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सुख-दुख

92 साल के रस्किन बॉन्ड से मिलने लखनऊ की बच्ची पहुंची देहरादून, स्पाइन सर्जरी के बाद भी बाल साहित्य की नई पीढ़ी को दिया प्यार!

Elderly man in a hospital bed smiling as a younger person in a blue jacket reads him a colorful children's book from close up.

यशवंत सिंह-

भारत के सबसे प्रिय बाल साहित्यकारों में शुमार रस्किन बॉन्ड से मिलने की इच्छा लखनऊ की एक बच्ची अद्रिका उमराव को देहरादून तक ले गई। उम्र के 92वें पड़ाव पर पहुंचे रस्किन बॉन्ड इन दिनों स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से उबर रहे हैं। कुछ महीने पहले उनकी स्पाइन की सर्जरी हुई थी और फिलहाल वे देहरादून में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। इसके बावजूद जब एक बच्ची उनसे मिलने पहुंची तो उन्होंने उससे मुलाकात की, उसकी किताब देखी और अपने हाथ से उसके लिए कुछ शब्द लिखे।

बच्ची के लिए यह मुलाकात महज किसी प्रसिद्ध लेखक से मिलने का अवसर नहीं थी, बल्कि उस साहित्यकार से मिलने का क्षण था जिसकी कहानियों ने भारत की कई पीढ़ियों के बचपन को आकार दिया है।

मुलाकात के बाद रस्किन बॉन्ड ने बच्ची की किताब पर अपने हाथ से लिखा—

“Dear Adrika,
Congratulations on your book.
Keep writing!
Ruskin Bond
6/9/26”

A handwritten dedication reading 'Dear ... Congratulations on your book. Keep writing!' signed with a name and dated 6/1/26, on light paper.

यानी 6 सितंबर 2026 को लिखे इस छोटे से संदेश में बॉन्ड ने बच्ची को उसकी किताब के लिए बधाई दी और सिर्फ दो शब्दों में उसके आगे के लेखन की दिशा भी बता दी-“Keep writing!”

यह छोटा-सा संदेश उस बच्ची के लिए शायद किसी बड़े साहित्यिक पुरस्कार से कम नहीं है। जिस लेखक ने सात दशक से ज्यादा समय तक बच्चों और बड़ों के लिए लिखा हो, उसका किसी उभरते लेखक से “लिखते रहो” कहना अपने आप में एक खूबसूरत साहित्यिक आशीर्वाद है।

रस्किन बॉन्ड का जन्म 19 मई 1934 को हिमाचल प्रदेश के कसौली में हुआ था। उनके पिता ब्रिटिश मूल के थे और मां एंग्लो-इंडियन थीं। उनका बचपन जामनगर, देहरादून, दिल्ली और शिमला में बीता। देहरादून उनके जीवन और साहित्य का इतना महत्वपूर्ण हिस्सा बना कि बाद में उनकी अनेक कहानियों में इस शहर और इसके आसपास के पहाड़, पेड़, बारिश, छोटे कस्बे और वहां के आम लोग जीवंत पात्रों की तरह दिखाई देने लगे।

ब्रिटिश मूल की पारिवारिक पृष्ठभूमि होने के बावजूद बॉन्ड ने भारत को सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि अपनी पहचान और साहित्य की जमीन बनाया। वे लंबे समय से मसूरी के लैंडोर में रहते हैं और उनकी रचनाओं में भारतीय पहाड़, प्रकृति, छोटे शहरों का जीवन और आम भारतीय मनुष्य बार-बार लौटता है।

रस्किन बॉन्ड ने महज 17 साल की उम्र में अपना पहला उपन्यास ‘The Room on the Roof’ लिखा। 1957 में इस किताब को प्रतिष्ठित John Llewellyn Rhys Memorial Prize मिला। इसके बाद उनका लेखन लगातार आगे बढ़ता गया। अब तक वे 500 से ज्यादा कहानियां, निबंध और उपन्यास/नॉवेलाज तथा बच्चों के लिए दर्जनों किताबें लिख चुके हैं।

उनकी लोकप्रिय कृतियों में The Room on the Roof, Our Trees Still Grow in Dehra, The Blue Umbrella, A Flight of Pigeons और The Adventures of Rusty जैसी किताबें शामिल हैं। खासकर ‘Rusty’ का चरित्र भारतीय बाल साहित्य में बेहद लोकप्रिय हुआ।

रस्किन बॉन्ड की सबसे बड़ी विशेषता उनकी भाषा की सादगी है। वे कठिन बातों को भी बेहद सहज ढंग से लिखते हैं। पेड़, बारिश, पहाड़, जानवर, दोस्ती, अकेलापन, बचपन और छोटे शहरों के मामूली से दिखने वाले लोग उनके साहित्य में असाधारण महत्व हासिल कर लेते हैं।

उनकी ‘Our Trees Still Grow in Dehra’ की कहानियां उनके अपने बचपन और देहरादून से जुड़े अनुभवों से गहराई से जुड़ी हैं। प्रकाशक पेंगुइन के मुताबिक इस संग्रह में गढ़वाल की पहाड़ियों और छोटे शहरों-कस्बों को बार-बार देखा जा सकता है और इन कहानियों के जरिए बॉन्ड ने अपने भारत को साहित्य में जीवंत किया।

इसी तरह ‘The Adventures of Rusty’ में देहरादून में दादा-दादी के साथ रहने वाले Rusty की दुनिया है—जानवर, रिश्तेदार, स्कूल, पहाड़, दोस्त और जीवन के छोटे-छोटे रोमांच। यह किताब भारतीय बाल साहित्य की क्लासिक कृतियों में गिनी जाती है।
रस्किन बॉन्ड को 1992 में साहित्य अकादमी पुरस्कार, 1999 में पद्मश्री और 2014 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। 2021 में उन्हें साहित्य अकादमी फेलोशिप भी मिली।

लेकिन उनकी लोकप्रियता का असली पैमाना पुरस्कार नहीं, वे लाखों पाठक हैं जो उनकी किताबों में अपने बचपन, अपने पहाड़, अपनी बारिश, अपने पेड़ और अपने आसपास के साधारण लोगों को पहचानते हैं।

92 वर्ष की उम्र में स्वास्थ्य ने उनकी शारीरिक सक्रियता को जरूर सीमित किया है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक कुछ महीने पहले उनकी स्पाइन की सर्जरी हुई। उन्हें चलने में परेशानी हुई और वे स्वास्थ्य लाभ के दौरान देहरादून में रह रहे हैं। उनकी दृष्टि भी कमजोर हुई है, इसलिए अब वे अपनी कहानियां हाथ से लिखने के बजाय अपनी पोती को बोलकर लिखवाते हैं।

लेकिन शरीर की मुश्किलों के बावजूद उनकी रचनात्मकता अब भी सक्रिय है। मई 2026 में उनके 92वें जन्मदिन के अवसर पर उनकी नई पुस्तक ‘All-Time Favourite Friendship Stories’ भी सामने आई।

और शायद यही इस मुलाकात की सबसे सुंदर बात है- एक तरफ 92 वर्ष का वह लेखक है जिसने अपना पूरा जीवन लिखते हुए बिताया, दूसरी तरफ लेखन की दुनिया में कदम रखती एक बच्ची। बॉन्ड ने उसे कोई लंबा भाषण नहीं दिया। बस किताब पर लिखा- “Congratulations on your book. Keep writing!”

एक वरिष्ठ लेखक की ओर से नई पीढ़ी के लेखक के नाम इससे खूबसूरत संदेश शायद बहुत मुश्किल से मिल सकता है।

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