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रिपोर्टरों का शोषण करने आया एक नया एप्प- ‘पब्लिक वाइब’, यहाँ रेट है 50 रुपए प्रति खबर, देखिए टीडीएस काट कर कितने हाथ आते हैं!

उत्तर प्रदेश में “पब्लिक वाइब” ऐप में काम करने वाले यूपी के रिपोर्टर की हालत बेहद खराब है, क्योंकि यहां मात्र ₹50 रुपए एक खबर के दिए जाते हैं। पाँच खबरों के ढाई सौ रुपए होते हैं। टीडीएस काटकर मात्र दो सौ पाँच रुपए हाथ आते हैं। एक दिन में चार या पाँच खबर ही दे सकते हैं। इससे ज़्यादा नहीं। इस तरह पत्रकारों का भरपूर शोषण किया जा रहा है। इससे परेशान होकर एक पत्रकार ने खुद इस्तीफ़ा दे दिया।

पब्लिक वाइब एप्प कम्पनी में परिवारवाद हावी है। नेशनल हिन्दी हेड शिविंदर गौड़ ने अपने ही बेटे शिवम गौड़ को यूपी का स्टेस्ट कोऑर्डिनेटर बनाया। इसके अलावा भी कई अपने सगे रिश्तेदारों को डिस्टिक कोऑर्डिनेटर बनाया, जिनको पत्रकारिता की ABCD का भी ज्ञान नहीं।

निखिल शर्मा का व्यवहार अन्य रिपोर्टर के साथ अच्छा नहीं है। रिपोर्टर पब्लिक वाइब के व्हाट्सएप ग्रुप में भी अपनी समस्या नहीं रख सकता, क्योंकि वहां पर भी व्हाट्सएप ग्रुप को ओनली एडमिन करके लॉक किया गया है। संस्थान अच्छा है, कम्पनी बड़ी है, लेकिन ऐसे लोग ऊपर बैठा दिए हैं, जिसके कारण रिपोर्टर को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

देखें ये इस्तीफ़ानामा-

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
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