
अभिषेक पाराशर-
भारत में एक सोशल मीडिया सिस्टम मौजूद है, जिसने पहलगाम मामले की तरह ईरान के मामले में फेक न्यूज को हवा दी और एक स्क्रीनशॉट को शेयर करना शुरू कर दिया, जिसमें यह दावा किया गया कि ईरान के खिलाफ ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’के दौरान ईरान पर हमला करने के लिए भारत ने अपने एयर स्पेस को इस्तेमाल करने की मंजूरी दी.
भारत में यह सब कुछ अनायास नहीं होता है. एक दिन पहले ही एक अंग्रेजी अखबार में लेख लिखा गया था, जो विशुद्ध वोट बैंक की राजनीति से प्रेरित विदेश नीति को प्रभावित करने की कोशिश थी और आज सोशल मीडिया पर यह अफवाह फैलाना कि अमेरिका ने भारत के एयर स्पेस का इस्तेमाल कर ईरान पर हमला किया.
पेंटागन ने आज ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ के डिटेल्स को जारी किया था, जिसमें 25 मिनट के ईरान के भीतर इस ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए 125 सैन्य विमानों का इस्तेमाल किया गया. डिकॉय फ्लीट के जरिए ध्यान भटकाया गया और फिर जिस फ्लीट को हमला करना था, उसने बाद में उड़ान भरी और ईरान के तीनों न्यूक्लियर सेंटर्स को निशाना बनाकर वापस चले आए. पेंटागन ने इस ऑपरेशन के रूट का मैप भी जारी किया था और उसे देखकर यह स्पष्ट हो जाता है कि इस पूरे हमले में भारत का एयर स्पेस कहीं शामिल नहीं था.
पेंटागन ने जिस मैप को शेयर किया है, उसमें साफ नजर आ रहा है कि अमेरिकी बॉम्बर्स ने अमेरिका के पूर्व से ईरान के लिए उड़ान भरी और वह भारत के एयर स्पेस में प्रवेश तो दूर उससे छूए बिना ही वापस चला गया. पहला मैप पेंटागन का है और दूसरा मैप उन गदहे और सीनियर जर्नलिस्ट्स के लिए जो उस फेक स्क्रीनशॉट को आगे बढ़ा रहे है. अगर ट्रोल इन सीनियर्स को आए दिन गाली देते रहते हैं, तो यह उनके कुकर्म हैं. मतलब मोबाइल, टैब और कई किताबें होती हैं घर में जिसमें आप झांक कर कन्फर्म कर सकते थे कि भारत का एयर स्पेस कहीं से भी इस ऑपरेशन का हिस्सा नहीं था.
पेंटागन ने जो जानकारी दी है, उसके मुताबिक अमेरिकी बॉम्बर्स ने व्हाइटमैन एयर फोर्स बेस से उड़ान भरी और फिर उन्होंने ईरान पर हमला किया. गूगल अर्थ पर जब इस लोकेशन को देखेंगे तो आपको समझ में आएगा कि ये विमान उत्तरी अटलांटिक महासागर को पार करते हुए मध्य पूर्व देशों के एयर स्पेस (जिनमें से कई देशों में अमेरिका का डिफेंस बेस है) के ऊपर से होते हुए ईरान पर हमला किया और फिर वापस लौट गए.


