गजेंद्र की बेटी मेघा से बात कर फफक पड़े आशुतोष, मेघा ने कहा- मीडिया गलत आरोप न उछाले

नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर मंतर पर फांसी लगाने वाले राजस्थान के किसान गजेंद्र सिंह कल्याणवत की बेटी मेघा से बात करते हुए आप नेता आशुतोष आज फूट-फूट कर रो पड़े। उन्होंने ‘आजतक’ न्यूज चैनल पर गजेंद्र की बेटी मेघा से बात करते हुए कहा कि मैं तुम्हारा गुनहगार हूं। मैं राजनाथ सिंह, अजय माकन, संबित पात्रा से गुजारिश करता हूं कि ऐसी राजनीति मत करिए। पार्टियां ऐसी राजनीति न करें। हम पर साजिश के आरोप लगाए जा रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस को इस मामले में राजनीति नहीं करनी चाहिए। मीडिया भी इस तरह का जर्नलिज्म न करे। मैं कुसूरवार हूं तो मुझे फांसी पर चढ़ा दे। जब आशुतोष रो रहे थे, चैनल पर भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा, कांग्रेस के नेता राजीव त्यागी भी बातचीत में शामिल थे।

मेघा ने कहा कि मेरे पिता तो नहीं रहे लेकिन पत्रकार इस तरह से किसी को दोषी न ठहराएं। मैं बोल नहीं पा रही हूं क्योंकि मेरे पिता मुझसे हमेशा के लिए अलग हो गए। मेरे परिवार को, हम तीन भाई बहनो को छोड़ कर चले गए। अब इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। जिन्होंने उनको उकसा कर पेड़ पर चढ़ाया, जिन्होंने उनके नाम से जाली सुसाइड नोट लिखा, वे गुनगहार दुनिया के सामने आने चाहिए। मेघा ने कहा कि जो लोग मेरे पिता की मृत्यु का वीडियो बना रहे थे, क्या उन्हें बचाने के लिए आगे नहीं आना चाहिए था?

आशुतोष ने कहा कि मुझे चाहे जो सजा दीजिए, मुझे फांसी पर चढ़ा दीजिए लेकिन ऐसी राजनीति बंद करिए। गजेंद्र कोई पहला किसान नहीं, जिसने आत्महत्या की हो। विदर्भ में सैकड़ों किसान इस तरह जान दे चुके हैं। अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसौदिया, संजय सिंह, कुमार विश्वास और मुझ पर इंसानियत का वास्ता देते हुए आरोप लगाए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि आम आदमी पार्टी ने आत्महत्या के लिए गजेंद्र को उकसाया।  

उन्होंने कहा कि सब लोग मिल-बैठकर कोई ऐसी तरकीब निकालें, कोई ऐसी व्यवस्था बनाएं कि आगे कोई किसान इस तरह से फिर आत्महत्या न करे। इसके लिए कानून में व्यवस्था की जाए। मीडिया भी इस तरह से खबरें लिखना-दिखाना बंद करे। ये जर्नलिज्म नहीं है। ऐसा जर्नलिज्म मत करिए। मैं भी लंबे समय तक मीडिया में रहा हूं। 

आशुतोष ने कहा कि मैं गजेंद्र की बेटी मेघा की राय से सहमत हूं। देश के सामने सच आना चाहिए। अभी सच का किसी को पता नहीं। मेघा का परिवार जो कहेगा, जो चाहेगा, वह करने के लिए हम तैयार हैं। हम भी इंसान हैं। हमारी इंसानियत पर तोहमत मत लगाइए। अगर किसी इससे शांति मिले तो हमे फांसी पर चढ़ा दे लेकिन मेरे जमीर को न ललकारे। 

गौरतलब है कि इससे पहले  दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी भूमि अधिग्रहण विधेयक के खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर आम आदमी पार्टी (आप) की रैली के दौरान एक किसान की आत्महत्या की घटना के बावजूद अपना भाषण जारी रखने के लिए माफी मांग चुके हैं। किसान गजेंद्र की खुदकुशी पर सवाल उठ रहे हैं। गजेंद्र के परिवार ने ही उनकी खुदकुशी पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जो सुसाइड नोट बरामद किया गया है, वह गजेंद्र की हेंडराइटिंग में नहीं है। परिवार ने गजेंद्र की डायरी भी एक न्यूज चैनल को दिखाई है, जिससे लगता है कि सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग गजेंद्र की हैंडराइटिंग से मेल नहीं खाती है। पीड़ित परिवार पूरे मामले की जांच की मांग कर रहा है। 

यह भी उल्लेखनीय होगा कि आप नेता कुमार विश्वास ने रैली के दौरान कहा था कि राजस्थान के रहने वाले एक किसान ने खुदकुशी की कोशिश की है। कुमार ने पूरी चिट्ठी पढ़कर सुनाते हुए कहा था कि मीडिया ने ये लेटर मुझे दिया है जिसमें लिखा है कि गजेंद्र की पूरी फसल बर्बाद हो गई है और उसके तीन बच्चे हैं। उसके पिता ने उसे घर से निकाल दिया है। इस चिट्टी में लिखा है कि मैं खुदकुशी कर रहा हूं, लेकिन उस नोट में कहीं भी नहीं लिखा है कि ‘मैं खुदकुशी कर रहा हूं।’

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Comments on “गजेंद्र की बेटी मेघा से बात कर फफक पड़े आशुतोष, मेघा ने कहा- मीडिया गलत आरोप न उछाले

  • किशोर बडोदिया says:

    आशुतोष नोटंकीवाज को अच्छे से मालूम है मीडिया मे किस तरह से हाईलाईट होना रहता है रोने का नाटक करता है……

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  • sandip thakur says:

    ये साला नाैटंकीबाज….इसकी मां मरी या बाप। घटना वाले day का इसी का स्टेटमेंट याद कीजीए…समझ आ जाएगा how big fraud he is? केजरीवाल काे दुश्मन की काेई जरूरत नही क्याेंकी उनकी टीम में आशुताेष है। एेसे लाेग हीपाेक्रेट हैं….माैत काे भी भुनाना जानते हैं।

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  • rohan kumar says:

    ये आशुतोष बहुत बड़ा ड्रामेबाज़ है, जब आईबीएन से इतने सारे लोगों को नौकरी से निकाल दिया था तब तो ये अपनी नौकरी बचाने में लगा था। क्या नौकरी खो देने वाले लोग भी मजबूर और लाचार नहीं हो गए थे। उन लोगों का इस आशुतोष के नौकरी बचाने से सीधा सरोकार था, तब ये क्यों नहीं रोया।

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