यक्ष खरथाराम द्वारा दायर की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से हाईकोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज भंडारी, एस.पी. शर्मा एवं दलपतसिंह राठौड़ ने पैरवी की।

माई लॉर्ड ने वरिष्ठ पत्रकार को अवमानना में तिहाड़ भेजा पर मीडिया मालिकों के लिए शुभ मुहुर्त का इंतजार!

…सहारा का होटल न खरीद पाने वाले चेन्नई के एक वरिष्ठ पत्रकार को सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना का दोषी मान कर आनन-फानन में जेल भेज दिया… यह वरिष्ठ पत्रकार गिड़गिड़ाता रहा लेकिन जज नहीं पसीजे… पर मीडिया मालिक तो खुद एक बार सुप्रीम कोर्ट के सामने उपस्थित तक नहीं हुए और कोर्ट को चकरघिन्नी की …

भास्कर को झटके पर झटका, पत्रकार धर्मेंद्र के बाद अब रिसेप्शनिस्ट लतिका के भी ट्रांसफर पर कोर्ट ने लगाई रोक

भारत में ‘ज़िद करो दुनिया बदलो’ का नारा देने वाले डीबी कॉर्प को लगातार झटके लग रहे हैं, किंतु भास्कर प्रबंधन है कि सुधरने का नाम नहीं ले रहा है। दैनिक भास्कर ने मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर मांगने पर अपने प्रिंसिपल करेस्पॅान्डेंट धर्मेन्द्र प्रताप सिंह का मुम्बई से सीकर (राजस्थान) ट्रांसफर कर दिया। धर्मेन्द्र प्रताप सिंह अदालत की शरण में गए और इंडस्ट्रियल कोर्ट ने इस ट्रांसफर पर रोक लगा दी। इसके बाद अब भास्कर की सहायक महाप्रबंधक (कार्मिक) अक्षता करंगुटकर ने डी बी कॉर्प के मुम्बई के माहिम स्थित कार्यालय में कार्यरत महिला रिसेप्शनिस्ट लतिका आत्माराम चव्हाण का सोलापुर में ट्रांसफर कर दिया।

भास्कर के पत्रकार ने प्रबंधन को दिया जोरदार झटका, अदालत से ट्रांसफर रुकवाया

मजीठिया वेज बोर्ड मांगने के कारण भास्कर प्रबंधन ने अपने पत्रकार धर्मेन्द्र प्रताप सिंह का कर दिया था ट्रांसफर…

मुम्बई के तेज-तर्रार पत्रकारों में से एक धर्मेन्द्र प्रताप सिंह का दैनिक भास्कर ने मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर मांगे जाने पर राजस्थान के सीकर में ट्रांसफर कर दिया था। मुम्बई में दैनिक भास्कर में एंटरटेनमेंट बीट के लिए प्रिंसिपल करेस्पांडेंट पद पर कार्यरत धर्मेन्द्र प्रताप सिंह को भास्कर प्रबंधन ने पहले उन्हें लालच दिया कि कुछ ले-दे कर मामला ख़त्म करो। फिर उन्हें भास्कर की सहायक महाप्रबंधक अक्षता करंगुटकर (कार्मिक) ने धमकी दी, जिसकी शिकायत धर्मेन्द्र प्रताप सिंह ने श्रम आयुक्त से की।

सुप्रीम कोर्ट ने जागरण के मालिकों महेंद्र मोहन और संजय गुप्ता को तलब किया

मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू न करने और सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानून, न्याय, संविधान तक की भावनाओं की अनदेखी करने से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने आज दैनिक जागरण के मालिकों महेंद्र मोहन गुप्ता और संजय गुप्ता को अगली सुनवाई पर, जो कि 25 अक्टूबर को होगी, कोर्ट में तलब किया है. आज सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू न किए जाने को लेकर सैकड़ों मीडियाकर्मियों द्वारा दायर मानहानि याचिका पर सुनवाई हुई.

आईपीएस को फोन पर धमकाने के मामले में मुलायम की मुश्किलें बढ़ीं, पुलिस रिपोर्ट खारिज, आवाज़ मिलान के आदेश

सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव द्वारा आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर को मोबाइल फोन से दी गयी धमकी के सम्बन्ध में दर्ज एफआईआर में हजरतगंज पुलिस द्वारा लगाये गए अंतिम रिपोर्ट को अदालत ने ख़ारिज कर दिया है. सीजेएम लखनऊ संध्या श्रीवास्तव ने अपने आदेश में कहा कि केस डायरी से स्पष्ट है कि विवेचक ने कॉम्पैक्ट डिस्क में अंकित वार्तालाप की आवाज़ का नमूना परीक्षण नहीं कराया है और मात्र मौखिक बयान दर्ज कर के अंतिम रिपोर्ट प्रेषित कर दिया है.

कुमार विश्वास ने कोर्ट में आत्मसमर्पण किया, ज़मानत पर रिहा

सुल्तानपुर : आम आदमी पार्टी नेता और कवि कुमार विश्वास आज ज़िला न्यायालय पहुंचे और आत्म समर्पण कर दिया। इसके पहले पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि मैं आगे भी आम आदमी के लिये शांतिभंग करता रहूंगा। ज्ञात हो कि 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान आप नेता कुमार विश्वास ने अमेठी से दावेदारी ठोकी थी। इस बीच अमेठी के गौरीगंज थाने में श्री विश्वास के विरुद्ध भड़काऊ भाषण देने, सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने समेत कई धाराओं में अभियोग दर्ज हुआ था।

बस्तर के आईजी कल्लूरी ने जिस पत्रकार सोमारू नाग को नक्सली बताकर जेल में ठूंसा उसे कोर्ट ने बाइज्जत बरी करने का आदेश दिया

Kamal Shukla : ब्रेकिंग न्यूज़ जगदलपुर… पत्रकार सोमारू नाग को न्यायालय ने किया बाइज्जत बरी। पत्रकार सोमारू नाग को फर्जी मामला बनाकर बस्तर आईजी शिव राम प्रसाद कल्लूरी ने था फँसाया। एक साल पहले किया था कल्लूरी ने फर्जी मामले में गिरफ्तार। केंद्रीय जेल जगदलपुर में थे एक साल से सोमारू नाग। कर रहे थे न्याय का इन्तजार।

जजों की नियुक्ति के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट से जो लिस्ट सुप्रीम कोर्ट भेजी गई है, वह धांधलियों का पुलिंदा है!

इलाहाबाद हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति पर ‘चौथी दुनिया’ में छपी प्रभात रंजन दीन की ये बेबाक रिपोर्ट पढ़ें

जजों की नियुक्ति के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट से जो लिस्ट सुप्रीम कोर्ट भेजी गई है, वह धांधलियों का पुलिंदा है. जज अपने बेटों और नाते रिश्तेदारों को जज बना रहे हैं। और सरकार को उपकृत करने के लिए सत्ता के चहेते सरकारी वकीलों को भी जज बनाने की संस्तुति कर रहे हैं. न्यायाधीश का पद सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के प्रभावशाली जजों का खानदानी आसन बनता जा रहा है. जजों की नियुक्ति के लिए भेजी गई अद्यतन सूची में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के बेटे से लेकर कई प्रमुख न्यायाधीशों के बेटे और रिश्तेदार शामिल हैं.

गुज़रे ज़माने के समाचार चैनल टीवीआई के 60 साथियों का केस : कोर्ट ने चैनल मालिक अशोक आडवाणी को सख़्त आदेश दिए

गुज़रे ज़माने के समाचार चैनल टीवीआई के संघर्षशील 60 साथियों ने अपने हक़ और सम्मान की ख़ातिर 17 साल से एक अलख़ जला रखी है। 25 मई को अदालत ने चैनल के मालिक अशोक आडवाणी के लिए सख़्त आदेश दिया है। नीचे एक मेल है जो सभी साठ लोगों को एक साथी की तरफ से जानकारी के लिए भेजा गया है और उसके बाद कोर्ट का आदेश है…

SUPREME COURT DISMISSES SLP OF LOKMAT GROUP OF NEWSPAPERS

Inspiring story of non journalist employee who succeeds finally after a long battle of 17 years… Gets benefit of regularization and permanency as Teleprinter Operator, Planner with retrospective effect… Held entitled to all the benefits of Palekar, Bachawat Awards…

भास्कर कर्मियों की शिकायत पर हाइकोर्ट ने लेबर कोर्ट के जज अशोक जैन का तबादला किया

Sanjay Saini : भास्कर के कर्मचारियों की शिकायत पर हाइकोर्ट ने लेबर कोर्ट के जज अशोक जैन का तबादला किया। नए जज को लगाया। भास्कर प्रंबधन को नहीं मिली राहत। जज साहब ने आदेश से पहले ही बता दिया था। वो एम्पलाईज के केस करेंगे खारिज। भास्कर के एम्पलाईज में खुशी की लहर।

मोदी के दो साल : मीडिया को डरा फुसला कर सेल्फी में फंसा दिया… अब ‘दिक्कत’ दे रहीं अदालतों को ठीक करेंगे साहब लोग

Sanjaya Kumar Singh : सत्ता मिली तो ये कर दूंगा, वो कर दूंगा। ऐसे, वैसे। अब विपक्ष (जो बचा ही नहीं था) सहयोग नहीं कर रहा है। मीडिया को डरा कर और फुसला कर सेल्फी में फंसा दिया। अधिकारियों को पहले ही कसने का दावा किया गया। यह भी कि सब समय से आते-जाते हैं। प्रधानमंत्री 18 घंटे काम करते हैं। अधिकारी परेशान हैं, काम करते करते। नालायकों को दो साल पहले ही हटा दिया गया था।

एक न्यूज चैनल का बौद्धिक दिवालियापन (देखें वीडियो)

साधना न्यूज नामक एक न्यूज चैनल ने भड़ास4मीडिया डॉट कॉम पर इसलिए मुकदमा किया है क्योंकि भड़ास पर छपी एक धारावाहिक व्यंग्य कथा ‘चांपना न्यूज’ को उसने खुद की कहानी मान लिया है. दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में यह मामला मजेदार मोड़ में है. कोर्ट की तरफ से मध्यस्थता कर रहे शख्स का कहना …

झूठी खबर दिखाने वाले जी न्यूज, टाइम्स नाऊ व न्यूज एक्स चैनलों को अरविंद केजरीवाल ने कोर्ट में घसीटा

दिल्ली सरकार ने डॉक्टर्ड फुटेज दिखाने के मामले में 3 चैनलों को कोर्ट में घसीटा. इस मामले में सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी और जेडीयू नेता केसी त्यागी ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मुलाकात कर ऐसे न्यूज चैनलों पर कार्रवाई की मांग की थी. जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में 9 फरवरी को हुई कथित देशविरोधी नारेबाजी के वीडियो को प्रसारित करने के मामले में दिल्ली सरकार ने तीन टीवी चैनलों को कोर्ट में घसीटा है. आम आदमी पार्टी की सरकार ने शुक्रवार को जी न्‍यूज, न्‍यूज एक्‍स और टाइम्स नाऊ के खिलाफ पटियाला हाउस कोर्ट में चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्‍ट्रेट के पास शिकायत दर्ज कराई. इन चैनलों पर 9 फरवरी को हुई कथित नारेबाजी का डॉक्‍टर्ड वीडियो फुटेज प्रसारित करने का आरोप लगाया गया है.

‘साधना न्यूज’ ने ‘चांपना न्यूज’ वाले व्यंग्य को दिल पर लिया, भड़ास पर मुकदमा ठोंका, जानिए कोर्ट में क्या हुआ

भड़ास पर ‘चांपना न्यूज’ नामक एक चैनल के बारे में पांच किश्तों में व्यंग्यात्मक खबर छपी. ‘चांपना न्यूज’ एक काल्पनिक नाम है, जिसे वर्तमान न्यूज चैनलों की दुनिया के अंदर का हाल बताने के लिए सृजित किया गया और उसके सहारे उसके बहाने पूरी अंतरकथा बताई गई. पर इस व्यंग्य को साधना न्यूज नामक चैनल नहीं पचा पाया और उसके कर्ताधर्ता चले गए दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट. वहां इन लोगों ने कहा कि योर आनर, दरअसल चांपना न्यूज नामक जिस चैनल की कहानी भड़ास में बताई गई है, वह उसी के साधना न्यूज नामक चैनल के बारे में है, इसलिए इस मानहानि कारक कंटेंट को रिमूव कराया जाए और अंतिम फैसला आने से पहले इस वेब पोर्टल को आदेशित किया जाए कि वह साधना न्यूज के बारे में कुछ न छापे.

चोरी से न्यूड वीडियो बना इसे वायरल करने वाले होटल मालिक को महिला पत्रकार ने कोर्ट में दी शिकस्त, मिलेगा 350 करोड़ रुपये जुर्माना (देखें तस्वीरें)

कोर्ट में अपनी पीड़ा व्यक्त करतीं खेल पत्रकार एरिन फूट फूट कर रो पड़ीं…

इस महिला खेल पत्रकार को पूरे सात साल बाद इंसाफ मिला. और, जब इंसाफ मिल गया तो वह खुद को रोक न सकी. फफक कर रो पड़ी. खेल पत्रकार एरिन का होटल की दीवार में सुराख कर न्यूड वीडियो बनाया गया था. वीडियो बनाने वाले पर होटल मालिक पर अदालत ने 350 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. मामला अमेरिका का है.

Delhi HC issues notice to top editorial staff of UNI

New Delhi : Taking strong cognizance of the torture and humiliation of a dalit employee of United News of India (UNI), a prestigious news agency of the country, the Delhi High court yesterday issued notice to two high profile scribes of UNI including Joint Editor Neeraj Bajpayee, Journalist Ashok Upadhyay and an another employee of the agency Mohan Lal Joshi.

मेरे गरीब चौकीदार पिता को इस जज ने नौकरी से निकाल दिया, अब घर कैसे चलेगा

Dear Sir,

I m pallvi from ambala city. I just want to say that My father Ramesh kumar was working in Haryana Court Ambala city as a chownkidar from 20 years under session judge (Mr.Jaiveer singh Hudda). Before 5 years, My father suspended by Mr. Jaivir Singh hUdda with wrong ellications. At that time my father was working in hudda’s Kothi. But in which document Mr. Hudda Said that everything wrong in court then he suspended my father. At that time 15 Employees suspended by Mr.Hudda. One person can make mistake. But 15 Peoples can’t do at same time.

उपमन्यु पर लगा रेप का आरोप झूठ का पुलिंदा साबित हुआ

मथुरा। ब्रज प्रेस क्लब के अध्यक्ष, उपजा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं छावनी परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष कमलकांत उपमन्यु एडवोकेट पर आरोप लगाने वाली एमबीए की छात्रा न्यायालय में हुए अपने बयानों एवं लगाए शपथ पत्रों में अपनी पूर्व की कहानी से पल्ला झाड़ते हुए उपमन्यु को निर्दोष करार दिया है। कोर्ट में उसने शपथ पत्र दाखिल कर कहा है कि उसके साथ बलात्कार एवं छेडख़ानी जैसी कोई वारदात नहीं हुई थी। अपने भाई को एक मामले में जेल जाने से बचाने के लिए तथा कुछ लोगों की सलाह पर उसने कमलकांत उपमन्यु पर आरोप लगाया था जो गलत था। वादिया का 5/01/2016 को न्यायालय में शपथ बयान हुआ है। इसमें उसने अंतिम आख्या पर अपनी सहमति जताते हुए कहा है कि वह इस संबंध में न्यायालय में पूर्व में बिना किसी प्रलोभन एवं बिना किसी दबाव के अपने शपथ पत्र भी दे चुकी है।

अपराधियों की पेशी पर कचहरी सील करना आम जन के मौलिक अधिकार का हनन

गाजीपुर (उत्‍तर प्रदेश) : गुरूवार को कचहरी परिसर पुलिस ने सील कर रखा था। लगभग सवा दस बजे पूर्व जिला पंचायत सदस्‍य एवं समग्र विकास इण्डिया के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष ब्रज भूषण दूबे पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सामने से जिलाधिकारी कार्यालय की ओर जाना चाहे तो उन्‍हें भी रोक दिया गया। कारण् पूछने पर तैनात कतिपय इंस्‍पेक्‍टर व दरोगाओं द्वारा बताया गया कि आज फास्‍ट ट्रैक कोर्ट में बृजेश व त्रिभुवन की पेशी है।

पंजाब केसरी के मालिक विजय चोपड़ा को जज ने दिखाई औकात, कोर्ट रूम से बाहर निकाला

मीडिया के मालिकों की ऐंठन को ठीक करने का काम कई ईमानदार किस्म के न्यायाधीश कर डालते हैं. ऐसा ही एक मामला पंजाब के होशियारपुर का है. यहां गलत खबर छापने के एक मामले में निजी पेशी हेतु आए पंजाब केसरी के मालिक विजय चोपड़ा सीधे कोर्ट रूम में घुस गए. तब जज ने उन्हें फटकारते हुए कोर्ट रूम के बाहर जाने को कहा और आवाज लगने पर ही अंदर आने के आदेश दिए.

सुप्रीम कोर्ट में ‘लोकमत’ को साकुरे ने दी मात, एरियर 50 लाख और वेतन 40 हजार मिलेगा

नागपुर। दो साल पहले 61 कर्मचारियों को बिना किसी कारण के अवैध रूप से टर्मिनेट करने और कर्मचारियों के शोषण, अन्याय एवं अत्याचार के लिए कुख्यात महाराष्ट्र के कुख्यात लोकमत समाचार पत्र समूह को सुप्रीम कोर्ट से फिर एक बड़ा झटका लगा है. लोकमत के भंडारा कार्यालय में प्लानर के रूप में कार्यरत महेश मनोहरराव साकुरे को सुप्रीम कोर्ट ने मजीठिया वेतन आयोग के अनुसार वेतन देने और 1998 से लेकर अब तक पालेकर, बछावत, मणिसाना एवं मजीठिया वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार ब्याज के साथ एरियर्स देने का फैसला सुनाया है.

DUJ Salutes High Court Judgment As Jolt to HT Management (पढ़ें पूरा फैसला)

The Delhi Union of Journalists has broadly welcomed  as ‘somewhat belated but historic’ Hindustan Times judgment in the Delhi High Court. It has saluted the workers of Hindustan Times who are fighting the struggle in the court and outside despite various pressures. It has taken note of the fact that over 12 workers of the Hindustan Times group have unfortunately lost their lives in this long struggle for their dues.

सेंसर बोर्ड ने ‘ग्रैंड मस्ती’ पर चलायी 218 बार कैंची

केंद्र और सेंसर बोर्ड ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि बॉलीवुड फिल्म ‘ग्रैंड मस्ती’ पर 218 बार कैंची चलायी गयी और फिर उसे निर्बाध सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए पुनर्प्रमाणित किया गया। केंद्र सरकार और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) की ओर से मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी और न्यायमूर्ति जयंत नाथ की पीठ के सामने दायर हलफनामे में यह जानकारी दी गयी। पीठ टीवी पर इस फिल्म के प्रदर्शन पर स्थगन की मांग संबंधी एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।

जेएनयू के संस्कृतिकर्मी हेम मिश्रा और राजनीतिक कार्यकर्ता रोमा को जमानत मिली

नागपुर की अंडा सेल में दो साल से बंद जेएनयू के संस्‍कृतिकर्मी हेम मिश्रा को ज़मानत मिल गई है। हेम को नक्सलियों से संबंध रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। फेसबुक पर पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव ने इस बाबत जानकारी शेयर की है. उनकी पोस्ट पर Rohit Joshi ने कमेंट करके कहा है कि हेम के जमानत मिलने वाली खबर सही है. रोहित की हेम के पापा से बात हुई जिसमें उन्होंने कनफर्म किया है.

जालसाजी करने पर जीबी पन्त पॉलिटेक्निक के कर्मशाला अधीक्षक को जेल

लखनऊ की चीफ जुडीशिअल मजिस्ट्रेट ने जालसाजी से प्रमाणपत्र बनाकर नौकरी करने के एक मामले में समाज कल्याण विभाग के लखनऊ स्थित जी. बी. पन्त  पॉलिटेक्निक के कर्मशाला अधीक्षक पवन कुमार मिश्रा की जमानत अर्जी ख़ारिज करते हुए अभियुक्त को जेल भेज दिया।

महाभ्रष्टाचारी यादव सिंह को बचाने की यूपी सरकार की कोशिश नाकाम, एससी का झटका, सीबीआई जांच पर रोक से इनकार

दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा के सस्पेंड इंजीनियर-इन-चीफ यादव सिंह मामले में सीबीआई जांच पर रोक लगाने से मना कर दिया है। अखिलेश सरकार को इससे तगड़ा झटका लगा है। गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि यादव ने पूरी व्यवस्था को अपना दास बना लिया है। पिछली 16 जुलाई को हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड और जस्टिस एसएन शुक्ला ने सीबीआई जांच कराने के आदेश किए थे। इसके बाद अखिलेश सरकार ने यादव सिंह पर लगे आरोपों की सीबीआई जांच के हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

न्यायालय का चाबुक चला न संपादकजी! तो आप भी ‘त्राहिमाम’ करते नजर आएंगे

प्रदेश में नंबर वन का दावा करने वाले अखबार के पहले कॉलम में छपे एक लेख का शीर्षक है- त्राहिमाम् ! लेख में पत्रकारिता के स्वयंभू पुरोधा कहलाने वाले इन महोदय ने जिस प्रकार से सरकार और सरकारी कर्मचारियों पर तंज कसे हैं, काबिले तारीफ है। 

…. क्योंकि उसका प्रेस, सरकार, पैसा, ज़मीन, कारख़ाने और कोर्ट पर क़ब्ज़ा

देखो भई तुम उसे फाँसी देना चाहते थे, ३० को ही सुबह सुबह देना चाहते थे तुमने दे दी । जो रोकना चाहते थे वे हार गये तुम जीत गये ।

केंद्र सरकार बताए, सामग्री अपलोड करने का अधिकार फेसबुक, ट्विटर को है या नहीं – दिल्ली हाई कोर्ट

दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह उस अनुबंध को अदालत के समक्ष पेश करे जिससे यह पता लगाया जा सके कि फेसबुक (एफबी) व ट्विटर के पास सामग्री अपलोड करने का बौद्धिक संपदा अधिकार (आइपीआर) है। न्यायमूर्ति बीडी अहमद व संजीव सचदेव की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सरकारी वकील संजय जैन ने इस बारे में जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। अगली सुनवाई 19 अगस्त को है। पेश मामले में भाजपा नेता केएन गोविंदाचार्य ने याचिका दायर की थी। याचिका में प्रधानमंत्री कार्यालय समेत अन्य मंत्रालयों के सोशल मीडिया का उपयोग करने पर आपत्ति जताई गई थी।

सन समूह ने अदालत का दरवाजा खटखटाया, नीलामी में भाग लेने के लिए याचिका पेश

मुंबई : सन टीवी समूह ने एफएम रेडियो के लिए तीसरे चरण की नीलामी के पहले बैच में भाग लेने के लिए अनुमति मांगती याचिकाएं दिल्ली और मद्रास हाईकोर्ट में दायर कर दी हैं। सूर्यन एफएम और रेड एफएम के ब्रांड नाम के तहत सन समूह देश भर में 45 एफएम स्टेशन चला रहा है। इसने अपनी छह कंपनियों की तरफ से याचिकाएं दायर की है। इसमें सूचना व प्रसारण मंत्रालय के 15 जुलाई के आदेश पर स्टे देने की मांग की गई है। 

विप्रो कंपनी बेरोजगारों से कर रही भारी उगाही, धमकाने के लिए जाली सीबीआई टीम बनाई, मामला पहुंचा हाईकोर्ट !

प्रिय मेरे छोटो-बड़े भाइयों, बहनों आज यहाँ मैं विप्रो कंपनी के दोगले चेहरे से अवगत करना चाहता हूं। जहाँ देश में बेरोजगारी फैली हुई है, वहीं विप्रो कंपनी द्वारा देश के बेकसूर नौजवानों के भविष्य के साथ एक भद्दा मजाक किया जा रहा है। पहले कंपनी बेरोजगारों से सिक्योरिटी मनी के रूप में कुछ पैसे मांगती है और कुछ प्रक्रिया दिखाती है, जिससे बेरोजगार उसके झांसे में आ जाए। फिर उस बेरोजगार के माध्यम से और बेरोजगारों को जोड़ने की बात करती है। जब तक बेरोजगार कंपनी को पैसों के लिए कुछ बेरोजगार देता रहता है, तब तक कंपनी उसे भ्रमित करती रहती है। जैसे ही बेरोजगार अन्य बेरोजगारों को मुहैया कराने से मन कर देता है, कंपनी ये कह कर कि सारी प्रक्रिया गलत है, भगा देती है।

विप्रो कंपनी के खिलाफ कोर्ट और पुलिस में प्रस्तुत किए गए कुछ दस्तावेजों की छाया प्रतियां –

मजीठिया : सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर भ्रम फैला रहा मीडिया

नई दिल्ली : भारत के स्वतंत्र मीडिया की बेईमानी की हद हो गई है। खबरों को तोड़ना मरोड़ना तो इनका आए दिन का काम है। अब हालात ये है कि ये सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर भी भ्रम फैलने से बाज नहीं आ रहे हैं। पिछले साल भर से सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को न लागू करने के लिए लगभग सभी बड़े अखबारों के मालिकों के खिलाफ अवमानना का मामला चल रहा है लेकिन आज तक इस सुनवई की किसी मीडिया ने सुध लेने की जरूरत नहीं महसूस की क्योंकि माननीय सुप्रीम कोर्ट इनके दिग्गज वकीलों के तर्क नकारता रहा। 

Majithia : We want to assure the court order of july 6 thus clearly enquiry on the alleged non-implementation & the report from inspectors is awaited for action : NUJ

New Delhi : National union of Journalists (NUJ) said ; members are assured by the Hon’ble Supreme Court order of July 6, that the contempt proceedings in the court against newspaper managements are on and would be heard in due course and that the court’s order of July 6  rejects only the second batch of contempt petitions recd after due date.  

सुप्रीम कोर्ट ने मजीठिया मामले पर खारिज कर दीं सभी ताजा अवमानना याचिकाएं

गत वर्ष फरवरी में प्रिंट मीडिया में मजीठिया वेज बोर्ड सिफारिशों को सही ठहराने के बाद से सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिकाओं की बाढ़ आ गई थी, जिनमें वेज बोर्ड को लागू न करने की शिकायतें की गई थीं। पिछले माह इन याचिकाओं की संख्या अचानक बढ़ गई। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस रंजन गागोई की पीठ ने इन सभी ताजा अवमानना याचिकाओं को खारिज कर दिया है। खारिज होने वाली याचिकाओं में ‘भड़ास4मीडिया’ की तरफ से अधिवक्ता उमेश शर्मा की तरफ से दायर कोई याचिका नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट स्वत: संज्ञान लेकर अमिताभ ठाकुर को राज्य की प्रताड़ना से बचाए

सर्वोच्च न्यायालय से गुहार. यूपी के आईजी अमिताभ ठाकुर के मामले में दखल दीजिए. सरकार की प्रताड़ना से बचायें, वरना सभी जनवादी और लोकतंत्र के नायक कालकोठरी में होंगे. अब जरा भी देरी न्यायिक प्रक्रिया का मजाक बना देगी. यूपी सरकार से भरोसा उठ रहा है. सुप्रीम कोर्ट से आस है. पूरा मामला देश के लोकतंत्र और कानूनी प्रक्रिया का माखौल उड़ाते साफ दिख रहा है. अब तो हर पत्रकार और अफसर को डर लगने लगा है कि जो यूपी सरकार के खिलाफ आवाज उठायेगा, वो फर्जी मुकदमे झेलेगा, जेल जायेगा. ये देश की सबसे बड़ी अदालत, अब जनता इंसाफ के लिए आप की तरफ टकटकी लगाये बैठी है. दखल दीजिए. 

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला : व्यापमं के सारे मामले सीबीआई को सौंपे, राज्यपाल को भी नोटिस

नई दिल्ली : व्यापमं मामले पर अहम फैसला लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सारे मामले सीबीआई को सौंप दिए हैं। हालांकि ये जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होगी या नहीं, इसके लिए कोर्ट ने सीबीआई से 24 जलाई तक जवाब मांगा है।

खुले कोर्ट की कार्यवाही का प्रकाशन मीडिया का मौलिक अधिकार

ग्वालियर। पीएमटी मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत के न्यायाधीश सतीषचन्द्र शर्मा ने फर्जीवाड़े के आरोपी राहुल यादव द्वारा कोर्ट में चलने वाली कार्यवाही के अखबारों में प्रकाशन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया और कहा कि खबरों का प्रकाशन करना समाचार पत्रों का मौलिक अधिकार है, इस पर रोक उचित नही हैं। न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 द्वारा भारत के प्रत्येक नागरिक को वाक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मौलिक अधिकार के रूप में प्रदान की गई है, जिससे समाचार पत्रों के जरिये भी लोग अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं।

जगेन्द्र प्रकरण : याचिकाकर्ता सतीश जैन और दिल्ली के पत्रकार विशेष ध्यान दें

मैं हमेशा कहता हूँ कि अच्छा, बुरा कुछ नहीं होता। अति ही बुराई है। सद्कर्म की भी अति हो जाये, तो परिणाम नकारात्मक ही आता है। आप आगे को भागिए और भागते रहिये, तो एक दिन लौट कर वहीं आ जायेंगे, जहां से चले थे, ऐसे ही पीछे को दौड़ने पर होगा। पीछे को दौड़ने वाला भी रुके न, तो वो भी एक दिन वहीं आ जायेगा, जहां से भागा था, इसीलिए बीच की अवस्था को शिखर कहा जाता है, संतुलन जीवन की सर्वश्रेष्ठ अवस्था है। शिखर पर ठहरे रहना होता है, मतलब संतुलन बनाये रखना होता है, लेकिन कोई शिखर पर पहुंचने के बाद भी संतुलन न बना सके, तो उस पार नीचे जाने का ही रास्ता होता है फिर। खैर, मन धर्म-अध्यात्म और कर्म पर चर्चा का नहीं है। मन है शाहजहांपुर के पत्रकार जगेन्द्र कांड पर बात करने का। इस प्रकरण में भी समाजसेवा की थोड़ी अति हो गई, जिससे परिणाम अपेक्षित नहीं आ पा रहा है। लखनऊ के चर्चित अधिवक्ता प्रिंस लेनिन ने उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में ही गहन अध्ययन के बाद जगेन्द्र प्रकरण में जनहित याचिका दायर की थी, जिस पर सरकार से जवाब माँगा गया। आशा थी कि बहस के बाद सीबीआई जांच के आदेश हो जायेंगे, उससे पहले दिल्ली के पत्रकार सतीश जैन ने उच्चतम न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर दी, जिस पर उच्चतम न्यायालय ने केंद्र और प्रदेश सरकार से जवाब माँगा है।

जेल में ही दिन काटेंगे सुब्रत राय, बैंक गारंटी का इंतजाम नहीं हुआ

सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय की जमानत मंजूर करते हुए शर्त लगा दी कि रिहाई के लिए उन्हें 5 हजार करोड़ रुपए की बैंक गारंटी और 5 हजार करोड़ कैश जमा करने होंगे। रिहाई के 18 महीनों के भीतर 9 किश्तों में 36000 करोड़ रुपए अदा करने होंगे। यही नहीं, रिहाई के बाद सुब्रत रॉय को हर 15 दिन में दिल्ली के तिलक मार्ग थाने में हाजिरी लगानी होगी। लेकिन कोर्ट के इस फैसले के बावजूद रॉय जेल में ही रहेंगे, क्योंकि सुब्रत रॉय बैंक गारंटी का इंतजाम नहीं कर पाए हैं।

कोऑपरेटिव के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के फैसले की खबर भास्कर ने नहीं छापी

जोधपुर : अपने आप को देश का सबसे बड़ा अखबार कहने वाले दैनिक भास्कर ने में क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के फैसले की खबर को छिपा लिया। उसे सिर्फ वेबसाइट पर प्रसारित कर दिया। प्रदेश के जागरूक तबके में इस घटिया नीयत को लेकर तरह तरह की चर्चाएं हैं।    

मोहाली की अदालत परिसर में फोटो जर्नलिस्ट पर हमला

मोहाली (पंजाब) : मोहाली कोर्ट परिसर में तेजाब कांड के दो आरोपियों ने फोटो जर्नलिस्ट पर हमला कर दिया। हिंदी अखबार के इस फोटो जर्नलिस्ट पर हुए हमले के बाद मामले की शिकायत थाना मटौर में की गई है। कोर्ट परिसर में ये हमला आरोपियों ने पुलिस से हाथ छुड़वा कर किया।

ट्राई के खिलाफ स्टार पहुंचा दिल्ली हाईकोर्ट, सुनवाई आज

मुंबई : भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) के खिलाफ स्टार इंडिया दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। ट्राई ने ब्रॉडकास्टरों को निर्देश दिया था कि वे व्यावसायिक सब्सक्राइबरों को सीधे सिग्नल न उपलब्ध कराएं। यह आवेदन मुख्य याचिका के अंतर्गत दाखिल किया गया है जिसके ज़रिए ब्रॉडकास्टर स्टार इंडिया ने ट्राई के उस टैरिफ आदेश को चुनौती दी है जिसमें व्यावसायिक सब्सक्राइबरों को सामान्य सब्सक्राइबरों के समान माना गया है। 

मुझे इस चोर और बेईमान न्यायपालिका पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं है : दयानंद पांडेय

Dayanand Pandey : इन सारे कमीनों, इन सारे चोरों और बेईमानों को इस न्यायपालिका में इतना यकीन होना आम आदमी को बार-बार डरा देता है। ख़ास कर तब और जब यह सब के सब एक सुर में कहते हैं कि न्यायपालिका में उन्हें पूरा यकीन है, पूरा भरोसा है! याद कीजिए कि अभी दो दिन पहले इस अपराधी सलमान खान ने बड़े गुरुर से कहा था कि मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है! लालू प्रसाद यादव भी यही बोलता है, मायावती, मुलायम, जयललिता आदि-आदि सारे बेईमान और अपराधी यह संवाद सर्वदा बोलते रहते हैं।

आईएएस नवनीत सहगल ने पत्रकार अनूप गुप्ता को कोर्ट में घसीटा, सम्मन जारी

लखनऊ से खबर है कि आईएएस नवनीत सहगल ने पत्रकार अनूप गुप्ता को कोर्ट में घसीट लिया है. विशेष जज मनोज कुमार ने प्रमुख सचिव धर्मार्थ नवनीत सहगल के खिलाफ भ्रामक और मानहानिजनक खबर छापने के आरोप में द्ष्‍टांत मासिक पत्रिका के सर्वेसर्वा अनूप गुप्ता को सम्मन जारी कर दिया गया है. कोर्ट ने उन्‍हें विचारण के लिए तलब किया है.

मजीठिया पर फैसले की डेट करीब आते ही सुप्रीम कोर्ट के जजों पर उमड़ रहा मीडिया मालिकों का प्रेम

जैसे-जैसे सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया मामले पर अंतिम सुनवाई की तिथित नजदीक आती जा रही है, मीडिया मालिकों सर्वोच्च अदालत के जजों के लिए प्रेम उमड़ता जा रहा है।  पिछले दिनो सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति एनवी रमण इनाडु समाचार पत्र के मालिक रामोजी राव के घर अतिथि बन कर पहुंचे थे। अब राजस्थान पत्रिका के मालिक गुलाब कोठारी सुप्रीम कोर्ट के जज अरुण मिश्रा के साथ एक मीडिया सेमीनार को सम्बोधित करने वाले हैं।  

अजमेर में ट्रेनिंग ले रहे हैं देश के प्रथम नेत्रबाधित न्यायाधीश

अजमेर : बहुत शीघ्र आप एक ऐसी अदालत देखेंगे, जिसके न्यायाधीश नेत्र बाधित होंगे। यहां इन दिनो ब्रम्हानंद शर्मा जज की ट्रेनिंग ले रहे हैं। वह देश के संभवतः पहले नेत्रबाधित न्यायाधीश बनने जा रहे हैं। उनका चयन पिछले दिनों ही राजस्थान न्यायिक सेवा में हुआ है। ब्रम्हानंद उस आखिरी बैच के हैं, जिन्हें राजस्थान लोक सेवा आयोग ने चुना है। अब राजस्थान हाईकोर्ट मजिस्ट्रेटों की भर्ती करेगा।

prize money received by Aroon Purie is not taxable : Delhi HC

In a significant decision, the Delhi High Court has held that prize money received by India Today Editor Aroon Purie was not directly relatable to his carrying on vocation as a journalist, but linked with his personality and it would be a capital receipt and hence not taxable under the Income Tax (I-T) Act. The HC explained that every receipt, which is not explicitly exempt would not be an income and its taxability would depend on particular situation, says Taxsutra.com a website that provides, on a real-time basis, updates and analysis of all income tax rulings.

भास्कर ने शोलापुर से रांची तबादला किया तो हेमंत कोर्ट से स्टे ले आए

भास्कर समूह डीबी कार्प को उसके इंप्लाई हेमंत चौधरी ने तगड़ा सबक सिखाया है. मजीठिया वेज बोर्ड के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने वाले भास्कर के मीडियाकर्मी हेमंत चौधरी को प्रबंधन ने प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट उमेश शर्मा के माध्यम से मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर अवमानना याचिका लगाने वाले हेमंत चौधरी का पिछले दिनों भास्कर प्रबंधन ने शोलापुर से रांची तबादला कर दिया.

अब काले हिरण की आत्मा आकर बयान देगा- ”मैंने खुदकुशी की थी जज साहब!”

Nitin Thakur :  हिट एंड रन मामले में सलमान के ड्राइवर ने अचानक कहीं से आकर कहा कि कार मैं चला रहा था जज साहब। कमाल हो जाए अगर काले हिरण मामले में मृत हिरण की आत्मा आकर बयान दे दे कि मैंने खुदकुशी की थी जज साहब!!

अब मीडिया की अदालत में अंशु : सुहाग लुटा फिर पूरी वसीयत, ‘मेरे मासूम की मदद करिए’ !

आगरा : ससुराल में पांव रखते ही किसी नवविवाहिता को पता चले कि उसके पति को तो कैंसर है….कुछ दिन बाद पति उसे हमेशा के लिए इस दुनिया में अकेला छोड़ जाए ! और उस पर लगातार वक्त कुछ ऐसी मार पड़ती जाए कि सुहाग लुट जाने से कुछ माह पूर्व वह संतान को जन्म दे, और फिर, उसे नवजात के साथ ससुराल से मायके खदेड़ दिया जाए !..उसके बच्चे के नाम बैंक में जमा सारे रुपये निकालने के साथ ही जालसाजी कर उसकी पूरी वसीयत उसके ही ननद-देवर एक कॉलेज के नाम पर हड़प लें तो ? और वह लाचार नवविवाहिता दस साल से न्याय की गुहार लगाते हुए हाईकोर्ट की चौखट तक पहुंच जाए….!! 

मजीठिया वेज बोर्ड संघर्ष : अमर उजाला को जवाब दायर करने का अब आखिरी मौका, भारत सरकार भी पार्टी

अमर उजाला हिमाचल से खबर है कि यहां से मजीठिया वेज बोर्ड के लिए लड़ाई लड़ रहे प्रदेश के एकमात्र पत्रकार को सब्र का फल मिलता दिख रहा है। अमर उजाला के पत्रकार रविंद्र अग्रवाल की अगस्त 2014 की याचिका पर सात माह से जवाब के लिए समय मांग रहे अमर उजाला प्रबंधन को इस बार 25 फरवरी को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आखिरी बार दस दिन में जवाब देने का समय दिया है। अबकी बार कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कर दिया है कि अगर इस बार जवाब न मिला तो अमर उजाला प्रबंधन जवाब दायर करने का हक खो देगा और कोर्ट एकतरफा कार्रवाई करेगा।

मजीठिया के लिए कोर्ट गए दिव्य मराठी के हेमकांत को भास्कर प्रबंधन प्रताड़ित कर रहा

औरंगाबाद दिव्य मराठी में कार्यरत हेमकांत चौधरी अपने हक के लिए गुजरात हाईकोर्ट गए हैं. वे मजीठिया वेज बोर्ड के तहत सेलरी व एरियर न देने पर अखबार प्रबंधन के खिलाफ खुलकर लड़ रहे हैं. जैसे ही कंपनी को पता चला कि हेमकांत ने केस लगाया है, उत्पीड़न शुरू कर दिया गया. दिव्य मराठी अखबार दैनिक भास्कर समूह का मराठी दैनिक है. औरंगाबाद दिव्य मराठी से हेमकांत चौधरी द्वारा हाईकोर्ट जाने पर कोर्ट ने भास्कर मैनेजमेंट को नोटिस जारी कर दिया.

मजीठिया वेज बोर्ड संघर्ष : अवमानना के दस मामलों की सुप्रीम कोर्ट में इकट्ठे सुनवाई 10 मार्च को

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील उमेश शर्मा ने जानकारी दी कि मजीठिया वेज बोर्ड मामले को लेकर मीडिया मालिकों के खिलाफ जितनी भी अवमानना याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लगी हैं, उनकी सुनवाई 10 मार्च को होगी. अब तक दर्ज कुल दस मामले हैं. यह सुनवाई न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति एनवी रमण की खंडपीठ करेगी. अदालत संख्या 8 में इस मामले का आइटम नंबर एक है. जो भी साथी इस मामले की सुनवाई देखना सुनना चाहते हैं वह पहले से पास बनवाकर सुप्रीम कोर्ट के कक्ष संख्या आठ में जा सकते हैं.

पत्रकार निरुपमा आत्महत्या मामले में पत्रकार प्रियभांशु की पेशी

कोडरमा। पत्रकार निरुपमा पाठक को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने के बहुचर्चित मामले के आरोपी उसके प्रेमी प्रियभांशु गुरुवार को झारखंड की कोडरमा अदालत में पेश हुए। ज्ञात हो कि प्रियभांशु ने यह प्रकरण खत्म कराने को लेकर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जहां से केस खत्म कर दिया गया था।

मजीठिया की जंग : जो लेबर इंस्पेक्टर कभी अखबार दफ्तरों की तरफ झांकते न थे, वे आज वहां जाकर जानकारी मांगने को मजबूर हैं

साथियों,  हिमाचल प्रदेश में मजीठिया वेज बोर्ड लागू करने को लेकर मेरे द्वारा बनाया गया दबाव काम करता नजर आ रहा है। हालांकि श्रम विभाग हरकत में तो आया है, मगर अखबार प्रबंधन के दबाव के भय और सहयोग न करने की आदत के चलते श्रम निरीक्षकों को वांछित जानकारी नहीं मिल पा रही है। राहत वाली खबर यह है कि जो श्रम निरीक्षक कभी अखबारों के दफ्तरों की तरफ देखने से भी हिचकिचाते थे, वे आज वहां जाकर जानकारी मांगने को मजबूर हैं। जैसे की आपको ज्ञात है कि मैं मजीठिया वेज बोर्ड के खिलाफ मई २०१४ से लड़ाई लड़ रहा हूं। श्रम विभाग में शिकायतों व आरटीआई के तहत जानकारियां मांगने का दौर जारी है। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में पिछले सात माह से मामला चल रहा है। हाल ही में माननीय सुप्रीम कोर्ट में भी लड़ाई पहुंचा दी है।

दैनिक भास्कर होशंगाबाद के 25 कर्मचारी मजीठिया के लिए गए हाईकोर्ट, नोटिस जारी

दैनिक भास्कर से सबसे ज्यादा मीडियाकर्मी मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से सेलरी एरियर पाने के लिए कोर्ट की शरण में गए हैं. ये संख्या हजारों में हो सकती है. ताजी सूचना होशंगाबाद यूनिट से है. यहां के करीब 25 मीडियाकर्मियों ने गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी है. जब इसकी खबर भास्कर के वरिष्ठ पदाधिकारियों को मिली तो इन्होंने हाईकोर्ट जाने वालों कर्मियों को एक एक कर अलग अलग केबिन में बुलाया और धमकाना शुरू कर दिया. इन्हें नौकरी से निकाल दिए जाने की धमकी भी दी गई है. कर्मचारियों से कहा गया कि उन्हें सात दिन गैर-हाजिर दिखाकर नौकरी से टर्मिनेट कर दिया जाएगा.

IN THE MATTER OF SURESH KHENDELWAL COMPLAINANT VERSUS KIRAN BEDI ACCUSED…

IN THE HON’BLE COURT OF CHIEF METROPOLITAN MAGISTRATE,(EAST) KARKARDOOMA COURTS, NEW DELHI

COMPLAINT NO. OF 2015

IN THE MATTER OF :

SH. SURESH KHENDELWAL               
COMPLAINANT
VERSUS
MS. KIRAN BEDI                           
ACCUSED

THROUGH
LEGUM LAW FIRM
HIMAL AKHTAR
ADVOCATE
O-24-A, JUNG PURA EXTENSION,
NEW DEHI.
himalakhtarg@gmail.com

P.S. KRISHNA NAGAR

COMPLAINT AGAINST MS. KIRAN BEDI FOR PROMOTING ENIMITY THROUGH ILLEGAL VISIBLE REPRESENTATIONS

DATED:- 23/01/2015

To,

COMMISSIONER OF POLICE,
POLICE HEAD QUARTER,
I.T.O.
NEW DELHI.

D.C.P. OFFICE (EAST)
P.S. MANDAWALI
DELHI

S.H.O.,
P.S. KRISHNA NAGAR,
NEW DELHI.

OFFICE OF THE CHIEF ELECTORAL OFFICER
OLD ST. STEPHEN COLLEGE BUILDING
KASHMERE GATE
DELHI-110006

SUBJECT: –  COMPLAINT AGAINST MS. KIRAN BEDI R/O 56, UDAI PARK, NEW DELHI, FOR PROMOTING ENIMITY AMONG THE RESIDENTS OF KRISHNA NAGAR THROUGH ILLEGAL VISIBLE REPRESENTATIONS.           

लाला लाजपत राय को भाजपाई पटका पहनाने के मामले में कोर्ट ने किरण बेदी के खिलाफ कार्रवाई का ब्योरा मांगा

किरण बेदी अपनी मूर्खताओं, झूठ, बड़बोलापन और अवसरवाद के कारण बुरी तरह घिरती फंसती जा रही है. पिछले दिनों नामांकन से पहले किरण बेदी ने स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय की प्रतिमा को भगवा-भाजपाई पटका पहना दिया. इस घटनाक्रम की तस्वीरों के साथ एक कारोबारी सुरेश खंडेलवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट के जाने-माने वकील हिमाल अख्तर के माध्यम से किरण बेदी को कानूनी नोटिस भिजवाया फिर कोर्ट में मुकदमा कर दिया. इनका कहना है कि लाला लाजपत राय किसी पार्टी के प्रापर्टी नहीं बल्कि पूरे देश के नेता रहे हैं. ऐसे में किसी एक पार्टी का बैनर उनके गले में टांग देना उनका अपमान है.

‘फरिश्‍ता’ के लेखक ने फिल्‍म ‘पीके’ पर किया साहित्‍य चोरी का मुकदमा

‘‘मैंने 1 जनवरी, 2015 को पीके फिल्‍म देखी तो मैं हैरान हो गया। पीके फिल्‍म मेरे उपन्‍यास फरिश्‍ता की कट /कॉपी /पेस्‍ट है।’’ –कपिल ईसापुरी

अपने इन शब्‍दों में लेखक कपिल ईसापुरी काफी मर्माहत दिखते हैं। प्रेस कॉन्‍फेरेंस कर अपना दर्द बयान करते हैं। लेकिन मीडिया में एक कहावत बहुत प्रसिद्ध है- लिखता कोई है, दिखता कोई और है, बिकता कोई और है। इस कहावत का व्‍यावहारिक रूप प्रसिद्ध लेखक निर्देशक बी आर इसारा विविध भारती को दिए एक साक्षात्‍कार में इस प्रकार समझाते हैं- ‘‘कम चर्चित साहित्‍यकारों के साहित्‍य की चोरी फिल्‍मी दुनिया में खूब होती है। जब मैं फिल्‍मी दुनिया में आया था। मुझसे कम चर्चित उर्दू साहित्‍यकारों का साहित्‍य पढ़वाया जाता और उसको तोड-मरोड़ कर इस्‍तेमाल कर कर लिया जाता।’’

अदालत ने पंजाब केसरी के पत्रकार से वसूला 10 हजार रुपए जुर्माना

पंजाब के रोपड़ जिले की सी.जे.एम. अदालत ने जिले के क्षेत्र चमकौर साहिब के पंजाब केसरी के एक पत्रकार को गलत खबर प्रकाशित करने के आरोप में 10 हजार रुपए जुर्माना ठोका है और जुर्माने की रकम माननीय अदालत द्वारा आरोपी पत्रकार से मौके पर ही वसूल ली गई है। पता चला है कि गुरमीत सिंह पुत्र गुरमुख सिंह गांव महितोतां जोकि चमकौर साहिब में साइकिल स्टैंड के ठेकेदार थे, के खिलाफ 2009 में पंजाब केसरी के पत्रकार पवन कौशल ने बिना सोचे-समझे एक खबर प्रकाशित कर दी थी। इस संबंध में जब गुरमीत सिंह ने पवन कौशल से पूछा तो वह अपनी पत्रकारिता व अखबार मालिकों तक पहुंच की धौंस दिखाने लगा।

इंदौर प्रेस क्लब के खिलाफ कुर्की के आदेश जारी

इंदौर के अष्टम अपर जिला न्यायाधीश ने इंदौर प्रेस क्लब के खिलाफ 16 लाख 37000 हज़ार रुपए की डिक्री के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने ये आदेश शरदचंद जैन की और से दायर मामले पर दिए हैं। मामले के मुताबिक शरदचंद जैन ने अपनी फर्म ‘सुदर्शन टीवी चैनल’ के ऑफिस के लिए इंदौर प्रेस क्लब के प्रस्तावित बहुमंजिला भवन में तीन प्रकोष्ठों के लिए 13 नवंबर 2010 से मई 2011 के बीच 12 लाख रुपए का भुगतान किया था। बाद में शरदचंद जैन को पता चला कि इंदौर प्रेस क्लब ने उक्त भवन का निर्माण अवैध रूप से किया है। जमीन प्रेस क्लब की नहीं है। भवन निर्माण के नक़्शे को भी इंदौर नगर निगम ने अनुमति नहीं दी है और प्रेस क्लब ने अन्य जरूरी अनुमतियाँ भी विभिन्न विभागों से प्राप्त नहीं की है। 

रेप केस प्रकरण में मथुरा के पत्रकार कमलकांत उपमन्‍यु के घर फरारी नोटिस चस्‍पा

मथुरा के पत्रकार कमलकांत उपमन्‍यु पर एमबीए की एक छात्रा के साथ बलात्‍कार किये जाने के आरोप में कल पुलिस ने एक कदम और आगे बढ़ाते हुए कोर्ट से सीआरपीसी की धारा 82 के तहत कार्यवाही करा ली है। पुलिस ने कल ही उपमन्‍यु के घर पर उसकी फरारी संबंधी सूचना का नोटिस भी चस्‍पा कर दिया है। पीड़िता के अधिवक्‍ता प्रदीप राजपूत द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार रेप के आरोपी कमलकांत उपमन्‍यु के फरार हो जाने तथा पुलिस की गिरफ्त में न आने पर कल इस मामले की आई. ओ. महिला सब इंस्‍पेक्‍टर रीना ने संबंधित न्‍यायालय से सीआरपीसी की धारा 82 के तहत कार्यवाही किये जाने की अनुमति लेकर आरोपी के घर उसका नोटिस चस्‍पा कर दिया।

प्यार नहीं, आपकी पॉलिटिक्स कुछ और है बॉस… प्यार है तो धर्मांतरण की जरूरत क्यों?

हाल ही में आया इलाहाबाद उच्च न्यायालय का फैसला न्याय व तर्क के हर पहलू पर फिट बैठता है. कितनी बेहतरीन बात कही न्यायालय ने… अगर धर्म में आस्था ही नहीं, तो धर्म परिवर्तन क्यों? सही बात है, इसे तो धर्मगुरु भी मानेंगे कि धर्म को एक दांव की तरह तो नहीं इस्तमाल किया जा सकता न कि शादी करनी हो या तालाक लेना हो तो धर्म का दांव खेल दिया. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने जिन मामलों की सुनवाई करते हुए फैसला दिया, आईये उन पर गौर करते हैं. दरअसल एक ही विषय पर पांच अलग-अलग याचिकाएं न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की गईं. इन सभी में हिन्दू लड़कियों ने मुसलमान लड़कों से शादी करने के खातिर इस्लाम कुबूल किया फिर निकाह किया व न्यायालय के समक्ष अपनी शादी को वैधता देने और सुरक्षा की मांग की. सभी याचिकाकर्ताओं ने मजिस्ट्रेट के समक्ष जो बयान दिए थे उनकी विषय वस्तु कमोबेश एक ही थी.

अपराधी मीडिया मालिक छुट्टा घूम रहे, विज्ञापन एजेंट को तीन साल की जेल हो गई

किसी अखबार या चैनल मालिक को आपने पेड न्यूज या छंटनी या शोषण या चोरी के मामले में जेल जाते आपने नहीं सुना होगा लेकिन एक विज्ञापन एजेंट को तीन साल की जेल की सजा इसलिए हो गई क्योंकि उसने अखबार में विज्ञापन छपवाकर उसका पेमेंट जमा नहीं कराया. विज्ञापन छपवा कर पैसे न जमा कराना अपराध है. उचित ही सजा मिली. लेकिन ऐसी सजाएं बड़े लोगों को अपराध में क्यों नहीं होती.

कोर्ट खुद संज्ञान लेकर यादव सिंह और उसकी पत्नी को कठोर दंड दे और नजीर कायम करे

प्रिय यशवंत भाई,  पिछले कई महीनों से लिखने की सोच रहा था लेकिन काम की व्यस्तता के कारण लिख नहीं पाया और कई बार टाइम होने के बाद भी लिखने का मन नहीं किया क्योंकि सरकार, कर्मचारी, अफसर, राजनेता सब इतने ढीठ हो गए हैं कि तुम उनको कितना भी सुनाते रहो, लिखते रहो उनके कान पर जूं तक नहीं रेंगती क्योंकि वो करते वहीं हैं जो उनको करना है क्योंकि उनको पता है कि भारत का कानून इतना लचीला है कि उनका कोई कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता।

हरियाणा में आर्यसमाजियों की सरकार है, इसलिए संत रामपाल के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गयी है

Sanjay Tiwari : झगड़ा आर्यसमाज बनाम कबीरपंथ का है। 2006 के जिस मर्डर केस में संत रामपाल आरोपी बनाये गये हैं, सतलोक आश्रम के बाहर वह झड़प आर्यसमाज के समर्थकों के साथ ही हुई थी। बाबा निजी तौर पर मर्डर में शामिल थे या नहीं, यह अदालत जाने लेकिन जो दुनिया जानती है वह यह कि आर्यसमाजवाले किसी भी कीमत पर कबीरपंथी संत रामपाल और उनके सतलोक आश्रम को बर्दाश्त नहीं कर रहे थे।

हिसार में पुलिस ने दो दर्जन मीडियाकर्मियों को बर्बर तरीके से पीटा और कैमरा तोड़ा

संत रामपाल प्रकरण कवर करने हरियाणा के हिसार पहुंचे दर्जनों मीडियाकर्मियों को हरियाणा पुलिस ने बुरी तरह पीटा. कई चैनलों के रिपोर्टरों और कैमरामैनों को गंभीर चोटें आई हैं. पुलिस द्वारा आजतक के रिपोर्टर और कैमरामैन को पीटते हुए दृश्य न्यूज चैनलों पर दिखाए जा रहे हैं. ब्राडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन (बीईए) ने मीडिया पर जान-बूझकर किए गए अटैक की कड़ी निंदा की है और दोषियों तो दंडित करने की मांग की है. बीईए महासचिव और वरिष्ठ पत्रकार एनके सिंह ने कहा है कि पुलिस ने राजनीतिक आकाओं के इशारे के बाद मीडिया पर हमला किया है ताकि पुलिस कार्रवाई को मीडिया कवर न कर सके और मौकै से मीडिया के लोगों को भगाया जा सके. ओबी वैन से लेकर मोबाइल, कैमरा तक तोड़े क्षतिग्रस्त किए गए हैं. करीब दो दर्जन पत्रकारों और कैमरामैनों को चुन चुन कर पुलिस ने निशाना बनाया है.

कोर्ट में झुका भास्कर प्रबंधन, दिव्य भास्कर वालों को अगले माह से मजीठिया वेतनमान मिलने लगेगा

मजीठिया वेतन बोर्ड को लेकर गुजरात के पत्रकारों द्वारा लगाई गई याचिका का सार्थक परिणाम आया है। गौरतलब है कि गुजरात हाईकोर्ट में उक्त मामले की सोमवार 10 नवंबर को अंतिम सुनवाई थी लेकिन कोर्ट का फैसला आता कि उससे पहले ही डीबी कार्प के वकील ने अपनी गलती मानते हुए मजीठिया वेतन बोर्ड की अनुशंसाओं के अनुसार सभी भुगतान करने की बात मान ली और केस बंद करने का आग्रह किया।

भास्कर चेयरमैन रमेश चंद्र अग्रवाल पर शादी का झांसा देकर देश-विदेश में रेप करने का आरोप (देखें पीड़िता की याचिका)

डीबी कार्प यानि भास्कर समूह के चेयरमैन रमेश चंद्र अग्रवाल के खिलाफ एक महिला ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है. इस बाबत उसने पहले पुलिस केस करने के लिए आवेदन दिया पर जब पुलिस वालों ने इतने बड़े व्यावसायिक शख्स रमेश चंद्र अग्रवाल के खिलाफ मुकदमा लिखने से मना कर दिया तो पीड़िता को कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा. कोर्ट में पीड़िता ने रमेश चंद्र अग्रवाल पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. पीड़िता का कहना है कि रमेश चंद्र अग्रवाल ने उसे पहले शादी का झांसा दिया. कई जगहों पर शादी रचाने का स्वांग किया. इसके बाद वह लगातार संभोग, सहवास, बलात्कार करता रहा.

पुलिस विरोध के बावजूद कोर्ट ने फारवर्ड प्रेस के संपादक प्रमोद रंजन को जमानत दी

Pramod Ranjan : अंतत: आज कोर्ट से मुझे भी अग्रिम जमानत मिल गयी। ख्‍याल नारीवादी लेखक अरविंद जैन इस मामले में मेरे वकील हैं। उन्‍होंने बताया कि पुलिस के पक्ष ने जमानत का घनघोर विरोध किया। अरविंद जैन जी कोर्ट में ‘फारवर्ड प्रेस’ का पक्ष तो रखा ही, साथ ही भारतीय दंड संहिता की धारा 153 A (जिसके तहत मुकदमा दर्ज किया गया है) की वैधता पर भी सवाल उठाए। यही वह धारा है, जो अभिव्‍यक्ति की आजादी पर पुलिस का पहरा बिठाती है।

‘दैनिक नवजीवन’ संपत्ति चोरी प्रकरण : पुलिस की खात्मा रिपोर्ट खारिज, केस नये सिरे से शुरू, नामजद आरोपियों के खिलाफ वारंट

Sanjay Chaturvedi : ‘नेशनल हेराल्ड’ के हिंदी संस्करण ‘दैनिक नवजीवन’ की संपत्ति चोरी हो जाने के मामले में भोपाल कोर्ट ने पुलिस की खात्मा रिपोर्ट को खारिज कर केस को नये सिरे से शुरू कर नामजद आरोपी एनके मित्तल और महेन्द्र सिंह बग्गा के खिलाफ पांच पांच हजार रूपये के जमानती वारण्ट जारी किए हैं। मामले की अगली सुनवाई 18 अक्टूबर को होगी। नवजीवन की मशीन और अन्य सामान चोरी जाने की घटना 18-19 नवम्बर 2007 में हुई थी एमपी नगर थाना पुलिस ने काफी दवाब के बाद 9 जनवरी 2008 को धारा 380 के तहत नामजद प्रकरण दर्ज किया।

मोदी सरकार को कुंभकर्ण कहकर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार

खुद को काफी मेहनती और सक्षम समझने वाली नरेंद्र मोदी की सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने मिथकीय पात्र कुंभकर्ण और 19वीं सदी की एक कहानी के चर्चित कामचोर पात्र ‘रिप वान विंकल’ से की है। सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा है कि केंद्र सरकार इन दोनों पात्रों की तरह ही बर्ताव कर रही है। जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस आरएफ नरीमन की बेंच ने केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को डांट लगाने की दौरान केंद्र सरकार को भी इन दोनों विशेषणों से नवाजते हुए फटकारा। सुप्रीम कोर्ट की त्यौरियां केंद्र सरकार और पर्यावरण मंत्रालय की लापरवाहियों पर चढ़ी हुई हैं। गुरुवार का मामला एक रिपोर्ट से जुड़ा है, जिसे पर्यावरण मंत्रालय को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश करना था।

कोर्ट से भी नहीं डरती शोभना भरतिया, जीतने के बाद भी एचटी बिल्डिंग के बाहर बैठने को मजबूर हैं कर्मचारी

Respected Yashwant ji, हिन्दुस्तान टाइम्स के सैंकड़ों कर्मचारियों को शोभना भारतीया ने पिछले कई सालों से कंपनी के बाहर बैठाया है… ये कर्मचारी कोर्ट में केस जीत चुके हैं… कोर्ट ने इन्हें वापस लेने का आदेश भी दिया है… बावजूद इसके शोभना जी ने इन्हे अब तक वापस नहीं लिया है…