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अमर उजाला और दैनिक जागरण ने ‘नहीं करने वाली पत्रकारिता’ विकसित कर ली है

स्क्रॉल ने भाजपा के चुनावी बॉन्ड को लेकर एक इन्वेस्टिगेटिव स्टोरी प्रकाशित की है. स्टोरी का शीर्षक है, “सिर्फ चुनावी बॉन्ड ही नहीं, भाजपा सभी प्रकार के राजनीतिक वित्त की सबसे बड़ी लाभार्थी है”… नीचे सब हेडिंग दी गई है, “2018 के बाद से सभी राजनीतिक दलों को मिले योगदान में हिंदुत्व पार्टी का हिस्सा लगभग 60% है.” स्टोरी धन्या राजेंद्रन और सुप्रिया शर्मा ने मिलकर की है. 

 स्टोरी के माध्यम से बताया गया है कि, बॉन्ड के माध्यम से भुनाए गए कुल 16,492 करोड़ रुपये में से भाजपा को 8,252 करोड़ रुपये मिले- जो कि मूल्य के आधे से थोड़ा अधिक है. इसका मतलब यह है कि अकेले एक पक्ष को 20 से अधिक अन्य की तुलना में बॉन्ड से अधिक धन प्राप्त हुआ. 

इस स्टोरी को रवीश कुमार ने शेयर करते हुए अपनी टिप्पणी में लिखा है, “अमर उजाला और दैनिक जागरण में काबिल पत्रकार तो होंगे ही, ऐसा तो हो नहीं सकता कि उनसे ऐसी ख़बर नहीं हो सकती. स्क्रॉल के पास कितनी छोटी टीम है, फिर भी हिन्दी के दो बड़े अखबारों में काम करने के लिए जब घर से सैंकड़ों पत्रकार निकलते होंगे तब अपने और अपने काम के बारे में क्या सोचते होंगे? इन अखबारों के पाठकों को पता होगा कि बॉन्ड की कहानी में कितना कुछ निकला है? और हमारे अखबार में कुछ नहीं है। 

इन अखबारों ने ‘नहीं करने वाली पत्रकारिता’ विकसित कर ली है और इनके पाठक ‘नहीं जानने वाले पाठक’ बन कर वर्षों से एक ही अख़बार पढ़े जा रहे हैं. कल ही हिन्दू का विश्लेषण था कि घाटे में चलने वाली 33 कंपनियों ने बीजेपी को कोई सौ करोड़ का चंदा दिया है. खबरों को कोई ऐसे मैनेज करता चले तो चंदा ही आठ हज़ार करोड़ नहीं मिलेगा, सीट भी आठ सौ पार हो जाएगी. कोई पूछने वाला तो है नहीं.”

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