
यशवंत सिंह-
आज शेयर बाजार में एक बार फिर भारी भूचाल देखने को मिला। अडानी समूह (Adani Group) के लिस्टेड शेयरों में शुक्रवार के कारोबारी सत्र में भारी बिकवाली और तेजी से गिरावट आयी, जिससे निवेशकों के करोड़ों रुपये अचानक मिटते नजर आये। यह गिरावट कई प्रमुख अडानी कंपनियों में 10% से 15% तक टूट के रूप में दर्ज हुई, जिससे समूह के बाजार मूल्य में लगभग ₹1.1 – ₹1.4 लाख करोड़ तक का भारी नुकसान हुआ है।
शेयर बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो Adani Green Energy के शेयर लगभग 14%, Adani Enterprises तक 11% से ऊपर, Adani Energy और Adani Ports में भी 7% से 12% तक गिरावट देखी गयी। इस गिरावट ने निफ्टी और सेंसेक्स जैसे प्रमुख सूचकांकों पर भी दबाव बनाया और व्यापक बाजार कमजोरी दिखायी दी।

गिरावट का प्रमुख कारण अमेरिका से आई बुरी खबर है। यू.एस. सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने न्यूयॉर्क की अदालत में एक नई याचिका दाखिल की है जिसमें उसने अडानी समूह के प्रमुखों गौतम और सागर अडानी को ई-मेल के माध्यम से कानूनी समन भेजने की अनुमति मांगी है। इस समन से जुड़ी खबरें बाजार में भय फैला रही हैं और निवेशकों ने जोखिम कम करने के लिए भारी बिकवाली की।
SEC का यह कदम इसी महीने 2026 की शुरुआत से एक लंबी कानूनी लड़ाई का हिस्सा है — अमेरिकी नियामक आरोप लगा रहा है कि कंपनी के निदेशकों पर कथित रूप से धोखाधड़ी तथा $265 मिलियन रिश्वत योजना में शामिल होने के आरोप हैं, और उसने पारंपरिक सेवा की जगह ई-मेल के माध्यम से समन भेजने की छूट की मांग की है। इस खबर के सामने आते ही बाजार में घबराहट तेज हो गयी, जिससे अडानी समूह के शेयरों में पैनिक सेलिंग देखने को मिली।
निवेशकों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है क्योंकि हाल के दिनों में सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट के साथ-साथ अडानी स्टॉक्स की वोलाटिलिटी बढ़ रही है। अनुभवी विश्लेषकों का कहना है कि अगर कानूनी प्रक्रिया लंबी चलती है और स्पष्टता नहीं आती है तो शॉर्ट-टर्म में दबाव जारी रह सकता है।
अदानी समूह ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए अपनी कानूनी प्रतिक्रिया की बात कही है, लेकिन बाजार ने अभी तक इस दावे पर भरोसा जताना शुरू नहीं किया है। निवेशकों का भरोसा उन्हीं कंपनियों के शेयरों में स्थिरता आने पर ही लौट सकता है।
आज की गिरावट ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या मोदी सरकार के समर्थन से जुड़े लंबे प्रेम और राजनीतिक-व्यापारिक रिश्तों से निवेशकों को सच्चे वित्तीय जोखिम का अंदाज़ा हो पा रहा है या नहीं।


