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सुख-दुख

‘संग्रहित’ और ‘संगृहीत’!

राजीव शर्मा-

राजस्थान पत्रिका और दैनिक भास्कर में हर दिन छप रही यह ग़लती

राजस्थान के मशहूर अख़बार राजस्थान पत्रिका में क़रीब-क़रीब हर रोज़ एक ख़बर ज़रूर छपती है, जिसमें बताया जाता है कि किसी जगह रक्तदान शिविर लगाया गया, वहां इतने यूनिट रक्त इकट्ठा किया गया। इसके लिए यह अख़बार ‘संग्रहित’ शब्द लिखता है। ताज़ा उदाहरण 10 सितंबर, 2022 का दिया जा सकता है, जब इसके जयपुर संस्करण के चौथे पृष्ठ पर ऐसी ख़बर में ‘संग्रहित’ लिखा गया है।

इसी तरह दैनिक भास्कर भी ‘संग्रहित’ लिखता है। इसमें सप्ताहभर पहले खींवसर की ख़बर छपी थी- रक्तदान शिविर में 380 यूनिट रक्त संग्रहित।

कुछ ऐसा ही हाल दूसरे अख़बारों का है। वे भी लिखते हैं- शिविर में रक्त संग्रहित किया गया।

वास्तव में एक ही ग़लती का रोज़ाना छपना बताता है कि ये अख़बार इसकी ओर ध्यान नहीं देते, जबकि इन्हें करोड़ों लोग पढ़ते हैं। उनमें से कई स्कूली बच्चे भी होते हैं। इन्हें पढ़कर उनका भाषाज्ञान कैसा होगा?

विद्वानों ने ‘संग्रहित’ के बजाय ‘संगृहीत’ को सही माना है। ‘संग्रह’ का अर्थ ‘जमा करना’ होता है, वहीं ‘संगृहीत’ का अर्थ ‘एकत्र किया हुआ या संकलित’ होता है। जमा करने वाले को ‘संगृहीता’ कहा जाता है।

संस्कृत व हिन्दी के बहुत बड़े विद्वान श्री कलानाथ शास्त्रीजी अपनी किताब ‘मानक हिन्दी का स्वरूप’ में पृष्ठ सं. 42 पर लिखते हैं-

कुछ ऐसे शब्द हैं, जिनके बारे में दो अलग-अलग रूपों में अलग-अलग वर्तनी होती है। उदाहरणार्थ, ‘संग्रह’, ‘अनुग्रह’ आदि शब्दों में ग्रह आता है। उसी भ्रम में बहुत से लोग लिख जाते हैं, ‘मैं अनुग्रहित होऊँगा’ या यहाँ ‘अच्छे ग्रंथ संग्रहित हैं।’ ये दोनों अशुद्ध हैं। संस्कृत के हिसाब से जहाँ ‘क्त’ प्रत्यय होगा, वहाँ का ग्र’ ‘गृ’ हो जाएगा। अतः ‘अनुगृहीत’ व ‘संगृहीत’ ही सही हैं।

राजीव शर्मा
जयपुर

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