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भास्कर ब्यूरो चीफ अनिल राही बाहर हुए, सुनील कुकरेती और उमेश कुमार उपाध्याय का ट्रांसफर

देश के सबसे चर्चित समाचार पत्रों में से एक माने जाने वाले दैनिक भास्कर अखबार में कर्मचारियों का खूब शोषण होता है। अगर साफ़-साफ़ कहें तो दैनिक भास्कर में किसी की भी नौकरी सुरक्षित नहीं है, भले ही वह कितना भी बड़ा तुर्रम खां क्यों ना हो, तो गलत न होगा! दैनिक भास्कर के मुम्बई के एंटरटेनमेंट ब्यूरो से खबर आ रही है कि यहाँ करीब 22 साल तक इस अखबार में नौकरी करने वाले ब्यूरो चीफ अनिल राही को कंपनी ने एक ही झटके में बिना ठोस नोटिस दिए बाहर का रास्ता दिखा दिया।

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देश के सबसे चर्चित समाचार पत्रों में से एक माने जाने वाले दैनिक भास्कर अखबार में कर्मचारियों का खूब शोषण होता है। अगर साफ़-साफ़ कहें तो दैनिक भास्कर में किसी की भी नौकरी सुरक्षित नहीं है, भले ही वह कितना भी बड़ा तुर्रम खां क्यों ना हो, तो गलत न होगा! दैनिक भास्कर के मुम्बई के एंटरटेनमेंट ब्यूरो से खबर आ रही है कि यहाँ करीब 22 साल तक इस अखबार में नौकरी करने वाले ब्यूरो चीफ अनिल राही को कंपनी ने एक ही झटके में बिना ठोस नोटिस दिए बाहर का रास्ता दिखा दिया।

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ज़रा सोचिए, इस अखबार के लिए अपने जीवन का अमूल्य समय (22 साल) देने वाले अनिल राही को उम्र (करीब 57 वर्ष) के इस पड़ाव में डी बी कॉर्प ने बाहर का रास्ता दिखा दिया तो दूसरों का ये कंपनी क्या कर सकती है। आपको बता दें कि अनिल राही ने अपने व्हाट्सऐप स्टेटस को चेंज कर एक फोटो अपनी कुर्सी की डाली है, जिस पर वे 22 साल तक बैठते रहे। साथ ही उन्होंने अपनी केबिन तथा ऑफिस के अंदर गलियारे की तस्वीरें डालकर साफ़ लिखा है- ‘मेरा आश्रय, मेरा स्वर्ग और मेरा नर्क भी’। अनिल राही को बाहर का रास्ता दिखाने पर मुम्बई के फिल्म पत्रकार भी सकते में हैं और वे भास्कर प्रबंधन की जम कर निंदा कर रहे हैं !

मुम्बई के एंटरटेनमेंट ब्यूरो से ही खबर आ रही है कि यहाँ सीनियर रिपोर्टर सुनील कुकरेती का कंपनी ने ट्रांसफर कर दिया है। हालांकि सुनील को मुंबई के ही दूसरे कार्यालय (बांद्रा-कुर्ला कॅाम्प्लेक्स) में ट्रांसफर किया गया है, जहां अभी तक मार्केटिंग और फाइनेंस डिपार्टमेंट का ही स्टाफ बैठता आया है, संपादकीय विभाग का कोई भी नहीं। वैसे एंटरटेनमेंट ब्यूरो के ही रिपोर्टर-कम-सब एडिटर उमेश कुमार उपाध्याय का भी कंपनी ने ट्रांसफर कर दिया है।

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उमेश को मुम्बई से रांची भेजा गया है। खबर तो यहाँ तक है कि उमेश जब एच आर मैनेजर अक्षता करंगुटकर से अपने ट्रांसफर की वजह पूछने गए थे, तब उन्हें फ़िल्मी स्टाइल में जवाब दे दिया गया कि मेरी मर्जी। यहां बताना जरूरी है कि इन तीनों ही महानुभावों ने जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार अपने बकाये वेतन के लिए क्लेम नहीं लगाया था। अब इन पर कंपनी ने गाज गिरा दी है।

यही नहीं, खबर तो ये भी है कि दैनिक भास्कर की पोलिटिकल यूनिट में भी छंटनी और ट्रांसफर की गाज जल्द गिरने वाली है। मराठी अखबार दिव्य मराठी से प्रमोद चुंचुवार सरीखे सीनियर और सुलझे पत्रकार को जिस तरह जलील करके बाहर का रास्ता दिखाया गया, उससे स्पष्ट है कि यहां किसी को भी अपनी अगले दिन की नौकरी का भरोसा नहीं है। बेशक, आप खुद को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस का लाडला बताएं या समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव का चहेता, आप अपनी तस्वीर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ हाथ मिलाते दिखाएं, लेकिन आप बचने वाले नहीं हैं।

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गौरतलब है कि देश भर में जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के तहत बकाये का क्लेम सबसे ज्यादा दैनिक भास्कर और डी बी कॉर्प के ही खिलाफ लगाए गए हैं। मुंबई में प्रिंसिपल करेस्पॅान्डेंट धर्मेन्द्र प्रताप सिंह, रिसेप्शनिस्ट लतिका चव्हाण और आलिया इम्तियाज़ शेख के अलावा आईटी विभाग के वरिष्ठ अॅस्बर्ट गोंजाल्विस ने भी डी बी कॉर्प प्रबंधन के खिलाफ जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में विभिन्न अदालतों सहित सुप्रीम कोर्ट में भी शिकायत कर रखी है।

शशिकांत सिंह

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पत्रकार और आर टी आई एक्सपर्ट

9322411335

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