मोदी का टाइम्स नाऊ पर इंटरव्यू : अर्नब एक स्टूडेंट की तरह Yes Sir-Yes Sir करते जा रहे थे

Nadim S. Akhter : किसी भी समाचार संस्थान और पत्रकार की प्रतिष्ठा बनने व जनता में उसका विश्वास जमने में काफी लम्बा वक्त लगता है. ये चीजें आते-आते आती हैं. लेकिन प्रतिष्ठा गंवाने और विश्वास खोने में मिनट भी नहीं लगते. कल Times Group के चैनल Times Now पर अर्नब गोस्वानी द्वारा पीएम नरेंद्र मोदी का लिया गया इंटरव्यू Modern Television Era में एक केस स्टडी साबित होने वाला है. आरोपों के अनुसार, अगर यह प्रायोजित इंटरव्यू था भी तो भी अर्नब गोस्वामी एक सुलझे हुए पत्रकार की तरह कम से कम बिहेव तो कर सकते थे !!! वो तो मोदी जी से ऐसे बात कर रहे थे कि जैसे मोदी जी उनकी क्लास ले रहे हों और अर्नब एक स्टूडेंट की तरह Yes Sir-Yes Sir करते जा रहे थे.

Times Group में मैंने काम किया है, बहुत से हालात देखे हैं, अटल बिहारी वाजपेयी का केंद्र की सत्ता से जाना और सोनिया गांधी का अप्रत्याशित रूप से केंद्र की राजनीति में मजबूती से उभरना. इन परिस्थितियों में खबरों और सम्पादकीय नीति के बदलते तेवरों को भी महसूस किया है. लेकिन कल Times Now पर अर्नब ने जो किया, वो चैनल की साख के साथ-साथ खुद उनकी साख भी उड़ा ले गया. एक निष्पक्ष और जनता के प्रतिनिधि के रूप में बात करने वाले और The nation wants to know की रट लगाने वाले अर्नब की मूर्ति विखंडित हो गई. ये बहुत बड़ा झटका है, Times Now चैनल के लिए भी और अर्नब के लिए भी.

जिस तरह नीरा राडिया कांड के बाद एनडीटीवी वाली बरखा दत्त ने अपनी साख गंवाई थी और उन्हें बाहर का रास्ता ना दिखाकर चैनल भी सवालों के घेरे में आया था, उसी तरह पीएम मोदी के ताजातरीन इंटरव्यू ने टाइम्स नाऊ और अर्नब, दोनों की प्रतिष्ठा धूल-धूसरित की है. पर अपनी जानकारी के अनुसार एक बात मैं जानता हूं. टाइम्स ग्रुप के मालिक जैन बंधु इस मामले में बहुत सचेत रहते हैं क्योंकि जब ब्रैंड ही नहीं बचेगा तो बिजनेस कहां से आएगा?

ये सभी जानते हैं कि टाइम्स ग्रुप में एडिटोरियल पर ब्रांड-रिस्पॉन्स यानी मार्केटिंग कितना हावी रहता है. हां, अपवाद स्वरूप अब तक अर्नब को चैनल में काफी स्वतंत्रता मिली हुई है पर पीएम के इंटरव्यू की उनकी mishandling ने मैनेजमेंट के माथे पर चिंता की लकीरें जरूर खींची होगी. एक और बात, जैन बंधु एक सीमा तक ही किसी को बर्दाश्त करते हैं.

सो अगर एक खास पार्टी के प्रति अर्नब की एडिटोरियल पॉलिसी में मैनेजमेंट का दखल नहीं है, तो ये मिस्टर अर्नब गोस्वामी को महंगा पड़ सकता है. उनकी चैनल से विदाई तक हो सकती है क्योंकि टाइम्स ग्रुप हमेशा से ये मानता आया है कि सम्पादक नहीं, मैनेजमेंट उनका -प्रॉडक्ट- चलाता है. अगर अर्नब के इस पत्रकारीय कौशल में मैनेजमेंट की सहमति है या थी तो बहुत कुछ होने वाला है. पर एक अंदाजा लगा सकता हूं. जल्द ही आपको Times Now पर Damage Control Exercise देखने को मिल सकता है. पर साख तो साख ही है. अगर गई तो समझिए कि भैंस पानी में ही रहेगी.

पत्रकार और शिक्षक नदीम एस. अख्तर की एफबी वॉल से.

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